आज 3 अक्टूबर 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। आज एक साथ कई महत्वपूर्ण व्रत और धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के साथ दिन की शुरुआत होगी और सुबह 07:59 बजे के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। आज जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत भी रखा जा रहा है। संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से माताएं इस दिन निर्जला उपवास करती हैं। इसके अलावा आज मासिक कालाष्टमी, अष्टमी श्राद्ध और शनिवार व्रत भी हैं। कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा की जाती है, जबकि शनिवार को शनिदेव की आराधना और दान का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार आज आर्द्रा नक्षत्र, वरीयान् योग, बव करण और मिथुन राशि में चंद्रमा रहेगा। आज पूर्व दिशा का दिशाशूल भी है। ऐसे में किसी भी शुभ कार्य या धार्मिक अनुष्ठान से पहले दिन के शुभ और अशुभ समय की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।
आज जितिया व्रत रखने वाली महिलाएं शाम के समय पूजा-अर्चना कर सकती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत में गंधर्व राजा जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। इस व्रत की कथा उनके त्याग, दया और नाग वंश की रक्षा से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि जितिया व्रत को संतान की सुरक्षा और दीर्घायु से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। आज जितिया पूजा के लिए प्रदोष काल का समय शुभ बताया गया है। सूर्यास्त के बाद शाम 06:04 बजे से रात 08:31 बजे के बीच पूजा की जा सकती है। पूजा के दौरान जितिया व्रत की कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है। इसके साथ ही अभिमन्यु के पुत्र की ब्रह्मास्त्र से रक्षा से जुड़ी कथा का भी धार्मिक महत्व बताया जाता है।
आज अष्टमी का श्राद्ध भी किया जाएगा। पितृ पक्ष में अलग-अलग तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध करने की परंपरा है। आज उन लोगों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाएगा, जिनका निधन किसी भी महीने की अष्टमी तिथि को हुआ था। इस दिन पितरों को याद करके तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। पंचांग के अनुसार आज श्राद्ध और तर्पण के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा। इसके बाद रोहिणी मुहूर्त दोपहर 12:34 बजे से 01:21 बजे तक रहेगा। इन मुहूर्तों में पितरों के निमित्त धार्मिक कर्म किए जा सकते हैं।
आज मासिक कालाष्टमी का व्रत भी है। कालाष्टमी भगवान काल भैरव को समर्पित मानी जाती है। इस अवसर पर भक्त भगवान काल भैरव की पूजा करके भय, संकट और नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में काल भैरव की उपासना को अकाल मृत्यु के भय, रोग, दोष और विभिन्न बाधाओं से राहत की कामना से जोड़ा जाता है। कालाष्टमी के दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं और उनसे जीवन में सुरक्षा एवं शांति की प्रार्थना करते हैं।
शनिवार होने के कारण आज शनिदेव की पूजा का भी विशेष अवसर है। शनिदेव की आराधना के दौरान काले तिल, सरसों का तेल, नीले फूल और शमी के पत्ते अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार शनिवार के दिन जरूरतमंद व्यक्ति को दान करना भी शुभ माना जाता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार काले वस्त्र, काली उड़द, कंबल, लोहे की वस्तु या अन्य उपयोगी सामग्री का दान किया जा सकता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक शनिदेव की पूजा और दान करने से व्यक्ति को परेशानियों से राहत की कामना का फल मिलता है।
अब जान लेते हैं आज के पंचांग की पूरी जानकारी। आज आश्विन कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 07:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी, जो 4 अक्टूबर की सुबह 05:51 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। आज आर्द्रा नक्षत्र है, जो 4 अक्टूबर की रात 01:29 बजे तक रहेगा। इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा।
करण की बात करें तो सुबह 07:59 बजे तक बव करण रहेगा। इसके बाद शाम 06:54 बजे तक बालव करण रहेगा। इसके बाद कौलव करण प्रारंभ होगा, जो 4 अक्टूबर की सुबह 05:51 बजे तक रहेगा। इसके बाद तैतिलकरण लगेगा। आज वरीयान योग दोपहर 03:21 बजे तक रहेगा और इसके बाद परिघ योग शुरू हो जाएगा। आज कृष्ण पक्ष है और वार शनिवार है। चंद्रमा आज मिथुन राशि में रहेगा।
आज सूर्योदय सुबह 06:15 बजे होगा। सूर्यास्त का समय शाम 06:05 बजे है। चंद्रोदय रात 11:32 बजे होगा, जबकि चंद्रास्त दोपहर 01:04 बजे होगा।
आज के प्रमुख शुभ मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:38 बजे से 05:26 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 02:08 बजे से 02:56 बजे तक रहेगा। अमृत काल शाम 04:05 बजे से 05:35 बजे तक रहेगा। रात में निशिता मुहूर्त 11:46 बजे से 12:35 बजे तक रहेगा। यह समय 4 अक्टूबर की मध्यरात्रि तक रहेगा।
दिन के चौघड़िया में सुबह 07:44 बजे से 09:12 बजे तक शुभ-उत्तम समय रहेगा। दोपहर 12:10 बजे से 01:39 बजे तक चर-सामान्य चौघड़िया रहेगा। इसके बाद दोपहर 01:39 बजे से 03:07 बजे तक लाभ-उन्नति का समय रहेगा। शाम 03:07 बजे से 04:36 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम चौघड़िया रहेगा।
रात के चौघड़िया की बात करें तो शाम 06:05 बजे से 07:36 बजे तक लाभ-उन्नति का समय रहेगा। रात 09:08 बजे से 10:39 बजे तक शुभ-उत्तम चौघड़िया रहेगा। रात 10:39 बजे से 12:10 बजे तक अमृत-सर्वोत्तम समय रहेगा। इसके बाद 4 अक्टूबर को रात 12:10 बजे से 01:42 बजे तक चर-सामान्य चौघड़िया रहेगा। सुबह 04:44 बजे से 06:15 बजे तक लाभ-उन्नति का समय रहेगा।
आज के अशुभ समय को भी ध्यान में रखना जरूरी है। शनिवार को गुलिक काल सुबह 06:15 बजे से 07:44 बजे तक रहेगा। राहुकाल सुबह 09:12 बजे से 10:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। आज दुर्मुहूर्त सुबह 06:15 बजे से 07:02 बजे तक और फिर 07:02 बजे से 07:50 बजे तक रहेगा। यमगण्ड का समय दोपहर 01:39 बजे से 03:07 बजे तक रहेगा।
आज पंचांग में पूर्व दिशा का दिशाशूल बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में यात्रा करने वालों को दिशाशूल का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
आज के शिववास की बात करें तो सुबह 07:59 बजे तक शिववास श्मशान में रहेगा। इसके बाद 4 अक्टूबर की सुबह 05:51 बजे तक शिववास गौरी के साथ रहेगा। इसके बाद शिववास सभा में माना जाएगा।
इस तरह 3 अक्टूबर का दिन व्रत, पूजा और पितृ कर्म के लिहाज से महत्वपूर्ण है। एक तरफ माताएं संतान की लंबी आयु और सुरक्षा की कामना से जितिया का निर्जला व्रत रखेंगी, वहीं अष्टमी श्राद्ध के अवसर पर अष्टमी तिथि को दिवंगत हुए पितरों का तर्पण और श्राद्ध किया जाएगा। कालाष्टमी पर काल भैरव और शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा भी की जाएगी। धार्मिक अनुष्ठान करते समय अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में होने वाले अंतर को भी ध्यान में रखना उचित रहेगा।
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