हरियाणा सरकार ने ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और गांवों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण योजना लागू की है। राज्य सरकार ने स्वयं सहायता समूहों (सेल्फ हेल्प ग्रुप-एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को पंचायत की शामलात भूमि पट्टे पर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, ताकि वे डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकें और नियमित आय का स्रोत विकसित कर सकें। इस नई व्यवस्था को ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार का मानना है कि हरियाणा के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं लंबे समय से पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी रही हैं, लेकिन भूमि और संसाधनों की कमी के कारण वे इस कार्य को व्यावसायिक स्तर तक नहीं पहुंचा पातीं। अब पंचायत की शामलात भूमि उपलब्ध होने से महिलाओं को डेयरी यूनिट स्थापित करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) से जुड़े पात्र स्वयं सहायता समूह पंचायत की भूमि लेकर डेयरी गतिविधियां संचालित कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य केवल भूमि उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराना है, ताकि वे सफल उद्यमी बन सकें।
इसी दिशा में जिला विकास भवन में एडीसी एवं जिला परिषद तथा जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के पांचों विकास खंडों के 16 गांवों से आईं 27 सक्रिय स्वयं सहायता समूह सदस्यों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को आधुनिक पशुपालन, डेयरी प्रबंधन, पशुओं की देखभाल, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीक, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य और व्यवसाय संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि नई नीति के तहत उपायुक्त ग्राम पंचायत की अधिकतम 500 वर्ग गज शामलात भूमि दो वर्ष की अवधि के लिए स्वयं सहायता समूहों को पट्टे पर देने की अनुमति प्रदान कर सकेंगे। यदि निर्धारित अवधि के दौरान समूह की ओर से संचालित डेयरी गतिविधियां सफल और संतोषजनक पाई जाती हैं, तो इस पट्टे की अवधि तीन वर्ष तक और बढ़ाई जा सकेगी। इस प्रकार महिलाओं को लंबे समय तक डेयरी व्यवसाय संचालित करने का अवसर मिलेगा और वे अपने कारोबार को स्थायी रूप से विकसित कर सकेंगी।
अधिकारियों का कहना है कि यह योजना विशेष रूप से भूमिहीन और सीमित संसाधनों वाली महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक महिलाएं पशुपालन का अनुभव रखती हैं, लेकिन निजी भूमि उपलब्ध न होने के कारण वे डेयरी यूनिट स्थापित नहीं कर पातीं। पंचायत की भूमि पट्टे पर मिलने से उनकी यह सबसे बड़ी बाधा दूर होगी।
सरकार ने योजना का लाभ केवल सक्रिय और अनुशासित स्वयं सहायता समूहों तक सीमित रखा है। इसके लिए कुछ स्पष्ट पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। योजना का लाभ वही स्वयं सहायता समूह उठा सकेंगे, जो कम से कम एक वर्ष से नियमित रूप से कार्य कर रहे हों। समूह का नियमित बचत और ऋण लेन-देन का रिकॉर्ड होना भी अनिवार्य होगा। प्रत्येक समूह में कम से कम 10 महिला सदस्य होना आवश्यक होगा और सभी सदस्य उसी ग्राम पंचायत की निवासी होनी चाहिए, जहां भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा समूह की नियमित बैठकों में कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। सरकार का मानना है कि सक्रिय और अनुशासित समूह ही इस योजना का प्रभावी ढंग से संचालन कर सकेंगे। इसलिए केवल उन्हीं समूहों को पात्र माना जाएगा जो निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हों।
योजना के तहत कुछ प्रतिबंध भी लगाए गए हैं ताकि वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं को प्राथमिकता मिल सके। जिन स्वयं सहायता समूहों पर किसी सरकारी योजना या बैंक का बकाया है या जो डिफाल्टर घोषित हैं, वे इस योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे। इसी प्रकार जिन समूहों के सदस्यों या उनके परिवारों के नाम परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के अनुसार 500 वर्ग गज या उससे अधिक निजी भूमि दर्ज है, उन्हें भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सीमित संसाधनों वाले परिवारों को इस योजना का अधिकतम लाभ मिल सके।
इस योजना की सफलता में “पशु सखी” की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक योगेश पाराशर ने बताया कि जिले में कुल 50 महिलाओं को पशु सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। ये प्रशिक्षित महिलाएं गांव-गांव जाकर स्वयं सहायता समूहों को डेयरी व्यवसाय शुरू करने और उसे सफलतापूर्वक संचालित करने में मार्गदर्शन देंगी।
पशु सखी महिलाओं को पशुओं के पोषण, टीकाकरण, नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों, पशु स्वास्थ्य, डेयरी प्रबंधन और दूध की गुणवत्ता बनाए रखने संबंधी जानकारी देंगी। इसके अलावा वे महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने, बैंक ऋण दिलाने, डेयरी परियोजनाओं की तैयारी और दूध के विपणन में भी सहयोग करेंगी।
सरकार का मानना है कि केवल भूमि उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि महिलाओं को व्यवसाय प्रबंधन, वित्तीय साक्षरता और बाजार से जोड़ने का प्रशिक्षण मिलेगा, तभी यह योजना लंबे समय तक सफल हो सकेगी। इसी कारण प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता को योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
पशु सखी भूमिहीन महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का भी कार्य करेंगी। वे पंचायत की शामलात भूमि पट्टे पर उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में मार्गदर्शन देंगी, आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने में सहयोग करेंगी तथा बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से ऋण दिलाने में भी सहायता करेंगी। इसके साथ ही वे दुग्ध सहकारी समितियों और निजी डेयरी कंपनियों से संपर्क स्थापित कर महिलाओं को दूध की उचित कीमत दिलाने में भी मदद करेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो इससे गांवों में डेयरी गतिविधियों का विस्तार होगा और ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। डेयरी क्षेत्र में रोजगार बढ़ने से युवाओं और महिलाओं दोनों के लिए नए अवसर तैयार होंगे। साथ ही पशु आहार, परिवहन, दुग्ध संग्रहण, दुग्ध प्रसंस्करण और विपणन जैसे सहायक क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार पंचायत की कई शामलात भूमि वर्षों से अनुपयोगी पड़ी रहती है। इस योजना के माध्यम से ऐसी भूमि का उत्पादक उपयोग किया जाएगा। इससे एक ओर पंचायत की संपत्ति का बेहतर उपयोग होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि स्वयं सहायता समूह केवल बचत और छोटे ऋण तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें सफल ग्रामीण उद्यमों के रूप में विकसित किया जाए।
हरियाणा सरकार पहले से ही महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, ग्रामीण आजीविका बढ़ाने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। अब पंचायत की शामलात भूमि को डेयरी गतिविधियों से जोड़ने की इस नई पहल को उन प्रयासों का महत्वपूर्ण विस्तार माना जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मिशन के युवा पेशेवर राहुल मलिक, लेखाकार कमलेश, बीसीसी रीना, हेमलता तथा अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी महिलाओं को योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने प्रतिभागियों से कहा कि वे प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकों को अपने गांवों में अन्य महिलाओं तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ सकें।
सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी, स्वयं सहायता समूहों की आय में वृद्धि होगी, डेयरी क्षेत्र को नई गति मिलेगी और गांवों में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही पंचायत की निष्क्रिय भूमि का उपयोग उत्पादन और आय सृजन के लिए होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। यदि योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हुआ तो आने वाले वर्षों में हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता का नया मॉडल विकसित हो सकता है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूत आधार प्रदान करेगा।




