हरियाणा कैबिनेट का बड़ा फैसला: गरीबों के लिए सस्ता होगा घर का सपना, गांवों में लाखों लोगों को मिलेगा संपत्ति का कानूनी अधिकार

हरियाणा कैबिनेट का बड़ा फैसला: गरीबों के लिए सस्ता होगा घर का सपना, गांवों में लाखों लोगों को मिलेगा संपत्ति का कानूनी अधिकार

हरियाणा सरकार ने शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों को राहत देने वाले दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी देकर आवास और भूमि स्वामित्व से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के लाभार्थियों के लिए स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में भारी राहत देने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी देह यानी लाल डोरा में रहने वाले लाखों लोगों को संपत्ति का कानूनी स्वामित्व दिलाने के लिए हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) नियम-2026 को भी मंजूरी प्रदान की गई। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से जहां गरीब परिवारों के लिए घर खरीदना आसान होगा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी और लोगों को अपने मकान और जमीन पर कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे।

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अंतर्गत पंजीकृत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लाभार्थियों को बड़ी आर्थिक राहत दी जाएगी। यह सुविधा योजना के तहत 60 वर्गमीटर तक की पात्र आवासीय इकाइयों पर लागू होगी। सरकार का कहना है कि कई बार गरीब परिवारों को मकान मिलने के बाद भी स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ता था, जिससे स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया कठिन हो जाती थी। अब इस आर्थिक बोझ को काफी हद तक कम कर दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत पात्र आवासीय इकाइयों की कन्वेयंस डीड यानी स्वामित्व हस्तांतरण दस्तावेज पर केवल 500 रुपये का पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी भी घटाकर मात्र 500 रुपये प्रति दस्तावेज निर्धारित कर दी गई है। इससे हजारों रुपये की बचत होगी और लाभार्थी बेहद कम खर्च में अपने मकान का कानूनी स्वामित्व प्राप्त कर सकेंगे।

वर्तमान व्यवस्था में हरियाणा में संपत्ति के हस्तांतरण पर सामान्य रूप से पांच प्रतिशत स्टांप ड्यूटी तथा दो प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। यदि संपत्ति किसी महिला के नाम हस्तांतरित की जाती है तो स्टांप ड्यूटी में दो प्रतिशत की छूट का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त पंजीकरण शुल्क भी अलग से स्लैब के आधार पर लिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 50 हजार रुपये तक हो सकती है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के पात्र लाभार्थियों को इन भारी शुल्कों के स्थान पर केवल नाममात्र की राशि का भुगतान करना होगा।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन को भी गति मिलेगी। कई लाभार्थी अतिरिक्त शुल्क के कारण स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते थे। अब यह प्रक्रिया अधिक सरल, सस्ती और सुविधाजनक हो जाएगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपने घर का मालिक बनने में बड़ी सहायता मिलेगी और आवासीय सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

मंत्रिमंडल ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) नियम-2026 को मंजूरी देकर सरकार ने लाल डोरा क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोगों को कानूनी स्वामित्व दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के अनेक गांवों में लोग पीढ़ियों से जिन मकानों और जमीनों पर रह रहे हैं, उनका स्पष्ट राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। लंबे समय से कब्जा होने के बावजूद स्वामित्व के अधिकार दर्ज न होने के कारण लोगों को संपत्ति बेचने, बैंक से ऋण लेने, विरासत दर्ज कराने और अन्य कानूनी कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता रहा है।

नई नियमावली के तहत आबादी देह क्षेत्रों में संपत्तियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और पात्र लोगों के स्वामित्व अधिकारों को कानूनी मान्यता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि और संपत्ति से जुड़ी व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी तथा भविष्य में होने वाले विवादों में भी कमी आएगी।

स्वामित्व निर्धारण की प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए नामित अधिकारियों को सिविल कोर्ट के समान अधिकार दिए जाएंगे। वे आवश्यकतानुसार संबंधित व्यक्तियों को समन भेज सकेंगे, दस्तावेज मंगा सकेंगे, गवाहों के बयान दर्ज कर सकेंगे और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय ले सकेंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक हकदारों को ही कानूनी स्वामित्व मिले और किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी मुकदमों और विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी। अभी तक स्पष्ट स्वामित्व रिकॉर्ड न होने के कारण कई परिवार वर्षों तक कानूनी विवादों में उलझे रहते थे। नए नियम लागू होने के बाद संपत्तियों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों का समाधान आसान हो जाएगा।

कानूनी स्वामित्व मिलने से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक लाभ भी होगा। स्पष्ट स्वामित्व दस्तावेज होने पर लोग अपनी संपत्ति के आधार पर बैंक ऋण प्राप्त कर सकेंगे, सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे और अन्य वित्तीय संस्थानों से भी आसानी से जुड़ पाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार, छोटे उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सरकार भूमि प्रशासन को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी लगातार काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि नए नियमों के तहत तैयार होने वाले रिकॉर्ड भविष्य में डिजिटल भूमि प्रबंधन प्रणाली से भी जोड़े जा सकेंगे, जिससे संपत्ति संबंधी जानकारी सुरक्षित और व्यवस्थित रहेगी। इससे फर्जी दस्तावेजों, दोहरे स्वामित्व दावों और रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी गरीबों को स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में दी गई राहत तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व अधिकार सुनिश्चित करने जैसे फैसले सामाजिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। एक ओर गरीब परिवार कम खर्च में अपने घर का कानूनी स्वामित्व प्राप्त कर सकेंगे, वहीं दूसरी ओर गांवों में रहने वाले लोगों को अपनी संपत्ति पर वैधानिक अधिकार मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और संपत्ति का बाजार मूल्य भी बढ़ेगा।

राज्य सरकार का कहना है कि इन दोनों निर्णयों का उद्देश्य केवल प्रशासनिक सुधार करना नहीं, बल्कि नागरिकों को संपत्ति से जुड़े अधिकार सरल, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना है। यदि इन फैसलों का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन होता है तो लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के लिए घर खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक सस्ता और आसान होगा, जबकि लाल डोरा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार अपनी संपत्ति का कानूनी प्रमाण और उससे जुड़े सभी अधिकार प्राप्त होंगे। सरकार को विश्वास है कि इन सुधारों से हरियाणा में आवासीय सुरक्षा, भूमि प्रबंधन व्यवस्था और नागरिक सेवाओं की पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी तथा लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा।