हिमाचल मानसून सत्र से पहले शिक्षा विभाग में अलर्ट, 20 अगस्त से छुट्टियों पर ब्रेक; अधिकारियों को 12 घंटे ड्यूटी के निर्देश

हिमाचल मानसून सत्र से पहले शिक्षा विभाग में अलर्ट, 20 अगस्त से छुट्टियों पर ब्रेक; अधिकारियों को 12 घंटे ड्यूटी के निर्देश

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर शिक्षा विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों की ओर से पूछे जाने वाले सवालों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों और विभिन्न विभागीय मुद्दों पर मांगी जाने वाली जानकारी को समय पर उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों तथा सरकारी दौरों पर रोक लगा दी है। विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार 20 अगस्त से लेकर विधानसभा सत्र की समाप्ति तक अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष सतर्कता के साथ काम करना होगा।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त से 3 सितंबर तक आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। सत्र के दौरान शिक्षा विभाग से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेशभर के अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि विधानसभा से जुड़े किसी भी प्रश्न या जानकारी की मांग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और संबंधित रिकॉर्ड बिना देरी के उपलब्ध कराया जाए।

निदेशक उच्च शिक्षा सुनीता सिंह की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि 20 अगस्त के बाद स्वीकृत की गई किसी भी प्रकार की छुट्टी या सरकारी दौरे को स्वत: निरस्त माना जाएगा। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को इस अवधि में बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, किसी कर्मचारी या अधिकारी के सामने वास्तविक और अत्यंत गंभीर आपात स्थिति आती है तो सक्षम स्तर से अनुमति लेकर अवकाश दिया जा सकता है।

विभाग ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि विधानसभा सत्र के दौरान सरकार से जुड़े विभिन्न विभागों से अचानक जानकारी मांगी जा सकती है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को विधानसभा प्रश्नों के उत्तर तैयार करने के साथ-साथ ध्यानाकर्षण प्रस्तावों, अल्पकालिक प्रश्नों, विभिन्न चर्चाओं और अन्य संसदीय कार्यों से जुड़ी सूचनाएं भी तत्काल उपलब्ध करानी होंगी। इसके लिए रिकॉर्ड और आंकड़ों का अद्यतन रहना जरूरी है।

उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी शाखा अधिकारियों, अधीक्षकों, उपनिदेशकों और क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि विधानसभा सत्र के दौरान उनकी उपस्थिति सुनिश्चित रहे। किसी भी अधिकारी को बिना अनुमति मुख्यालय से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। विभाग ने साफ किया है कि सत्र के दौरान किसी भी समय महत्वपूर्ण सूचना या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, इसलिए अधिकारियों को हर समय संपर्क में रहना होगा।

शिक्षा विभाग ने विधानसभा की कार्यवाही से जुड़े काम को सामान्य कार्यालयीन कार्य से अलग प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत विभाग की प्रत्येक शाखा में अधीक्षक तथा वरिष्ठतम लिपिक या संबंधित डीलिंग असिस्टेंट की ड्यूटी तय की जाएगी। इन कर्मचारियों को नियमित कार्यालय समय के अलावा भी उपलब्ध रहना होगा, ताकि विधानसभा से संबंधित फाइलों, प्रश्नों और सूचनाओं का तत्काल निपटारा किया जा सके।

निर्देशों के अनुसार संबंधित अधिकारी और कर्मचारी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक विधानसभा से जुड़े काम के लिए उपलब्ध रहेंगे। आवश्यकता पड़ने पर रविवार और अन्य सरकारी अवकाश के दिनों में भी कार्यालय बुलाया जा सकता है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विधानसभा में शिक्षा विभाग से संबंधित किसी भी सवाल का जवाब तैयार करने में अनावश्यक देरी न हो।

उपनिदेशक कार्यालयों, उच्च शिक्षा निदेशालय और संबंधित संस्थानों में भी पर्याप्त संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेशों के अनुसार कम से कम दो वरिष्ठ अधिकारी हर समय उपलब्ध रहने चाहिए, ताकि किसी भी समय मांगी जाने वाली जानकारी को तुरंत जुटाया और संबंधित स्तर तक पहुंचाया जा सके।

इसके साथ ही विभाग ने संचार व्यवस्था को लेकर भी विशेष निर्देश जारी किए हैं। कार्यालयों के लैंडलाइन फोन और संबंधित अधिकारियों के मोबाइल फोन कार्य दिवसों के अलावा छुट्टियों के दौरान भी चालू रहने चाहिए। अधिकारियों को फोन कॉल और संदेशों का समय पर जवाब देने तथा विधानसभा से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

शिक्षा विभाग ने विधानसभा में पेश की जाने वाली जानकारी की गुणवत्ता को लेकर भी अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि सदन के लिए तैयार किए जाने वाले आंकड़े और जवाब पूरी तरह तथ्यात्मक, प्रमाणित और रिकॉर्ड पर आधारित होने चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की ओर से अधूरी, गलत या भ्रामक जानकारी उपलब्ध कराई जाती है तो उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

विभाग ने विधानसभा सत्र में संभावित सवालों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में प्रदेश के सभी सरकारी महाविद्यालयों के प्राचार्यों और जिला उपनिदेशकों को 16 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यह जानकारी 7 अगस्त तक हर हाल में उच्च शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करवानी होगी।

इन रिपोर्टों के आधार पर विभाग विधानसभा में पूछे जा सकने वाले संभावित सवालों के जवाब तैयार करेगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जानकारी तैयार करते समय आंकड़ों की दोबारा जांच की जाए और किसी भी तरह की विसंगति न रहे। विशेष रूप से ऐसे मामलों में सावधानी बरतने को कहा गया है, जिनसे सीधे तौर पर विभाग की नीतियों, भर्ती प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन या सरकारी संस्थानों की स्थिति जुड़ी हुई है।

रिपोर्ट में शिक्षा विभाग के विभिन्न संस्थानों और कार्यालयों में खाली पड़े पदों का पूरा विवरण शामिल किया जाना है। इसमें स्वीकृत पदों की संख्या, वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति और रिक्त पदों की जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा वर्षवार नियुक्तियों का रिकॉर्ड भी तैयार करने को कहा गया है, ताकि विधानसभा में यदि भर्ती से संबंधित सवाल उठता है तो विभाग के पास सटीक आंकड़े उपलब्ध हों।

तबादलों, पदोन्नतियों और कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। विभाग को वर्षवार और श्रेणीवार रिकॉर्ड तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। इससे विधानसभा में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, लंबित मामलों और सरकार की ओर से किए गए प्रशासनिक फैसलों से जुड़े प्रश्नों का जवाब देने में आसानी होगी।

शिक्षा संस्थानों में चल रहे निर्माण कार्यों और उन पर खर्च किए जा रहे बजट का विवरण भी रिपोर्ट का हिस्सा होगा। अधिकारियों को निर्माणाधीन परियोजनाओं की स्थिति, स्वीकृत राशि, खर्च की गई राशि और शेष कार्यों से संबंधित जानकारी तैयार रखने को कहा गया है। विधानसभा में यदि किसी कॉलेज या अन्य उच्च शिक्षण संस्थान में भवन निर्माण अथवा आधारभूत सुविधाओं को लेकर सवाल उठता है तो विभाग तुरंत संबंधित आंकड़े उपलब्ध करा सकेगा।

इसके अलावा छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी भी तैयार रखने को कहा गया है। विभाग को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत लाभ लेने वाले विद्यार्थियों, वितरित राशि और संबंधित प्रक्रियाओं का रिकॉर्ड अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकार की ओर से विद्यार्थियों को दी जा रही आर्थिक सहायता से जुड़े संभावित सवालों का जवाब तैयार किया जा सकेगा।

विधानसभा सत्र के दौरान शिक्षा विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग स्तर से आने वाली सूचनाओं को समय पर एकत्र कर उनका सत्यापन करना होगा। प्रदेश के दूरदराज के कॉलेजों और जिला स्तर के कार्यालयों से जानकारी निदेशालय तक पहुंचने में समय लग सकता है। इसलिए अधिकारियों को पहले से रिकॉर्ड व्यवस्थित करने और निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग की ओर से जारी सख्त आदेशों से साफ है कि मानसून सत्र के दौरान शिक्षा विभाग विधानसभा से संबंधित कामकाज को लेकर किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रोकने के साथ-साथ अतिरिक्त समय तक ड्यूटी लगाने और अवकाश के दिनों में भी जरूरत पड़ने पर कार्यालय खोलने के निर्देश दिए गए हैं।

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, विधानसभा लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण मंच है और वहां पूछे जाने वाले सवालों का सही जवाब उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। इसी कारण आंकड़ों और रिकॉर्ड को लेकर किसी भी तरह की गलती से बचने के लिए पहले से तैयारियां की जा रही हैं।

अब 7 अगस्त की समयसीमा विभाग के लिए अहम होगी। इस तारीख तक प्रदेश के सभी सरकारी महाविद्यालयों और जिला स्तर के कार्यालयों से मांगी गई 16 बिंदुओं वाली जानकारी उच्च शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करानी होगी। इसके बाद निदेशालय प्राप्त रिकॉर्ड की समीक्षा कर विधानसभा सत्र के लिए जवाब तैयार करेगा।

21 अगस्त से शुरू होने वाले मानसून सत्र के दौरान शिक्षा विभाग से जुड़े कई मुद्दे सदन में उठने की संभावना है। ऐसे में विभाग ने पहले ही अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को हाई अलर्ट पर रखने की तैयारी कर ली है। 20 अगस्त से सत्र समाप्त होने तक छुट्टियों और दौरों पर रोक, सुबह से रात तक ड्यूटी, वरिष्ठ अधिकारियों की अनिवार्य उपलब्धता और चौबीसों घंटे संचार व्यवस्था के निर्देश इस बात के संकेत हैं कि विभाग विधानसभा सत्र के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है।