हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश के अधिकारों, प्राकृतिक संसाधनों और आर्थिक हितों से जुड़े लंबित मामलों को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा। इसके लिए वह हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के बाद दिल्ली जाएंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्र के साथ चर्चा की जाएगी और हिमाचल को उसके अधिकार दिलाने के लिए सरकार राजनीतिक, प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर अपनी पैरवी जारी रखेगी।
मुख्यमंत्री ने यह बात पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। इस दौरान उन्होंने हिमाचल के जल संसाधनों, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB), किशाऊ बांध, भर्ती प्रक्रिया, भ्रष्टाचार, जांच एजेंसियों और सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं सहित कई विषयों पर सरकार का पक्ष रखा।
हिमाचल की संपदा और संसाधनों पर प्रदेश के अधिकार की बात
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और इन संसाधनों पर प्रदेश को उसका उचित अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना था कि राज्य के संसाधनों का उपयोग दूसरे राज्यों और क्षेत्रों के विकास में हो रहा है, ऐसे में हिमाचल को भी उसका न्यायसंगत आर्थिक लाभ मिलना आवश्यक है।
उन्होंने भाजपा पर हिमाचल प्रदेश के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार प्रदेश के लोगों के अधिकारों से समझौता नहीं करेगी। सरकार का प्रयास है कि राज्य की संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में हिमाचल का पक्ष स्पष्ट और प्रभावी तरीके से रखा जाए।
सुक्खू के मुताबिक, सरकार केवल राजनीतिक स्तर पर इन मुद्दों को उठाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जहां आवश्यकता होगी वहां कानूनी प्रक्रिया का भी सहारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हितों से जुड़े मामलों को तथ्य और कानून के आधार पर आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।
BBMB और किशाऊ बांध से हिमाचल को आर्थिक लाभ की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) और किशाऊ बांध से संबंधित लंबित मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर हिमाचल प्रदेश लंबे समय से अपने अधिकार की मांग कर रहा है। यदि इन मामलों में निर्णय प्रदेश के पक्ष में आता है तो हिमाचल को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य को उसके हिस्से का अधिकार मिलने की स्थिति में लगभग 1,500 करोड़ रुपये सालाना की अतिरिक्त आय हो सकती है। पहाड़ी राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह राशि विकास योजनाओं और अन्य आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि सरकार इन मामलों की कानूनी पैरवी को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। इसके लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम तैयार की गई है, ताकि संबंधित मामलों में हिमाचल प्रदेश का पक्ष तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर मजबूती से रखा जा सके।
दूसरे राज्यों को पानी देने पर आपत्ति नहीं, हिमाचल को भी मिले अधिकार
जल संसाधनों से जुड़े मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश को इस बात से कोई आपत्ति नहीं है कि यहां उपलब्ध पानी का लाभ हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों को मिले। उनका कहना था कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग व्यापक जनहित में होना चाहिए, लेकिन जिस राज्य से ये संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं, उसके हितों और अधिकारों का ध्यान रखना भी जरूरी है।
सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के विकास में अपने प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान देता आया है। इसलिए प्रदेश को भी इन संसाधनों से मिलने वाले आर्थिक लाभ में उचित हिस्सा मिलना चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि मानसून सत्र के बाद प्रस्तावित दिल्ली दौरे में इस विषय को केंद्र सरकार के सामने प्रमुखता से रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य केंद्र के साथ संवाद के माध्यम से लंबित मामलों को आगे बढ़ाना और प्रदेश के लिए न्यायसंगत अधिकार सुनिश्चित करने का प्रयास करना है।
भाजपा के राजनीतिक बदले के आरोपों पर मुख्यमंत्री का जवाब
भाजपा नेताओं द्वारा प्रदेश सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने के लगाए जा रहे आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में शिकायत सामने आती है और किसी व्यक्ति को अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए बुलाया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को जांच प्रक्रिया में सहयोग करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायक डॉ. जनक राज का उल्लेख करते हुए आईजीएमसी से जुड़े एक मामले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनके कार्यकाल के दौरान एक पुरुष मरीज के नाम पर बच्चेदानी के ऑपरेशन से संबंधित बिल किस तरह तैयार हुआ। मुख्यमंत्री ने इस विषय को कथित अनियमितताओं की जांच से जोड़ते हुए कहा कि सरकार भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से ले रही है।
हालांकि, ऐसे आरोपों और मामलों में अंतिम तथ्य संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही निर्धारित होते हैं। मुख्यमंत्री का कहना था कि सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति को राजनीतिक आधार पर निशाना बनाना नहीं, बल्कि सामने आने वाली शिकायतों और अनियमितताओं पर कानून के अनुसार कार्रवाई करना है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। यदि किसी विभाग, संस्था या प्रक्रिया में अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा संबंध आम नागरिकों के विश्वास से है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकारी धन और संसाधनों के उपयोग में जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया में किसी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले तथ्यों की पड़ताल जरूरी है। सरकार अपने अधिकार क्षेत्र के मामलों में कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेगी।
भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर भाजपा पर निशाना
मुख्यमंत्री ने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और पेपर बेचने के मामलों को लेकर पूर्व भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आए ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
सुक्खू ने कहा कि कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद चयन बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया गया और भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ाई गई। उन्होंने दावा किया कि पेपर बेचने के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लंबे समय से प्रदेश में महत्वपूर्ण विषय रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार की कोशिश ऐसी व्यवस्था विकसित करने की है जिसमें योग्य अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिले और भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह के अनुचित हस्तक्षेप की संभावना कम हो।
मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी नियुक्तियों को राजनीतिक प्रभाव और सिफारिश से दूर रखते हुए मेरिट आधारित व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है। शिक्षकों, सहायक नर्सों और अन्य पदों पर होने वाली नियुक्तियों में योग्यता और निर्धारित चयन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि मौजूदा व्यवस्था में लिखित परीक्षा और व्यक्तिगत साक्षात्कार में प्राप्त अंकों को मिलाकर अंतिम मेरिट तैयार की जाती है। सरकार का मानना है कि स्पष्ट चयन मानदंड होने से उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं का भविष्य इससे जुड़ा होता है। चयन प्रक्रिया पर अभ्यर्थियों का विश्वास बना रहे, इसके लिए नियमों और योग्यता को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
आउटसोर्स और SMC व्यवस्था को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में काम
सुक्खू ने कहा कि सरकार आउटसोर्स व्यवस्था और एसएमसी के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार नियमित भर्ती प्रक्रिया के जरिए योग्य उम्मीदवारों को अवसर देने पर जोर दे रही है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, नई नियुक्तियों में मेरिट को प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में सिफारिश, भाई-भतीजावाद और पक्षपात की आशंकाओं को कम करना है।
उन्होंने डॉक्टरों सहित विभिन्न विभागों में होने वाली नियुक्तियों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसी चयन व्यवस्था विकसित करने का प्रयास कर रही है जिसमें उम्मीदवारों की योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर निर्णय हो।
नियमित भर्ती प्रक्रिया को मजबूत करने से सरकारी विभागों में रिक्त पदों को व्यवस्थित तरीके से भरने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही उम्मीदवारों को भी चयन के लिए स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध हो सकती है।
CBI और ED की कार्रवाई पर क्या बोले मुख्यमंत्री
सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों केंद्रीय जांच एजेंसियां अपने स्तर पर और अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार कार्रवाई करती हैं।
उन्होंने उन दावों को भ्रामक बताया जिनमें कहा जा रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां प्रदेश सरकार को किसी मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दे रही हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों में संबंधित कानून और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर निर्णय लेती है।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र और जिम्मेदारियां निर्धारित हैं। राज्य सरकार अपने स्तर पर सामने आने वाली शिकायतों या मामलों में कानून के अनुरूप कार्रवाई करती है।
सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों को लेकर सरकार की चिंता
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली फर्जी और भ्रामक खबरों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म सूचना के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं, लेकिन इनका गलत इस्तेमाल गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
सुक्खू के अनुसार, सोशल मीडिया पर गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने से संबंधित मामलों में शिकायत मिलने पर कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वही कानूनी व्यवस्था लागू है जो पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान अस्तित्व में थी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली कुछ सामग्री को लेकर आम नागरिकों की ओर से भी शिकायतें प्राप्त होती हैं। ऐसी शिकायतों की प्रकृति और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर संबंधित एजेंसियां आगे की प्रक्रिया अपनाती हैं।
सोशल मीडिया पर किसी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से सार्वजनिक व्यक्तियों, सरकारी संस्थाओं और संवेदनशील मामलों से जुड़ी अपुष्ट जानकारी तेजी से फैलने पर भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ब्लैकमेलिंग पर कार्रवाई की बात
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कथित ब्लैकमेलिंग की बढ़ती प्रवृत्ति को भी गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि किसी डिजिटल माध्यम का उपयोग किसी व्यक्ति को डराने, बदनाम करने या उस पर अनुचित दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ कानून का पालन और जिम्मेदारी भी जरूरी है। किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ आरोप लगाए जाने की स्थिति में तथ्यों और प्रमाणों का महत्व होता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सोशल मीडिया का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किए जाने की शिकायत सामने आती है तो सरकार कानून के दायरे में कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सामान्य आलोचना और कानून का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों के बीच अंतर को ध्यान में रखते हुए मामलों को देखा जाना चाहिए।
मानसून सत्र के बाद केंद्र के सामने रखे जाएंगे लंबित मुद्दे
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोहराया कि हिमाचल प्रदेश के आर्थिक हितों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों पर राज्य सरकार अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। विधानसभा के मानसून सत्र के बाद उनके प्रस्तावित दिल्ली दौरे को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस दौरान BBMB, किशाऊ बांध और हिमाचल के जल संसाधनों से जुड़े विषय केंद्र सरकार के सामने उठाए जाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन मामलों में प्रदेश को उसका उचित हिस्सा मिलने से राज्य की आय बढ़ सकती है और उस धन का उपयोग विकास से जुड़ी आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि हिमाचल दूसरे राज्यों को अपने प्राकृतिक संसाधनों का लाभ मिलने के खिलाफ नहीं है, लेकिन प्रदेश के आर्थिक हितों की अनदेखी भी नहीं होनी चाहिए। इसी आधार पर राज्य अपने अधिकार से जुड़े मामलों की राजनीतिक और कानूनी पैरवी जारी रखेगा।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों पर कार्रवाई और सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल को भी सरकार के प्रमुख विषयों के रूप में सामने रखा। आने वाले समय में केंद्र के साथ होने वाली बातचीत और लंबित कानूनी मामलों में होने वाली प्रगति से यह स्पष्ट होगा कि हिमाचल प्रदेश के इन दावों और मांगों पर आगे क्या निर्णय लिए जाते हैं।




