चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने प्रदेश में खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या से निपटने और आम लोगों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में नई पहल शुरू की है। अब लोगों को खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता जांचने के लिए हर बार किसी सरकारी या निजी प्रयोगशाला तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिसके माध्यम से लोगों को मौके पर ही खाद्य पदार्थों की प्राथमिक जांच की सुविधा मिल सकेगी। खास बात यह है कि आम नागरिक महज 20 रुपये का शुल्क देकर इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य खाद्य पदार्थों में मिलावट पर प्रभावी तरीके से रोक लगाना और लोगों को मिलावटी, खराब या घटिया गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों से बचाना है। मोबाइल लैब के जरिए खाद्य पदार्थों की जांच को लोगों के अधिक करीब लाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि मिलावट की शिकायतों और संदिग्ध खाद्य सामग्री की जांच के लिए नागरिकों को प्रयोगशालाओं के चक्कर न काटने पड़ें।
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब अलग-अलग स्थानों पर जाकर खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच करेंगी। इन्हें बाजारों, स्कूलों, कॉलेजों, मेलों, सार्वजनिक आयोजनों और विशेष जांच अभियानों के दौरान तैनात किया जाएगा। इसके अलावा जरूरत के अनुसार आम लोग भी अपने आसपास उपलब्ध इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे खाद्य सुरक्षा से जुड़ी जांच व्यवस्था को अधिक तेज और सुलभ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार की इस योजना को खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जिन्हें बाजार से खरीदे गए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर संदेह रहता है। दूध, मिठाइयां, घी, तेल, मसाले, नमकीन, मिठाई और अन्य खाद्य वस्तुओं में मिलावट की आशंका होने पर लोग मोबाइल लैब के माध्यम से प्राथमिक स्तर पर जांच करा सकेंगे।
खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर त्योहारों के मौसम में विशेष चिंता रहती है। इस दौरान दूध से बने उत्पादों, मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों की मांग अचानक बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के साथ कई बार मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं और अधिक मुनाफा कमाने के लिए घटिया या नकली सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तीज और रक्षाबंधन के मद्देनजर विशेष अभियान भी शुरू किया है।
इन त्योहारों को देखते हुए विभाग की टीमों ने विशेष रूप से घेवर और फिरनी जैसे खाद्य पदार्थों पर निगरानी बढ़ाई है। 6 जुलाई से 2 अगस्त के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से कुल 122 खाद्य नमूने एकत्र किए गए हैं। विभाग की ओर से इन नमूनों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थ निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे उतर रहे हैं या नहीं।
अब तक जांचे गए 18 नमूनों में से 15 नमूने खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप पाए गए हैं, जबकि तीन नमूने जांच में असफल रहे हैं। बाकी नमूनों की जांच अभी जारी है। विभाग की ओर से कहा गया है कि जांच पूरी होने के बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मोबाइल लैब की सुविधा शुरू होने से खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। अभी तक किसी खाद्य पदार्थ की विस्तृत जांच के लिए नमूना लेकर उसे निर्धारित प्रयोगशाला में भेजना पड़ता था। इसमें समय लग सकता था। मोबाइल लैब की मदद से मौके पर प्राथमिक जांच होने से संदिग्ध खाद्य पदार्थों की पहचान जल्दी की जा सकेगी।
हालांकि मोबाइल लैब में होने वाली जांच और विस्तृत प्रयोगशाला जांच की भूमिका अलग-अलग हो सकती है। मौके पर की जाने वाली जांच से किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता या मिलावट को लेकर प्रारंभिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यदि किसी नमूने में गंभीर गड़बड़ी या मिलावट की आशंका सामने आती है तो विभाग नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए नमूना विस्तृत परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज सकता है।
सरकार का फोकस केवल बाजारों तक सीमित नहीं है। मोबाइल लैब को स्कूलों और कॉलेजों में भी ले जाने की योजना है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं के बीच खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी है। स्कूल-कॉलेजों में खाद्य पदार्थों की जांच के साथ विद्यार्थियों को यह समझाया जा सकता है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों की पहचान कैसे की जाए और सुरक्षित भोजन का चुनाव क्यों जरूरी है।
मेलों और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान भी मोबाइल लैब की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में अस्थायी खाद्य स्टॉल लगाए जाते हैं। इन स्थानों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी करना चुनौतीपूर्ण होता है। मोबाइल जांच सुविधा उपलब्ध होने से खाद्य सुरक्षा विभाग मौके पर ही कई प्रकार के नमूनों की प्राथमिक जांच कर सकता है।
सरकार के अनुसार इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य लोगों में यह भरोसा पैदा करना है कि खाद्य सुरक्षा जांच केवल सरकारी विभागों तक सीमित प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आम नागरिक भी इसमें भागीदार बन सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति को किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता को लेकर संदेह है तो वह उपलब्ध मोबाइल जांच सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है।
महज 20 रुपये का शुल्क रखे जाने से इस सेवा को आम लोगों के लिए किफायती बनाने का प्रयास किया गया है। इससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के लोग भी बिना अधिक खर्च किए खाद्य पदार्थों की प्राथमिक जांच करा सकेंगे। सरकार का मानना है कि सस्ती और आसानी से उपलब्ध जांच सुविधा लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ खाद्य कारोबारियों पर भी गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव बढ़ाएगी।
त्योहारों के मौसम में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई और तेज होने की संभावना है। तीज और रक्षाबंधन जैसे त्योहारों में घेवर, फिरनी और अन्य दूध आधारित खाद्य पदार्थों की बिक्री बढ़ जाती है। ऐसे में विभाग ने पहले से ही नमूने लेने और उनकी जांच करने का अभियान शुरू कर दिया है। 122 नमूनों का संग्रह इसी अभियान का हिस्सा है।
अब तक प्राप्त जांच परिणामों में तीन नमूनों का मानकों पर खरा न उतरना विभाग के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि केवल 18 नमूनों की जांच पूरी हुई है और बाकी नमूनों के परिणाम आना बाकी हैं। इसलिए अंतिम स्थिति पूरी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें बाजारों में दुकानों, मिठाई की दुकानों, डेयरी उत्पाद विक्रेताओं और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों से नमूने ले सकती हैं। यदि किसी नमूने में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित खाद्य कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य केवल नमूने लेना नहीं बल्कि मिलावट की समस्या पर प्रभावी रोक लगाना है।
मोबाइल लैब व्यवस्था से विभाग को भी अपने अभियानों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिल सकती है। किसी क्षेत्र में यदि खाद्य मिलावट की शिकायतें सामने आती हैं तो मोबाइल टीम को वहां भेजकर मौके पर संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच की जा सकती है। इससे विभाग को कार्रवाई के लिए शुरुआती जानकारी जल्दी मिल सकेगी।
इसके अलावा मोबाइल लैब का इस्तेमाल विशेष जांच अभियानों में भी किया जा सकेगा। त्योहारों, मेलों और बड़े आयोजनों से पहले विभाग संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जांच के लिए मोबाइल टीमों को तैनात कर सकता है। इससे मिलावटखोरी पर निगरानी बढ़ेगी और खाद्य कारोबारियों को भी निर्धारित मानकों का पालन करने का संदेश जाएगा।
सरकार की यह पहल खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक और मोबाइल सेवाओं के जरिए लोगों तक पहुंचाने की दिशा में कदम मानी जा रही है। प्रयोगशाला आधारित व्यवस्था के साथ-साथ मौके पर जांच की सुविधा होने से विभाग के पास खाद्य गुणवत्ता की निगरानी के लिए एक अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध होगा।
हालांकि इस योजना की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मोबाइल लैब प्रदेश के कितने क्षेत्रों में नियमित रूप से उपलब्ध होती हैं और आम लोगों को इनके बारे में कितनी जानकारी मिलती है। ग्रामीण और छोटे कस्बों में रहने वाले लोगों तक सुविधा पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि वहां लोगों के लिए बड़ी प्रयोगशालाओं तक पहुंचना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को भी सलाह दी जा सकती है कि वे संदिग्ध खाद्य पदार्थों की खरीदारी से बचें और किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर संबंधित विभाग को जानकारी दें। खास तौर पर त्योहारों के दौरान खुली मिठाइयों और लंबे समय तक बिना उचित तापमान नियंत्रण के रखे खाद्य पदार्थों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
सरकार का कहना है कि खाद्य सुरक्षा केवल विभागीय कार्रवाई का विषय नहीं है, बल्कि इसमें उपभोक्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यदि लोग मिलावट के प्रति जागरूक होंगे और संदिग्ध खाद्य पदार्थों की शिकायत करेंगे तो विभाग के लिए कार्रवाई करना आसान होगा।
कुल मिलाकर हरियाणा सरकार की मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब योजना से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच की सुविधा लोगों के घर-द्वार और बाजारों के करीब पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। 20 रुपये में प्राथमिक जांच की सुविधा मिलने से आम नागरिकों को सस्ती और सुलभ सेवा मिलने की उम्मीद है। वहीं, त्योहारों के दौरान घेवर और फिरनी समेत अन्य खाद्य पदार्थों की जांच के लिए चल रहा अभियान मिलावटखोरी पर निगरानी को और मजबूत करेगा। 6 जुलाई से 2 अगस्त के बीच लिए गए 122 नमूनों में से अभी 18 की जांच पूरी हुई है, जिनमें 15 मानकों के अनुरूप और तीन नमूने असफल पाए गए हैं। बाकी रिपोर्ट आने के बाद विभाग की आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।




