हरियाणा कांग्रेस ने आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए संगठन को केवल चुनाव के समय सक्रिय होने वाली व्यवस्था के बजाय लगातार राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। पार्टी अब जिला स्तर से आगे बढ़कर ब्लॉक और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दों को सीधे जनता के बीच ले जाने की तैयारी कर रही है। इसी रणनीति के तहत प्रदेश कांग्रेस प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त ने मंगलवार को अपने एक दिवसीय चंडीगढ़ प्रवास के दौरान पार्टी के विभिन्न संगठनों और प्रकोष्ठों के साथ लगातार बैठकें कीं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के साथ हुई इन बैठकों में संगठन सृजन अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई और अलग-अलग मोर्चों को आने वाले दिनों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपने पर चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व का जोर इस बात पर है कि संगठन का विस्तार केवल पदाधिकारियों की नियुक्ति तक सीमित न रहे, बल्कि कार्यकर्ताओं को स्थानीय राजनीतिक मुद्दों से जोड़कर उन्हें सक्रिय भूमिका दी जाए।
कांग्रेस की बैठकों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा पार्टी के भीतर दिखाई देने वाली गुटबाजी और मंच की राजनीति को लेकर भी रहा। पार्टी ने संकेत दिया है कि अब बैठकों और कार्यक्रमों में मंच पर ज्यादा से ज्यादा नेताओं को बैठाने की परंपरा को समाप्त किया जाएगा। कार्यक्रमों में मंच पर मुख्य रूप से वही व्यक्ति रहेगा जिसे संबोधन करना है, जबकि अन्य वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता एक साथ नीचे बैठेंगे। पार्टी नेतृत्व इसे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच दूरी कम करने तथा संगठन में समानता की भावना मजबूत करने की कवायद के रूप में देख रहा है।
कांग्रेस की कोशिश है कि कार्यक्रमों में कुर्सियों और मंच को लेकर होने वाली अंदरूनी खींचतान की जगह संगठनात्मक एकजुटता को प्राथमिकता मिले। नेतृत्व का मानना है कि जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं को यह महसूस होना जरूरी है कि संगठन में उनका राजनीतिक महत्व है और वे केवल चुनावी गतिविधियों के दौरान इस्तेमाल होने वाला ढांचा नहीं हैं।
जिला बैठकों के बाद अब ब्लॉक स्तर पर जोर
हरियाणा कांग्रेस ने जिला कांग्रेस कमेटियों की बैठकों के बाद अब ब्लॉक स्तर पर अधिवेशन आयोजित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पार्टी के अनुसार, इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल संगठनात्मक चर्चा करना नहीं बल्कि स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों को गति देना भी है। कांग्रेस इन अधिवेशनों के माध्यम से स्थानीय समस्याओं, बेरोजगारी, महिला अधिकारों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को कार्यकर्ताओं के जरिए जनता तक पहुंचाने की रणनीति बना रही है।
नूंह के पिनगवां, गुरुग्राम के बादशाहपुर, अंबाला के साहा और कुरुक्षेत्र के शाहबाद में आयोजित ब्लॉक स्तरीय अधिवेशनों को लेकर पार्टी नेतृत्व ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दर्ज की है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार इन कार्यक्रमों में वरिष्ठ नेता एक साथ कार्यकर्ताओं के बीच बैठे और संगठनात्मक स्तर पर संवाद किया गया। इससे कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला है। अब पार्टी इसी मॉडल को प्रदेश के अन्य ब्लॉकों में लागू करने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि यदि ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ता नियमित रूप से सक्रिय रहते हैं तो बूथ स्तर तक राजनीतिक गतिविधियों को विस्तार देना आसान होगा। इसी उद्देश्य से अधिवेशनों को भविष्य में स्थानीय मुद्दों पर जनसंपर्क और आंदोलन की तैयारी के मंच के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।
महिला कांग्रेस को आंदोलन की जिम्मेदारी
प्रदेश प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा और हरियाणा महिला कांग्रेस अध्यक्ष पर्ल चौधरी के साथ भी बैठक की। इसमें महिला संगठन की गतिविधियों और भविष्य की राजनीतिक भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में अधिक से अधिक महिलाओं को कांग्रेस के साथ जोड़ने तथा महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने की रणनीति पर विचार किया गया। पार्टी की योजना है कि महिलाओं को केवल संगठन में सदस्य बनाने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर राजनीतिक अभियानों और आंदोलनों में सक्रिय भूमिका दी जाए।
इसके अलावा नवचयनित और पूर्व जनप्रतिनिधियों का एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित करने पर भी सहमति बनी। कांग्रेस इस सम्मेलन के जरिए महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद बढ़ाने तथा उन्हें आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
पार्टी का मानना है कि महिला मतदाताओं से जुड़े मुद्दों को गांव और वार्ड स्तर तक ले जाकर उन्हें संगठन के साथ जोड़ा जा सकता है। महिला आरक्षण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर महिलाओं से संबंधित समस्याओं को भी राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाने की तैयारी है।
बेरोजगारी पर युवाओं को लामबंद करने की तैयारी
युवाओं को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति को और ज्यादा आक्रामक बनाने के संकेत दिए हैं। प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदयभानु चिब, प्रभारी सत्यवान गहलोत और प्रदेश अध्यक्ष निशित कटारिया के साथ विस्तृत बैठक की। इसमें रोजगार और बेरोजगारी को आने वाले समय में पार्टी के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल करने पर चर्चा हुई।
बैठक में राहुल गांधी के आह्वान पर शुरू किए गए ‘छात्रों व युवाओं की गूंज’ कार्यक्रम को ब्लॉक से लेकर बूथ स्तर तक पहुंचाने की योजना पर मंथन हुआ। कांग्रेस चाहती है कि युवाओं से जुड़े रोजगार, भर्ती और भविष्य के अवसरों जैसे मुद्दों को स्थानीय स्तर पर उठाया जाए और इन्हें बड़े राजनीतिक अभियान का रूप दिया जाए।
युवक कांग्रेस की प्रदेश कमेटी और विभिन्न जिलों के अध्यक्षों से भी संगठन की मौजूदा स्थिति तथा भविष्य की चुनौतियों को लेकर सुझाव लिए गए। पार्टी नेतृत्व ने युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें केवल कार्यक्रमों में भीड़ का हिस्सा बनाने के बजाय आंदोलन की अगली पंक्ति में लाने पर जोर दिया।
कांग्रेस की रणनीति में सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी संपर्क को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी का प्रयास है कि रोजगार का मुद्दा केवल प्रदेश स्तरीय भाषणों तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ता इसे युवाओं के बीच लगातार उठाएं।
ग्रामीण इलाकों में पंचायती राज प्रकोष्ठ की भूमिका बढ़ेगी
राजीव गांधी पंचायती राज प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सुनील पंवार के साथ हुई बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन की स्थिति की समीक्षा की गई। कांग्रेस अब पंचायत स्तर पर अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत ग्रामीण इलाकों में स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उन्हें संगठनात्मक और राजनीतिक अभियानों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
बैठक में मंडलों की मैपिंग तथा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की प्रगति पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस संगठनात्मक ढांचे को मतदाता स्तर तक मजबूत करने के लिए मंडल और बूथ की संरचना को अधिक प्रभावी बनाने पर काम कर रही है।
संगठन सृजन अभियान को राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी
प्रदेश कांग्रेस के लिए संगठन सृजन अभियान अब केवल नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी देने या संगठनात्मक ढांचे को पूरा करने की कवायद नहीं रह गया है। पार्टी इसे आगामी राजनीतिक संघर्ष की आधारशिला के रूप में देख रही है। नेतृत्व का जोर है कि ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की नियमित बैठकें हों और स्थानीय समस्याओं पर राजनीतिक गतिविधियां संचालित की जाएं।
कांग्रेस की योजना है कि अलग-अलग संगठनों को अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच सक्रिय किया जाए। महिला कांग्रेस को महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर, युवक कांग्रेस को रोजगार और युवाओं से संबंधित विषयों पर तथा पंचायती राज प्रकोष्ठ को ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन विस्तार की जिम्मेदारी दी जा रही है।
इस रणनीति के जरिए कांग्रेस भाजपा सरकार के खिलाफ अलग-अलग मुद्दों को एक बड़े राजनीतिक अभियान में बदलने की कोशिश करेगी। पार्टी का लक्ष्य है कि स्थानीय स्तर पर उठने वाले मुद्दे पहले ब्लॉक और जिला स्तर पर सामने आएं और बाद में उन्हें राज्यव्यापी राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनाया जाए।
मंच की राजनीति खत्म कर कार्यकर्ता को केंद्र में लाने का प्रयास
कांग्रेस के भीतर मंच पर बैठने को लेकर होने वाली खींचतान को खत्म करने का फैसला संगठनात्मक बदलाव की दिशा में अहम माना जा रहा है। पार्टी का मानना है कि कार्यक्रमों में वरिष्ठ नेताओं के बीच मंच साझा करने को लेकर होने वाली प्रतिस्पर्धा से कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाता है। इसलिए अब मंच को सीमित रखते हुए अधिक से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक साथ बैठाने की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे संगठन में बराबरी का संदेश जाएगा और गुटों के बीच दूरी कम करने में मदद मिलेगी। ब्लॉक अधिवेशनों में अपनाए गए इस प्रयोग को अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाने की तैयारी है।
कुल मिलाकर हरियाणा कांग्रेस ने संगठन को चुनावी मशीनरी के बजाय निरंतर राजनीतिक संघर्ष के माध्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। महिला आरक्षण, बेरोजगारी, ग्रामीण समस्याएं और स्थानीय मुद्दे पार्टी के संभावित अभियानों के केंद्र में रहेंगे। ब्लॉक और बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता बढ़ाकर कांग्रेस आने वाले समय में भाजपा सरकार के खिलाफ ज्यादा संगठित और जमीनी राजनीतिक अभियान खड़ा करने की कोशिश करेगी।




