हरियाणा के कपड़ा कारोबार को केंद्र का बड़ा सहारा, 183 यूनिट्स को मिला ₹54.81 करोड़ का आधुनिकीकरण पैकेज

हरियाणा के कपड़ा कारोबार को केंद्र का बड़ा सहारा, 183 यूनिट्स को मिला ₹54.81 करोड़ का आधुनिकीकरण पैकेज

चंडीगढ़। हरियाणा के टेक्सटाइल उद्योग को तकनीकी रूप से मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता दी गई है। राज्य की 183 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों को मशीनरी के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए कुल ₹54.81 करोड़ की कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी जारी की गई है। सरकार की इस सहायता का उद्देश्य कपड़ा उद्योग की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, पुरानी मशीनरी को आधुनिक तकनीक से बदलने और भारतीय टेक्सटाइल इकाइयों को घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने से जुड़ा है।

यह जानकारी संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में सामने आई। सोनीपत से कांग्रेस सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने केंद्र सरकार से हरियाणा के टेक्सटाइल उद्योगों को उपलब्ध कराई गई वित्तीय सहायता और तकनीकी उन्नयन से जुड़े मामलों को लेकर सवाल पूछा था। लिखित जवाब में केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने बताया कि राज्य की 183 टेक्सटाइल MSME इकाइयों को पिछले तीन वर्षों में कुल ₹54.81 करोड़ की कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी दी गई है।

केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, सोनीपत संसदीय क्षेत्र को भी इस योजना के तहत वित्तीय लाभ मिला है। क्षेत्र की 14 टेक्सटाइल इकाइयों को मशीनरी और तकनीकी आधुनिकीकरण के लिए कुल ₹3.79 करोड़ की सब्सिडी उपलब्ध कराई गई। इससे स्थानीय स्तर पर काम कर रही टेक्सटाइल इकाइयों को उत्पादन प्रक्रिया में सुधार, नई मशीनरी लगाने और तकनीकी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है।

यह आर्थिक सहायता संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना यानी Modified Technology Upgradation Fund Scheme के तहत उपलब्ध कराई गई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य टेक्सटाइल क्षेत्र की इकाइयों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना था। इसके तहत पात्र उद्योगों द्वारा मशीनरी के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन के लिए किए गए निवेश पर निर्धारित नियमों के अनुसार वित्तीय सहायता दी जाती थी।

टेक्सटाइल उद्योग में मशीनरी का आधुनिकीकरण उत्पादन लागत, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर सीधा असर डालता है। पुरानी तकनीक के कारण उत्पादन की गति कम होने के साथ-साथ ऊर्जा खपत और रखरखाव का खर्च भी बढ़ सकते हैं। आधुनिक मशीनरी अपनाने से उद्योगों को उत्पादन प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने, बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद तैयार करने और बाजार की बदलती मांग के अनुसार उत्पादन में बदलाव करने में मदद मिलती है।

हरियाणा में टेक्सटाइल क्षेत्र का औद्योगिक महत्व काफी बड़ा है। पानीपत, सोनीपत और राज्य के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में कपड़ा, होम फर्निशिंग, यार्न, प्रोसेसिंग और इससे जुड़े कारोबार बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में केंद्र की ओर से दी गई पूंजीगत सब्सिडी को राज्य के टेक्सटाइल उद्योगों के तकनीकी बदलाव के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना अब सक्रिय योजना के रूप में लागू नहीं है। यह योजना 31 मार्च 2022 तक प्रभावी रही थी। इसके बाद इसे बंद कर दिया गया, लेकिन योजना की अवधि के दौरान पंजीकृत और पात्र पाए गए मामलों से जुड़ी वित्तीय देनदारियों का भुगतान अभी भी किया जा रहा है।

इसका मतलब यह है कि वर्तमान में जारी की जा रही राशि नई योजनाओं के तहत नए आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, बल्कि पहले से स्वीकृत और पात्र मामलों की लंबित वित्तीय देनदारियों को पूरा करने से संबंधित है। हरियाणा के 183 मामलों में सहायता का निपटारा भी इसी प्रक्रिया के तहत किया गया है।

सरकार के इस स्पष्टीकरण से यह भी साफ होता है कि योजना बंद होने के बावजूद पात्र उद्योगों को उनके स्वीकृत लाभ से वंचित नहीं किया जा रहा है। जिन इकाइयों ने योजना की लागू अवधि के दौरान निर्धारित शर्तों के अनुसार निवेश किया और सहायता के लिए पात्रता हासिल की, उनके लंबित भुगतान को प्रक्रिया के अनुसार जारी रखा जा रहा है।

टेक्सटाइल उद्योगों के लिए यह सहायता ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेक्सटाइल कंपनियां उत्पादन की गुणवत्ता, लागत, तकनीक, पर्यावरणीय मानकों और तेजी से बदलती उपभोक्ता मांग के आधार पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। ऐसे में भारतीय उद्योगों के लिए आधुनिक मशीनरी और बेहतर तकनीकी क्षमता विकसित करना आवश्यक माना जा रहा है।

हरियाणा की टेक्सटाइल इकाइयों के लिए भी नई तकनीक अपनाने की जरूरत बढ़ रही है। उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण, ऊर्जा दक्षता, ऑटोमेशन और पर्यावरण मानकों को पूरा करना उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है। पूंजी निवेश पर मिलने वाली सहायता से MSME इकाइयों पर नई मशीनरी लगाने का शुरुआती वित्तीय बोझ कम किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने टेक्सटाइल क्षेत्र के भविष्य को लेकर बजट 2026-27 में भी एक नई दिशा निर्धारित की है। केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि बजट में घोषित Integrated Textile Programme के माध्यम से कपड़ा क्षेत्र के आधुनिकीकरण, रोजगार सृजन, कौशल विकास और निर्यात को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस प्रस्तावित कार्यक्रम का उद्देश्य टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाना है। इससे उद्योगों को अलग-अलग योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों के बीच बेहतर समन्वय उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी। सरकार का लक्ष्य टेक्सटाइल उद्योग की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना बताया जा रहा है, ताकि उत्पादन से लेकर बाजार और निर्यात तक भारतीय उद्योगों की क्षमता में सुधार हो।

Integrated Textile Programme के माध्यम से आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर भी जोर रहेगा। टेक्सटाइल उद्योग श्रम आधारित क्षेत्रों में शामिल है और इसमें बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने की क्षमता है। तकनीकी उन्नयन के साथ यदि उत्पादन और निर्यात बढ़ता है तो इससे रोजगार के अवसरों में भी विस्तार हो सकता है।

कौशल विकास को भी इस नई रणनीति का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। टेक्सटाइल उद्योग में आधुनिक मशीनों और स्वचालित उत्पादन प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत बढ़ रही है। इसलिए उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं और मौजूदा कर्मचारियों को नए कौशल से जोड़ना जरूरी होगा।

हरियाणा के लिए निर्यात बढ़ाना भी इस क्षेत्र के विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। राज्य की कई टेक्सटाइल इकाइयां घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए भी उत्पादन करती हैं। आधुनिक तकनीक से उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में सुधार होने पर इन कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सकती है।

सोनीपत क्षेत्र की 14 इकाइयों को मिली ₹3.79 करोड़ की सहायता भी स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सोनीपत और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयों की मौजूदगी के कारण टेक्सटाइल से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योग बड़ी संख्या में आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं। मशीनरी में निवेश बढ़ने से इन इकाइयों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि होने के साथ-साथ सहायक उद्योगों को भी लाभ मिल सकता है।

MSME इकाइयों के लिए पूंजीगत निवेश विशेष महत्व रखता है। बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी इकाइयों के पास आधुनिक मशीनरी और तकनीक में बड़े स्तर पर निवेश करने के लिए सीमित वित्तीय संसाधन होते हैं। ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी उनके लिए तकनीकी बदलाव की लागत को कम करने में सहायक हो सकती है।

टेक्सटाइल उद्योग में आधुनिकीकरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। आधुनिक मशीनरी के जरिए ऊर्जा की खपत कम करने, उत्पादन में होने वाली बर्बादी घटाने और गुणवत्ता में एकरूपता लाने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा डिजिटल तकनीक और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल से उद्योगों को उत्पादन प्रक्रिया की निगरानी और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलती है।

केंद्र की ओर से जारी आंकड़ों के बाद अब उद्योग जगत की नजर नई Integrated Textile Programme पर रहेगी। टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को उम्मीद होगी कि नई व्यवस्था के तहत आधुनिकीकरण के साथ पूंजी उपलब्धता, कौशल प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच और निर्यात से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

सरकार की रणनीति का एक अहम हिस्सा टेक्सटाइल सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है। भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति दिलाने के लिए उत्पादन लागत, गुणवत्ता और तकनीक के स्तर पर सुधार जरूरी है। इसी उद्देश्य से पुराने निवेश आधारित सहायता कार्यक्रमों के लंबित भुगतान पूरे करने के साथ-साथ नई एकीकृत योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।

हरियाणा में पिछले तीन वर्षों के दौरान 183 MSME इकाइयों को मिली ₹54.81 करोड़ की सहायता इस बात का संकेत है कि राज्य की टेक्सटाइल इकाइयों में तकनीकी उन्नयन के लिए निवेश किया गया है। हालांकि टेक्सटाइल क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए केवल सब्सिडी पर्याप्त नहीं होगी। उद्योगों को आधुनिक तकनीक, कुशल श्रम, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा, बेहतर लॉजिस्टिक्स, बाजार तक पहुंच और निर्यात सुविधाओं की भी आवश्यकता होगी।

केंद्र सरकार द्वारा 31 मार्च 2022 के बाद योजना बंद किए जाने के बावजूद पुराने पात्र मामलों की वित्तीय देनदारियां पूरी की जा रही हैं। इससे उन उद्योगों को राहत मिल रही है जिन्होंने योजना की अवधि के दौरान निर्धारित प्रक्रिया के तहत निवेश किया था। अब आगे की दिशा नए Integrated Textile Programme और अन्य नीतिगत पहलों से तय होगी।

कुल मिलाकर, हरियाणा का टेक्सटाइल उद्योग तकनीकी बदलाव और आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रहा है। केंद्र से मिली ₹54.81 करोड़ की कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी से 183 MSME इकाइयों को लाभ मिला है, जबकि सोनीपत क्षेत्र की 14 इकाइयों को ₹3.79 करोड़ की सहायता दी गई। आने वाले समय में सरकार की नई एकीकृत टेक्सटाइल नीति यदि आधुनिकीकरण, कौशल, रोजगार और निर्यात को एक साथ आगे बढ़ाती है तो हरियाणा के टेक्सटाइल उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।