हरियाणा के NHM कर्मियों को मिली बड़ी राहत: सेवा सुरक्षा और नए अधिकारों का रास्ता साफ

हरियाणा के NHM कर्मियों को मिली बड़ी राहत: सेवा सुरक्षा और नए अधिकारों का रास्ता साफ

हरियाणा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी National Health Mission (NHM) के तहत काम कर रहे हजारों कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। लंबे समय से सेवा सुरक्षा, प्रशासनिक अधिकारों और समान सेवा लाभ की मांग कर रहे एनएचएम कर्मचारियों को अब ‘सर्विस बाय-लॉज’ के दायरे में लाने की दिशा में सरकार ने कदम उठाया है। इस निर्णय को स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी सेवाओं से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से लागू करने का रास्ता तैयार हो सकता है।

एनएचएम कर्मचारी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों तक, इन कर्मचारियों की जिम्मेदारियां काफी व्यापक हैं। इसके बावजूद लंबे समय से कर्मचारियों के बीच सेवा शर्तों और नौकरी की सुरक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे में सरकार के नए निर्णय से कर्मचारियों को अपने भविष्य को लेकर अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

क्या है सर्विस बाय-लॉज और क्यों है यह महत्वपूर्ण

‘सर्विस बाय-लॉज’ का सामान्य अर्थ ऐसे निर्धारित सेवा नियमों से है, जिनके तहत किसी संगठन या विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों, जिम्मेदारियों, अधिकारों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया जाता है। जब कर्मचारियों के लिए सेवा नियम स्पष्ट होते हैं, तो विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

एनएचएम कर्मचारियों के मामले में यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से मिशन के तहत स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। उनके कार्य की प्रकृति कई बार नियमित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के समान होती है, लेकिन सेवा शर्तों को लेकर अलग व्यवस्था होने के कारण कर्मचारियों के बीच असमानता की भावना बनी रहती थी।

नए निर्णय से कर्मचारियों को सेवा से जुड़े मामलों में अधिक स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किसी भी लाभ की वास्तविक सीमा संबंधित सरकारी आदेशों और लागू सेवा नियमों के आधार पर ही तय होगी।

वर्षों से सेवा सुरक्षा को लेकर उठ रही थी मांग

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से सेवा सुरक्षा और बेहतर सेवा शर्तों की मांग की जाती रही है। कर्मचारी संगठनों का तर्क रहा है कि स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने में एनएचएम कर्मियों की बड़ी भूमिका है। वे अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लगातार जिम्मेदारियां निभाते हैं।

कर्मचारियों का कहना रहा है कि यदि उनसे लंबे समय तक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं ली जा रही हैं, तो उनकी नौकरी और सेवा शर्तों को लेकर भी स्पष्ट नीति होनी चाहिए। कई बार सेवा विस्तार, स्थानांतरण, वेतन, पद और अन्य प्रशासनिक मामलों को लेकर कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति देखने को मिली है।

इसी वजह से सर्विस बाय-लॉज का मुद्दा कर्मचारी संगठनों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। अब सरकार की ओर से इस दिशा में उठाए गए कदम को कर्मचारी समुदाय अपनी पुरानी मांगों की दिशा में एक अहम प्रगति के रूप में देख रहा है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले से जुड़ा मामला

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले से भी जुड़ी बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 17 नवंबर 2025 को डॉ. नेहा बंसल बनाम हरियाणा राज्य मामले में अदालत के समक्ष एनएचएम कर्मचारियों से संबंधित सेवा नियमों और उनके अधिकारों का मुद्दा आया था।

मामले की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों को सेवा उपनियमों के लाभ से वंचित रखने के सवाल पर विचार किया गया। इसके बाद यह विषय केवल व्यक्तिगत याचिका तक सीमित रहेगा या इसका लाभ अन्य समान स्थिति वाले कर्मचारियों को भी मिलना चाहिए, इस पर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा आगे बढ़ी।

शुरुआत में कर्मचारियों के बीच यह आशंका थी कि अदालत के फैसले का लाभ केवल उन कर्मचारियों तक सीमित रह सकता है, जिन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। ऐसी स्थिति में अन्य कर्मचारियों के लिए समान लाभ हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता था।

बाद में वित्त विभाग की मंजूरी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद सरकार की ओर से इस व्यवस्था को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में कदम उठाया गया। इससे उन कर्मचारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद बनी है, जो व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में नहीं गए थे।

सभी पात्र कर्मचारियों को लाभ देने पर जोर

सरकार की ओर से जारी निर्देशों में संबंधित अधिकारियों को आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। इसमें सिविल सर्जनों और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में पात्र कर्मचारियों से जुड़े मामलों को निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ाना होगा।

प्रशासनिक आदेशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना माना जा रहा है कि पात्र कर्मचारियों को लाभ देने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। हालांकि किसी भी कर्मचारी को मिलने वाले वास्तविक लाभ की स्थिति उसकी पात्रता, नियुक्ति की प्रकृति और लागू नियमों के आधार पर अलग हो सकती है।

इसलिए कर्मचारियों के लिए जरूरी होगा कि वे विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेशों और अपने संबंधित कार्यालय से मिलने वाली जानकारी को ध्यान से देखें। सेवा नियमों से जुड़े मामलों में केवल सामान्य जानकारी के आधार पर निर्णय लेने के बजाय संबंधित विभागीय निर्देशों का पालन करना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

NHM कर्मचारियों ने फैसले का किया स्वागत

सरकार के इस कदम के बाद एनएचएम कर्मचारी संगठनों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह फैसला उनके लंबे संघर्ष का परिणाम है। उनका तर्क है कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए रखने में एनएचएम कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है और उन्हें सेवा नियमों के स्तर पर भी उचित सुरक्षा मिलनी चाहिए।

कर्मचारी संगठनों के अनुसार, लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के लिए नौकरी से जुड़ी अनिश्चितता मानसिक दबाव का कारण बन सकती है। यदि सेवा शर्तें अधिक स्पष्ट होती हैं, तो कर्मचारियों को अपने भविष्य को लेकर बेहतर भरोसा मिल सकता है।

कर्मचारियों का यह भी मानना है कि बेहतर सेवा सुरक्षा से उनका मनोबल बढ़ सकता है। जब कर्मचारी अपनी नौकरी और सेवा शर्तों को लेकर अपेक्षाकृत सुरक्षित महसूस करते हैं, तो वे अपने कार्य पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र जैसे संवेदनशील विभाग में इसका प्रभाव सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं में NHM कर्मचारियों की भूमिका

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम करने वाले कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था के कई महत्वपूर्ण हिस्सों से जुड़े होते हैं। इनमें स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, टीकाकरण कार्यक्रम, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाएं, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं और विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन शामिल हो सकता है।

कई कर्मचारी ऐसे क्षेत्रों में भी सेवाएं प्रदान करते हैं जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच अपेक्षाकृत सीमित होती है। ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य कार्यक्रमों को आम लोगों तक पहुंचाने में इन कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इसी कारण एनएचएम कर्मचारियों की सेवा से जुड़ी किसी भी नीति का प्रभाव केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता। इसका संबंध राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से भी जुड़ा होता है।

कर्मचारियों को सेवा स्थिरता से क्या उम्मीदें हैं

नए फैसले के बाद कर्मचारियों को उम्मीद है कि सेवा नियमों के स्पष्ट होने से भविष्य में कई प्रशासनिक समस्याओं का समाधान हो सकता है। नियुक्ति से जुड़े मामलों, सेवा अवधि, विभागीय प्रक्रियाओं और अन्य संबंधित विषयों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने से विवादों की संभावना कम हो सकती है।

हालांकि यह समझना जरूरी है कि सर्विस बाय-लॉज के दायरे में आना अपने आप में नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलने के समान नहीं है। दोनों व्यवस्थाओं के बीच कानूनी और प्रशासनिक अंतर हो सकता है। इसलिए कर्मचारियों को सरकार के आधिकारिक आदेश में दिए गए प्रावधानों को ही अंतिम आधार मानना चाहिए।

यह भी देखा जाना बाकी है कि नए नियमों को किस तरह लागू किया जाता है और अलग-अलग श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए इसका व्यावहारिक प्रभाव क्या रहता है।

लंबित जनहित याचिका के कारण स्थिति पर बनी रहेगी नजर

इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि सरकार की ओर से लागू की जा रही व्यवस्था लंबित जनहित याचिका यानी PIL के अंतिम फैसले के अधीन बताई गई है। इसका अर्थ है कि भविष्य में अदालत के अंतिम निर्णय के आधार पर मौजूदा व्यवस्था में बदलाव या संशोधन की संभावना बनी रह सकती है।

ऐसे में कर्मचारियों के लिए वर्तमान निर्णय निश्चित रूप से राहत देने वाला हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम और स्थायी व्यवस्था मानने से पहले न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम परिणाम का इंतजार करना होगा। अदालत के अंतिम फैसले के बाद सेवा नियमों और उनके दायरे को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकती है।

यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सेवा नियमों से जुड़े मामलों में न्यायालय के निर्णय का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। यदि अदालत भविष्य में कोई अलग दिशा-निर्देश जारी करती है, तो सरकार को उसके अनुसार अपनी नीति में आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं।

सरकार और कर्मचारियों के बीच आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण

अब इस फैसले के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण इसके प्रभावी क्रियान्वयन का होगा। केवल आदेश जारी होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पात्र कर्मचारियों तक इसका लाभ समय पर पहुंचे और किसी स्तर पर अनावश्यक प्रशासनिक अड़चन न आए।

सिविल सर्जन कार्यालयों और अन्य संबंधित विभागीय अधिकारियों को कर्मचारियों की पात्रता तथा सेवा रिकॉर्ड के आधार पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। कर्मचारियों को भी अपने दस्तावेज और सेवा से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने की आवश्यकता हो सकती है, ताकि यदि किसी प्रकार का सत्यापन मांगा जाए तो प्रक्रिया में देरी न हो।

एनएचएम कर्मचारी संगठनों की भूमिका भी आगे महत्वपूर्ण रह सकती है। वे कर्मचारियों को नए नियमों की जानकारी देने, प्रशासनिक समस्याओं को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और सरकार के साथ संवाद बनाए रखने का काम कर सकते हैं।

भविष्य में अन्य संविदा कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है असर

हरियाणा में बड़ी संख्या में कर्मचारी अलग-अलग सरकारी योजनाओं और मिशन मोड पर काम करते हैं। ऐसे में एनएचएम कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों से जुड़ा यह निर्णय भविष्य में अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

यदि सर्विस बाय-लॉज की व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावी रहती है और कर्मचारियों को इससे बेहतर प्रशासनिक सुरक्षा मिलती है, तो अन्य विभागों में काम करने वाले संविदा या मिशन आधारित कर्मचारी भी समान व्यवस्था की मांग उठा सकते हैं।

इससे सरकार के सामने भविष्य में संविदा कर्मचारियों की सेवा शर्तों को लेकर व्यापक नीति बनाने का सवाल भी खड़ा हो सकता है। हालांकि अलग-अलग विभागों और योजनाओं की प्रकृति अलग होने के कारण प्रत्येक मामले का निर्णय संबंधित नियमों और कानूनी स्थिति के आधार पर ही किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों के मनोबल पर संभावित प्रभाव

एनएचएम कर्मचारियों का मनोबल सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यक्षमता से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि कर्मचारियों को अपनी सेवा शर्तों और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर अधिक स्पष्टता मिलती है, तो इससे कार्यस्थल पर स्थिरता की भावना बढ़ सकती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में कर्मचारियों को कई बार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती, स्वास्थ्य अभियानों में जिम्मेदारी और आपात परिस्थितियों के दौरान अतिरिक्त कार्यभार जैसी स्थितियों में कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

ऐसे में सेवा सुरक्षा से जुड़ी नीतियां कर्मचारियों के लिए केवल नौकरी का विषय नहीं होतीं, बल्कि उनके कार्य वातावरण और भविष्य की योजना से भी जुड़ी होती हैं। सरकार के इस निर्णय के बाद अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर रहेगी कि नई व्यवस्था का वास्तविक क्रियान्वयन किस तरह होता है और लंबित न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम परिणाम क्या रहता है।