चंडीगढ़। हरियाणा में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अब पारंपरिक उपायों के साथ अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी है। राज्य सरकार वायु गुणवत्ता की निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए दुनिया में अपनाई जा रही आधुनिक प्रणालियों का अध्ययन कर उन्हें हरियाणा में लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में चीन में इस्तेमाल की जा रही तकनीकों का अध्ययन करने के बाद अब राज्य में AI आधारित एयर क्वालिटी डिसीजन सपोर्ट सिस्टम विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्व बैंक के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस दिशा में सहयोग मांगा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार का लक्ष्य केवल प्रदूषण के स्तर की निगरानी करना नहीं है, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों और आधुनिक तकनीक की मदद से पहले से अनुमान लगाकर प्रभावी कदम उठाने वाली व्यवस्था तैयार करना है। इसके लिए AI, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि वायु गुणवत्ता से जुड़े फैसले अधिक तेजी और सटीकता के साथ लिए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान बताया कि चीन के अध्ययन दौरे से लौटे हरियाणा के अधिकारियों ने वहां वायु प्रदूषण की निगरानी, नियंत्रण और प्रबंधन के लिए इस्तेमाल की जा रही आधुनिक व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी साझा की है। इन तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही बेहतर प्रणालियों का अध्ययन करके हरियाणा के क्लीन एयर प्रोग्राम को और प्रभावी बनाने की योजना है।
सरकार का मानना है कि वायु प्रदूषण अब केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य, जीवन की गुणवत्ता, अर्थव्यवस्था और शहरी व्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय और वास्तविक समय में उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। प्रस्तावित AI आधारित सिस्टम के जरिए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान, वायु गुणवत्ता के रुझानों का विश्लेषण और संभावित स्थिति का अनुमान लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा तकनीक के इस्तेमाल को केवल प्रयोग और नवाचार तक सीमित नहीं रखना चाहता। सरकार की प्राथमिकता यह है कि नई तकनीक का सीधा फायदा आम लोगों तक पहुंचे। डिजिटल व्यवस्था तभी उपयोगी मानी जाएगी जब इससे नागरिकों को सरकारी सेवाएं आसानी से मिलें, प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आए और सरकारी निर्णय लेने की गति बढ़े। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल प्रशासन को अधिक जवाबदेह, सरल और नागरिक केंद्रित बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
विश्व बैंक के साथ हुई बैठक में वायु गुणवत्ता के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस, डेटा प्रबंधन और युवाओं के कौशल विकास जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार का जोर ऐसे डिजिटल सिस्टम तैयार करने पर है, जिनके जरिए अलग-अलग विभागों के आंकड़ों को एक-दूसरे के साथ जोड़कर नीति निर्माण और प्रशासनिक फैसलों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
बैठक के दौरान विश्व बैंक के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि दक्षिण कोरिया में 19 से 22 अक्टूबर के बीच आयोजित होने वाले डिजिटल समिट में हरियाणा सरकार के सहयोग से विकसित AI सैंडबॉक्स को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस दौरान हरियाणा में AI आधारित डिजिटल समाधान के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। विश्व बैंक की ओर से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी इस डिजिटल समिट में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।
AI सैंडबॉक्स को हरियाणा में नई तकनीकों के परीक्षण और उनके व्यावहारिक इस्तेमाल के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके माध्यम से नए AI आधारित समाधानों को सरकारी व्यवस्था में लागू करने से पहले उनकी उपयोगिता और प्रभाव का आकलन किया जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि ऐसी तकनीकों को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न विभागों में इस्तेमाल किया जाए और सफल मॉडलों को बड़े स्तर पर लागू किया जाए।
मुख्यमंत्री ने राज्य की डिजिटल पहचान व्यवस्था परिवार पहचान पत्र यानी PPP को भी नई तकनीकी जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि परिवार पहचान पत्र हरियाणा की महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों में शामिल है और अब इसे अगले चरण में ले जाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से PPP 2.0 विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा, जिसमें इसे अधिक आधुनिक, सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने पर जोर रहेगा।
सरकार का उद्देश्य है कि परिवारों से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराया जा सके और पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं तथा सेवाओं का लाभ लेने में कम से कम परेशानी हो। इसके साथ ही डेटा की गुणवत्ता और उपयोगिता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि सरकारी योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिल सके।
मुख्यमंत्री ने हरियाणा के लिए व्यापक डेटा एक्सचेंज पॉलिसी और डेटा लेक विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा। इसके तहत विभिन्न सरकारी विभागों के बीच उपलब्ध सूचनाओं का बेहतर तरीके से आदान-प्रदान किया जा सकेगा। वर्तमान में अलग-अलग विभागों के पास मौजूद आंकड़ों को एकीकृत करने से प्रशासनिक फैसलों के लिए अधिक व्यापक जानकारी उपलब्ध होगी।
डेटा लेक और डेटा एक्सचेंज व्यवस्था के माध्यम से सरकार को विभिन्न योजनाओं के प्रभाव का आकलन करने, जरूरतमंद वर्गों की पहचान करने और भविष्य की नीतियों को वास्तविक आंकड़ों के आधार पर तैयार करने में सहायता मिल सकती है। इससे नीति निर्माण में अनुमान के बजाय डेटा-आधारित निर्णय लेने की व्यवस्था मजबूत होगी।
मुख्यमंत्री ने हरियाणा AI एंड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करने के लिए विश्व बैंक से सहयोग की अपील की। इस परियोजना के तहत AI के क्षेत्र में युवाओं को तैयार करने और राज्य में तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रस्तावित AI गुरुकुल के माध्यम से युवाओं को भविष्य में उभरने वाली तकनीकी जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण देने की योजना है।
सरकार की योजना केवल युवाओं को सामान्य तकनीकी प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं है। उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे, ताकि प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर अवसर मिल सकें। इसके लिए प्रत्येक जिले में कौशल केंद्र विकसित करने की दिशा में भी काम करने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले समय में प्रशासन और उद्योग दोनों के कामकाज को बड़े स्तर पर प्रभावित करने वाला है। ऐसे में हरियाणा को अभी से AI-आधारित कौशल और संस्थागत क्षमता विकसित करनी होगी। सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा केवल तकनीक के उपभोक्ता न बनें, बल्कि AI और डिजिटल क्षेत्र में नए समाधान विकसित करने में भी सक्षम हों।
बैठक में मुख्यमंत्री ने हरियाणा के लिए एक विशेष AI मॉडल विकसित करने का सुझाव भी दिया। उनका विचार है कि ऐसा AI मॉडल तैयार किया जाए जो राज्य के कानूनों, नियमों, सरकारी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को समझ सके। इस तरह का मॉडल सरकारी अधिकारियों को संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं के आधार पर त्वरित जानकारी उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।
प्रस्तावित विशेष AI मॉडल का इस्तेमाल सरकारी कामकाज में निर्णय प्रक्रिया को तेज करने के लिए किया जा सकता है। अधिकारियों को किसी नीति, नियम या प्रक्रिया से संबंधित जानकारी तुरंत उपलब्ध होने पर फाइलों के निपटारे और प्रशासनिक कार्यों में लगने वाला समय कम किया जा सकता है। हालांकि ऐसे मॉडल के इस्तेमाल में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और सटीकता जैसे पहलुओं को भी प्राथमिकता देनी होगी।
सरकार का व्यापक लक्ष्य हरियाणा में डेटा आधारित प्रशासन को मजबूत करना है। इसके तहत विभागीय आंकड़ों को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने, डिजिटल प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ने और AI आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है। इससे सरकारी योजनाओं की निगरानी, संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और नागरिक सेवाओं की डिलीवरी में सुधार की उम्मीद है।
वायु प्रदूषण के मोर्चे पर AI आधारित प्रणाली को इस पूरी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि एयर क्वालिटी डिसीजन सपोर्ट सिस्टम प्रभावी तरीके से विकसित होता है तो विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त वायु गुणवत्ता संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण करके प्रदूषण के बढ़ने की संभावित स्थिति का अनुमान लगाया जा सकेगा। इसके आधार पर संबंधित विभाग पहले से आवश्यक कदम उठा सकेंगे।
हरियाणा में प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों को लेकर लंबे समय से निगरानी और नियंत्रण की जरूरत महसूस की जाती रही है। औद्योगिक गतिविधियां, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्य, सड़क की धूल और अन्य स्रोत वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। ऐसे में केवल प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय आंकड़ों के आधार पर पहले से रणनीति तैयार करना अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
चीन के अध्ययन से मिली जानकारी और विश्व बैंक के तकनीकी सहयोग को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल तकनीकों का स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार इस्तेमाल करना चाहती है। इसके लिए विभिन्न देशों में अपनाई जा रही प्रणालियों का अध्ययन कर हरियाणा की जरूरत के मुताबिक मॉडल विकसित किया जाएगा।
इसी बीच राज्य में नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। हाल ही में आयोजित इनोवेशन चैलेंज में करीब 250 कंपनियों और स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों और नए उद्यमों की भागीदारी को सरकार हरियाणा में विकसित हो रहे तकनीकी और नवाचार माहौल के संकेत के रूप में देख रही है।
सरकार अब इन स्टार्टअप्स द्वारा विकसित किए गए समाधान केवल प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक सरकारी कामकाज में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। विभिन्न विभागों में उपयोगी तकनीकी समाधानों की पहचान कर उन्हें लागू किया जाएगा, जिससे नागरिकों को सीधे फायदा पहुंच सके। इससे स्थानीय स्टार्टअप्स को सरकारी क्षेत्र में अपने उत्पाद और तकनीक आजमाने का अवसर भी मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने में डिजिटल तकनीक, AI और कौशल विकास की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। सरकार का प्रयास है कि तकनीक का इस्तेमाल प्रशासनिक सुधार से लेकर पर्यावरण प्रबंधन और रोजगार सृजन तक विभिन्न क्षेत्रों में किया जाए।
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार की नई रणनीति में AI आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन, डिजिटल गवर्नेंस, PPP 2.0, डेटा एक्सचेंज पॉलिसी, डेटा लेक, AI गुरुकुल और विशेष राज्य आधारित AI मॉडल जैसे कई पहलू शामिल हैं। विश्व बैंक के सहयोग और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकों के अध्ययन के जरिए सरकार इन योजनाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। यदि प्रस्तावित परियोजनाएं निर्धारित रूप में लागू होती हैं तो आने वाले समय में हरियाणा के प्रशासनिक कामकाज, पर्यावरण निगरानी और नागरिक सेवाओं के क्षेत्र में तकनीक आधारित बदलाव देखने को मिल सकते हैं।




