मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक समुद्री व्यापार के दो अहम मार्ग – होर्मुज और सिंगापुर जलडमरूमध्य एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। इस बीच सिंगापुर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर ईरान से किसी तरह की बातचीत नहीं करेगा, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून कमजोर पड़ सकते हैं।
सिंगापुर का सख्त संदेश: “समुद्री मार्ग अधिकार हैं, सौदेबाजी नहीं”
सिंगापुर के विदेश मंत्री Vivian Balakrishnan ने संसद में दो टूक कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरना किसी देश की कृपा नहीं बल्कि सभी का अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहाजों की आवाजाही के लिए किसी प्रकार का शुल्क या अनुमति मांगना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। उन्होंने यह रुख उस सवाल के जवाब में रखा जिसमें सांसदों ने होर्मुज जलडमरूमध्य की मौजूदा स्थिति पर सरकार का दृष्टिकोण जानना चाहा था।
क्यों अहम है सिंगापुर और मलक्का स्ट्रेट
विशेषज्ञों के अनुसार, सिंगापुर और मलक्का जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दुनिया के करीब 40% समुद्री व्यापार का संचालन इन्हीं रास्तों से होता है। दिलचस्प बात यह है कि जहां होर्मुज स्ट्रेट मुख्य रूप से तेल और गैस के लिए जाना जाता है, वहीं सिंगापुर स्ट्रेट हर तरह के व्यापारिक जहाजों के लिए प्रमुख मार्ग है।
- सिंगापुर स्ट्रेट से रोजाना लगभग 23 मिलियन बैरल तेल गुजरता है
- होर्मुज स्ट्रेट से यह आंकड़ा करीब 21 मिलियन बैरल है
- सिंगापुर का बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त कंटेनर पोर्ट्स में शामिल है
ईरान की रणनीति और बढ़ता खतरा
हाल के घटनाक्रम में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश की है। उसने वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए और टोल वसूली की बात कही, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है। इसके अलावा समुद्र में माइंस बिछाने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
सिंगापुर ने खींची ‘लक्ष्मण रेखा’
विदेश मंत्री बालाकृष्णन ने साफ कहा कि यह केवल कानूनी मुद्दा नहीं बल्कि सिद्धांत का सवाल है। उन्होंने बताया कि उन्होंने ईरानी समकक्ष से बातचीत जरूर की, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कोई चर्चा नहीं की। उनका कहना था कि यदि सिंगापुर इस विषय पर बातचीत करता है या टोल जैसे मुद्दों को स्वीकार करता है, तो यह वैश्विक समुद्री कानून को कमजोर करने जैसा होगा।
अगर सिंगापुर भी सख्ती दिखाए तो क्या होगा?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि सिंगापुर भी अपने जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने लगे या प्रतिबंध लगाए, तो एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जैसे चीन, जापान और दक्षिण कोरिया पर गंभीर असर पड़ेगा। क्योंकि इन देशों की 80% से अधिक ऊर्जा जरूरतें इसी मार्ग से पूरी होती हैं।
ईरान के लिए भी अहम है सिंगापुर रूट
यह दिलचस्प है कि जिस तरह ईरान होर्मुज को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, उसी तरह सिंगापुर स्ट्रेट भी उसके लिए जीवनरेखा है। ईरान का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात चीन को जाता है, जो सिंगापुर मार्ग से होकर गुजरता है। इसके अलावा अन्य एशियाई देशों के साथ व्यापार भी इसी रास्ते पर निर्भर है।
भारतीय मूल से जुड़ा सिंगापुर का नेतृत्व
सिंगापुर के विदेश मंत्री Vivian Balakrishnan का भारत से भी गहरा संबंध है। उनके पिता तमिलनाडु से थे, जबकि उनकी मां चीनी मूल की हैं। यही वजह है कि उन्हें अक्सर भारतीय-सिंगापुरी पहचान के साथ देखा जाता है।
निष्कर्ष
होर्मुज और सिंगापुर जलडमरूमध्य सिर्फ समुद्री रास्ते नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन हैं। जहां ईरान होर्मुज के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं सिंगापुर का सख्त रुख यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री स्वतंत्रता को लेकर समझौता नहीं किया जाएगा।




