चंडीगढ़: हरियाणा सरकार सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार ने अगले दो वर्षों में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से जुड़े शहरों की सिटी बस सेवा में व्यापक बदलाव की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से सीएनजी आधारित सिटी बसों को हटाकर उनकी जगह आधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वायु प्रदूषण में कमी आएगी, ईंधन पर होने वाला खर्च घटेगा और यात्रियों को अधिक सुविधाजनक एवं आधुनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध होगी।
सरकार पहले से ही प्रदेश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और क्षेत्रीय परिवहन को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है। अब सार्वजनिक बस सेवा को भी हरित ऊर्जा आधारित बनाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसके लिए इलेक्ट्रिक बसों की खरीद, चार्जिंग स्टेशन निर्माण और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर एक साथ काम शुरू हो चुका है।
दो साल में बदल जाएगी सिटी बस सेवा की तस्वीर
सरकार की योजना के अनुसार अगले दो वर्षों के भीतर गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, रेवाड़ी, पलवल सहित एनसीआर के प्रमुख शहरों में चल रही सीएनजी सिटी बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों से बदल दिया जाएगा। इन बसों के संचालन के लिए आधुनिक चार्जिंग नेटवर्क भी विकसित किया जा रहा है ताकि बसों का संचालन बिना किसी बाधा के हो सके।
अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रिक बसें न केवल प्रदूषण कम करेंगी बल्कि लंबे समय में परिचालन लागत भी घटाएंगी। इससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक टिकाऊ और आर्थिक रूप से लाभकारी बन सकेगी।
बस अड्डों पर तैयार होगा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए केवल वाहन खरीदना ही पर्याप्त नहीं है, इसलिए सरकार समानांतर रूप से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी जोर दे रही है। विभिन्न शहरों के बस अड्डों और प्रमुख परिवहन केंद्रों पर हाई-कैपेसिटी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं।
इन स्टेशनों के माध्यम से बसों को निर्धारित समय में चार्ज कर नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाएगा। भविष्य में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने के साथ चार्जिंग क्षमता का भी विस्तार किया जाएगा।
प्रदूषण नियंत्रण पर सरकार का विशेष फोकस
दिल्ली और उससे सटे हरियाणा के शहर लंबे समय से वायु प्रदूषण की चुनौती का सामना कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने से प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी हाल ही में कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है। उनका कहना है कि स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन भविष्य की आवश्यकता है और हरियाणा इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रक्रिया जारी
सरकार पहले ही विभिन्न शहरों के लिए इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। प्रदेश के कुछ शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी प्रारंभ हो चुका है और यात्रियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
आने वाले समय में बसों की संख्या में लगातार वृद्धि की जाएगी ताकि अधिक से अधिक शहरों को इस सुविधा से जोड़ा जा सके। अधिकारियों के अनुसार यात्रियों की मांग और शहरों की आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त बसें भी खरीदी जाएंगी।
1500 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने की तैयारी
राज्य सरकार बड़े स्तर पर सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण करने की योजना पर काम कर रही है। इसी के तहत लगभग 1500 नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद की तैयारी चल रही है। आवश्यकता के अनुसार भविष्य में इस संख्या को और बढ़ाया जा सकता है।
इन बसों के शामिल होने से रोडवेज और सिटी बस सेवाओं का दायरा बढ़ेगा तथा यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और प्रदूषण मुक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा।
हर जिले में विकसित होगा EV चार्जिंग नेटवर्क
सरकार केवल सार्वजनिक परिवहन तक ही सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को भी बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इसके तहत राज्य के प्रत्येक जिले में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
योजना के अनुसार अगले दो वर्षों में प्रमुख मार्गों पर लगभग हर पांच से दस किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे इलेक्ट्रिक कार, दोपहिया और अन्य ईवी वाहनों के उपयोगकर्ताओं को लंबी दूरी तय करने में भी सुविधा मिलेगी।
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर निर्माण को भी मिलेगा बढ़ावा
हरियाणा सरकार कृषि क्षेत्र में भी स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम उठा रही है। सरकार प्रदेश में ही इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है।
इसके अलावा किसानों को इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर खरीदने के लिए आकर्षित करने हेतु सरकार पांच लाख रुपये तक की सब्सिडी देने की योजना पर भी काम कर रही है। इससे खेती में डीजल पर निर्भरता कम होगी और किसानों की परिचालन लागत घटाने में मदद मिल सकती है।
हरित परिवहन की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना तय समय में लागू हो जाती है तो हरियाणा सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, ईंधन की खपत घटेगी और शहरों में स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार की यह पहल केवल बसों के बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। चार्जिंग स्टेशन, इलेक्ट्रिक बसें, निजी ईवी को प्रोत्साहन और कृषि क्षेत्र में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर जैसी योजनाएं मिलकर हरियाणा को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन मॉडल की दिशा में आगे बढ़ा सकती हैं।




