हिमाचल में कर्ज और गारंटियों पर BJP का सरकार पर हमला, जयराम बोले- आर्थिक बोझ बढ़ा, बिंदल ने मांगा वादों का हिसाब

हिमाचल में कर्ज और गारंटियों पर BJP का सरकार पर हमला, जयराम बोले- आर्थिक बोझ बढ़ा, बिंदल ने मांगा वादों का हिसाब

शिमला। हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। विपक्षी भाजपा ने सुक्खू सरकार पर वित्तीय प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और चुनावी वादों को लेकर तीखा हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने राज्य पर कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ाया है और पिछली सरकारों की तुलना में बेहद कम समय में बड़ी मात्रा में ऋण लिया गया है। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार को उसकी चुनावी गारंटियों की याद दिलाते हुए कहा कि अब प्रदेश की जनता हर वादे का हिसाब मांग रही है।

शिमला में एक कार्यक्रम के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक तस्वीर कुछ और ही है। उनके मुताबिक आजादी के बाद से वर्ष 2022 तक प्रदेश की अलग-अलग सरकारों ने मिलकर करीब 69,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इसके विपरीत मौजूदा सरकार ने अपने लगभग चार साल के कार्यकाल में ही करीब 45,000 करोड़ रुपये का ऋण ले लिया है।

जयराम ठाकुर ने दावा किया कि यदि कांग्रेस सरकार एक और वर्ष सत्ता में रहती है तो उसके कार्यकाल में लिया गया कर्ज 60,000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकता है। उन्होंने इसे प्रदेश के वित्तीय इतिहास में गंभीर स्थिति बताते हुए सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि कांग्रेस सत्ता में आने से पहले व्यवस्था परिवर्तन और आर्थिक सुधार की बात करती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद राज्य के ऊपर वित्तीय बोझ लगातार बढ़ता चला गया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ता कर्ज चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि लगातार लिए जा रहे ऋण का इस्तेमाल किन योजनाओं और परियोजनाओं में किया जा रहा है तथा इसका दीर्घकालिक प्रभाव राज्य की वित्तीय स्थिति पर क्या पड़ेगा।

जयराम ठाकुर ने मौजूदा सरकार पर भाजपा शासन के दौरान शुरू किए गए संस्थानों को बंद करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने लोगों को उनके घर के नजदीक सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 2,000 संस्थान खोले थे, लेकिन कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद इनमें से बड़ी संख्या में संस्थानों को बंद कर दिया।

उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े केंद्र शामिल थे। उनके मुताबिक ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लोगों को इन संस्थानों से स्थानीय स्तर पर सुविधाएं मिल रही थीं। उन्हें बंद किए जाने से आम लोगों को दोबारा लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

जयराम ठाकुर ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार आधुनिक और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती रही है, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। उनका आरोप था कि मरीजों को इलाज के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है और कई मामलों में जांच करवाने के लिए भी काफी समय लग रहा है।

उन्होंने दावा किया कि जहां गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को समय पर इलाज मिलना चाहिए, वहीं कई लोगों को उपचार के लिए लगभग एक वर्ष तक इंतजार करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह जांच के लिए भी करीब एक महीने तक की प्रतीक्षा का आरोप उन्होंने लगाया। जयराम ने कहा कि यदि स्वास्थ्य व्यवस्था वास्तव में मजबूत है तो मरीजों को इतनी लंबी प्रतीक्षा क्यों करनी पड़ रही है, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने इस दौरान भाजपा में गुटबाजी के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरी तरह एकजुट है और पार्टी में संगठन ही अलग-अलग नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की भूमिका तय करता है। उनके अनुसार भाजपा में फैसले संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभा रहा है।

उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा में गुटबाजी की चर्चा करने से पहले कांग्रेस को अपने भीतर झांकना चाहिए। उनका दावा था कि कांग्रेस के अंदर कई गुट सक्रिय हैं और इसका प्रभाव चुनावी राजनीति में भी दिखाई देता है। जयराम ठाकुर ने हाल में हुए निकाय और पंचायती राज चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन चुनावों में भाजपा के 70 प्रतिशत से अधिक जनप्रतिनिधियों ने जीत दर्ज की है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों ने यह संकेत दिया है कि प्रदेश में भाजपा का संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत है। उनका दावा था कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पार्टी को लोगों का समर्थन मिला है। उन्होंने कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता में बढ़ती नाराजगी का भी दावा किया और कहा कि आने वाले समय में यह असंतोष और स्पष्ट रूप से सामने आएगा।

जयराम ठाकुर ने हिमाचल को लेकर भाजपा की भूमिका पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। हिमाचल प्रदेश हर हिमाचली का है और राज्य के हितों को लेकर भाजपा भी उतनी ही चिंतित है। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक लाभ के लिए प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

इसी कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भी कांग्रेस सरकार पर चुनावी वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश की जनता के सामने 10 गारंटियां रखी थीं और इन्हीं वादों के आधार पर लोगों से समर्थन मांगा था। अब सरकार अपने कार्यकाल के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन जनता उन गारंटियों के क्रियान्वयन का जवाब चाहती है।

बिंदल ने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने का वादा किया था। इसके अलावा 300 यूनिट मुफ्त बिजली और हर साल एक लाख पक्की सरकारी नौकरियां देने की बात भी कही गई थी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि इन वादों को पूरा करने में कांग्रेस सरकार विफल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले किए गए बड़े-बड़े वादों के कारण प्रदेश की जनता ने कांग्रेस पर भरोसा किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार अपने ही वादों को पूरा करने में पीछे हट गई। बिंदल ने इसे जनता के साथ विश्वासघात बताते हुए कहा कि अब कांग्रेस को हर चुनावी वादे का जवाब देना पड़ेगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कर्मचारियों और पेंशनरों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले कर्मचारियों और पेंशनरों को लेकर कई आश्वासन दिए थे। किसानों और बागवानों के हितों को लेकर भी बड़े दावे किए गए थे। महंगाई पर नियंत्रण, आर्थिक राहत और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की बात कही गई थी, लेकिन भाजपा के अनुसार जमीनी स्तर पर इन दावों का असर दिखाई नहीं दे रहा।

बिंदल ने कहा कि हिमाचल की अर्थव्यवस्था में कर्मचारी, पेंशनर, किसान और बागवान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इन वर्गों की समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक संकट का हवाला देकर कई मांगों को टाल रही है, जबकि दूसरी तरफ प्रदेश पर लगातार कर्ज बढ़ रहा है।

भाजपा नेताओं ने सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि राज्य के सीमित संसाधनों के बीच लगातार बढ़ता ऋण आने वाले समय में वित्तीय दबाव को और बढ़ा सकता है। विपक्ष ने सरकार से मांग की कि वह सार्वजनिक रूप से यह बताए कि अब तक लिए गए ऋण का कितना हिस्सा किस क्षेत्र में खर्च किया गया और राज्य की आय बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार एक ओर आर्थिक स्थिति कमजोर होने की बात करती है और दूसरी ओर चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं करा पा रही है। भाजपा का कहना है कि जनता के सामने अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि वास्तविक उपलब्धियों का पूरा हिसाब रखा जाना चाहिए।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो भाजपा का यह हमला ऐसे समय में आया है जब हिमाचल में कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल के अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है और विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति तेज कर दी है। कर्ज, रोजगार, स्वास्थ्य, संस्थानों को बंद करने और चुनावी गारंटियों का मुद्दा आने वाले समय में भाजपा के राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बन सकता है।

जयराम ठाकुर और राजीव बिंदल के बयानों से स्पष्ट है कि भाजपा अब सरकार की आर्थिक नीतियों और अधूरे चुनावी वादों को जनता के बीच प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है। विपक्ष का प्रयास है कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ वित्तीय कुप्रबंधन और वादाखिलाफी की धारणा को मजबूत किया जाए।

दूसरी तरफ, सरकार की ओर से इन आरोपों पर क्या जवाब दिया जाता है, यह भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा। कर्ज को लेकर सरकार लगातार अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं और विकास कार्यों का हवाला देती रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

फिलहाल भाजपा ने जिस तरह कर्ज और 10 गारंटियों को एक साथ राजनीतिक मुद्दा बनाया है, उससे साफ है कि आने वाले समय में हिमाचल की राजनीति में आर्थिक प्रबंधन सबसे बड़े चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकता है। एक तरफ जयराम ठाकुर सरकार पर ऋण लेने के रिकॉर्ड तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं राजीव बिंदल जनता से कांग्रेस की गारंटियों का हिसाब मांग रहे हैं। भाजपा का कहना है कि अब प्रदेश की जनता केवल आश्वासनों पर भरोसा करने के बजाय सरकार के कामकाज और वादों के वास्तविक परिणामों का मूल्यांकन करेगी।