नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर राजधानी में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा, ट्रैफिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बड़े स्तर पर तैयार किया गया है। विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए राजधानी के कई प्रमुख इलाकों को पोस्टर, पेंटिंग्स, रोशनी और सजावटी इंतजामों से सजाया गया है। कई जगहों पर दिल्ली का स्वरूप किसी बड़े उत्सव जैसा दिखाई दे रहा है।
इस सम्मेलन में BRICS देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के अलावा साझेदार देशों के नेता, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख तथा कई वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा ले सकते हैं। ऐसे में विदेशी प्रतिनिधियों की सुरक्षित और सुचारु आवाजाही के लिए दिल्ली पुलिस ने विस्तृत सुरक्षा एवं ट्रैफिक प्लान तैयार किया है।
11 सितंबर से शुरू होगा असर, सरकारी दफ्तर भी रहेंगे बंद
BRICS सम्मेलन का असर राजधानी के सामान्य कामकाज पर भी दिखाई देगा। सम्मेलन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए 11 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट के साथ-साथ सभी जिला अदालतों में अवकाश रहेगा। ट्रायल कोर्ट में 12 सितंबर को भी कामकाज नहीं होगा।
इस वजह से दिल्ली की सभी निचली अदालतों में 11 से 13 सितंबर तक लगातार तीन दिन कामकाज बंद रहेगा। इसमें 11 और 12 सितंबर के अवकाश के बाद 13 सितंबर को रविवार होने के कारण अदालतें बंद रहेंगी।
इसके अलावा दिल्ली नगर निगम यानी MCD और केंद्र सरकार के सभी कार्यालय भी 11 सितंबर को बंद रखने का फैसला किया गया है। हालांकि आम लोगों के लिए जरूरी सेवाओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा। अस्पताल, सफाई व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
35 से ज्यादा सड़कें रहेंगी निगरानी में
सम्मेलन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती दिल्ली के ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने की होगी। विदेशी मेहमानों और VVIP काफिलों की आवाजाही के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कई विशेष इंतजाम किए हैं।
पुलिस के मुताबिक, अलग-अलग रूट पर करीब 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं। इसके अलावा 35 से ज्यादा सड़कों पर जरूरत के मुताबिक ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा या वैकल्पिक मार्गों की ओर भेजा जाएगा।
एडिशनल सीपी (ट्रैफिक) दिनेश कुमार गुप्ता ने बताया कि VVIP मोटरकेड के गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए सामान्य यातायात को रोका जा सकता है। इसका उद्देश्य विदेशी प्रतिनिधियों के काफिले को बिना रुकावट सुरक्षित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाना है।
पुलिस की कोशिश है कि आम वाहन चालकों को कम से कम परेशानी हो। इसके लिए ट्रैफिक कर्मियों की तैनाती, वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था और प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त निगरानी की जा रही है।
नौ होटलों से भारत मंडपम तक तैयार किए गए रूट
BRICS में हिस्सा लेने वाले विदेशी प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए दिल्ली के नौ प्रमुख होटलों को चुना गया है। इन सभी होटलों से नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम तक पहुंचने के रास्तों को पहले ही चिन्हित किया जा चुका है।
इन रूट पर पुलिस लगातार कारकेड रिहर्सल कर रही है। अभ्यास के दौरान यह देखा जा रहा है कि प्रतिनिधियों के काफिले को किस तरह कम से कम समय में सुरक्षित तरीके से भारत मंडपम तक पहुंचाया जाए।
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों और जवानों को भी इन मार्गों, डायवर्जन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। अधिकारियों की ब्रीफिंग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक काफिले की आवाजाही के समय किसी तरह की भ्रम की स्थिति पैदा न हो।
NSG की ‘कवच BRICS’ ड्रिल ने बढ़ाई सुरक्षा तैयारी
BRICS सम्मेलन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह सक्रिय हैं। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी NSG ने इसके लिए ‘कवच BRICS’ नाम से विशेष ऑपरेशन और अभ्यास किया है।
मंगलवार को करीब 100 NSG कमांडो ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया। राजधानी में चार अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग समय में ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास के दौरान संभावित आतंकी हमले जैसी आपात स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल की जांच की गई।
अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य यह था कि अगर सम्मेलन के दौरान किसी तरह का सुरक्षा खतरा सामने आता है तो NSG, दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां आपस में बेहतर समन्वय के साथ तत्काल कार्रवाई कर सकें।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेता मौजूद रहने वाले हैं, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया जा रहा है।
क्या है इस साल BRICS की थीम?
भारत में होने वाले इस साल के BRICS सम्मेलन की आधिकारिक थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है। इसका जोर लचीली अर्थव्यवस्था, नवाचार, सहयोग और सतत विकास जैसे मुद्दों पर है।
BRICS लगातार विस्तार करने वाला बहुपक्षीय समूह बन चुका है। शुरुआती दौर में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे और इसे BRIC के नाम से जाना जाता था।
चारों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली बैठक वर्ष 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई थी। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में BRIC का पहला शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ।
दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के बाद इसके नाम में ‘S’ जुड़ा और BRICS अस्तित्व में आया।
अब 11 देश हैं BRICS के पूर्ण सदस्य
BRICS का दायरा पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। जनवरी 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को समूह में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया। इसके बाद जनवरी 2025 में इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य बना।
इस विस्तार के बाद BRICS के पूर्ण सदस्यों की संख्या 11 हो गई है। इसके अलावा कई साझेदार देश भी समूह से जुड़े हैं। ऐसे में BRICS का प्रभाव केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक मुद्दों पर भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है।
अंतरिक्ष सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी
दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े सहयोग पर भी महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। BRICS देशों के बीच अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए एक स्थायी संस्थागत व्यवस्था तैयार करने का प्रस्ताव आगे बढ़ सकता है।
इसमें BRICS Space Council के गठन का विचार भी शामिल है। यदि इसे राजनीतिक स्तर पर मंजूरी मिलती है तो सदस्य देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग को अधिक व्यवस्थित और स्थायी आधार मिल सकता है।
BRICS के सदस्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच शुरुआती स्तर की बैठकें पहले ही हो चुकी हैं। इनमें रिमोट सेंसिंग और पृथ्वी की निगरानी करने वाले उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के बेहतर इस्तेमाल पर चर्चा हुई है।
एक देश का सैटेलाइट डेटा दूसरे के भी आएगा काम
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत BRICS देशों के मौजूदा भू-अवलोकन उपग्रहों से मिलने वाले डेटा को साझा करने की दिशा में काम किया जा सकता है। इससे सदस्य देशों के पास अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त बड़े पैमाने का पृथ्वी अवलोकन डेटा उपलब्ध होगा।
मौजूदा समय में रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टिलेशन को लेकर BRICS के भीतर सहयोग का ढांचा मौजूद है। नए सदस्य देशों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
इस तरह किसी देश में प्राकृतिक आपदा आने पर दूसरे सदस्य देशों के उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों और आंकड़ों का इस्तेमाल राहत एवं बचाव की योजना बनाने में किया जा सकेगा।
उदाहरण के तौर पर भारत में बाढ़, चक्रवात या किसी बड़े प्राकृतिक संकट के दौरान दूसरे देशों से मिले सैटेलाइट डेटा के जरिए प्रभावित इलाकों की मैपिंग की जा सकती है। इससे राहत एजेंसियों को नुकसान का आकलन करने और प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
भारतीय स्पेस कंपनियों के लिए भी खुल सकते हैं नए अवसर
BRICS के बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग का फायदा केवल सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। भारत का तेजी से विकसित हो रहा निजी स्पेस-टेक सेक्टर भी इससे नए कारोबारी अवसर हासिल कर सकता है।
भारतीय कंपनियां छोटे उपग्रहों के निर्माण, लॉन्च सेवाओं, सैटेलाइट इमेजरी, भू-अवलोकन, जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस, कृषि मैपिंग और आपदा प्रबंधन से जुड़े एप्लीकेशन के क्षेत्र में BRICS देशों के साथ सहयोग कर सकती हैं।
यदि साझा डेटा नेटवर्क और प्रस्तावित स्पेस काउंसिल की व्यवस्था आगे बढ़ती है तो भारतीय निजी कंपनियों के लिए सदस्य देशों में तकनीक और सेवाओं का बाजार और बड़ा हो सकता है।
इससे भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, तकनीकी सहयोग और नए कारोबारी अवसरों के लिहाज से फायदा मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल दिल्ली में BRICS सम्मेलन की तैयारियां सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। राजधानी की सड़कों से लेकर होटल और भारत मंडपम तक सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभ्यास कर रही हैं। वहीं, ट्रैफिक पुलिस आम लोगों की आवाजाही और विदेशी प्रतिनिधियों के सुरक्षित आवागमन के बीच संतुलन बनाने की तैयारी में जुटी है। 12 और 13 सितंबर को होने वाले इस सम्मेलन के दौरान दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष नजर रहेगी।
Photo : Bhaskar


