हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आने वाले वर्षों में हिमाचल के सरकारी स्कूलों को देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों की श्रेणी में लाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम कर रही है, जिसका असर जल्द ही विद्यार्थियों और अभिभावकों को दिखाई देगा।
शिमला स्थित नवउन्नत सीबीएसई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में छात्रों से संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और प्रतिस्पर्धी माहौल से लैस किया जा रहा है। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को केवल भवनों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी फोकस किया जाएगा।
छात्रों से सीधे संवाद कर समझीं समस्याएं
मुख्यमंत्री ने स्कूल दौरे के दौरान विद्यार्थियों से खुलकर बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। छात्रों ने पढ़ाई, खेल, करियर मार्गदर्शन और स्कूलों में शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दे उठाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर जाकर विद्यार्थियों से सीधे संवाद करने का उद्देश्य यही है कि शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों को समझा जा सके और समय रहते समाधान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र को केवल नीतियों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि हर स्कूल में सुधार का प्रभाव दिखाई देना चाहिए। इसके लिए शिक्षकों की नियुक्ति, डिजिटल शिक्षा, प्रयोगशालाओं और खेल सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
सरकारी शिक्षकों की क्षमता पर जताया भरोसा
सुक्खू ने कहा कि सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षक बेहद प्रतिभाशाली और मेहनती हैं। वे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से चयनित होकर आते हैं और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि सरकारी स्कूलों में आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो ये निजी संस्थानों से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि शिक्षा के साथ अनुशासन और मेहनत सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। विद्यार्थियों को लक्ष्य तय कर निरंतर प्रयास करने की सलाह देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संघर्ष और समर्पण से ही जीवन में ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।
खेल और सह-पाठ्य गतिविधियों को भी मिलेगा बढ़ावा
छात्रों के साथ बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ वे खेल और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भी सक्रिय रहते थे। उन्होंने हॉकी, क्रिकेट और हैंडबॉल खेलने का जिक्र करते हुए कहा कि खेल विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत बनाते हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार स्कूलों में खेल गतिविधियों और सह-पाठ्यक्रम कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रही है ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो सके।
शिक्षकों की कमी जल्द होगी दूर
छात्रों ने मुख्यमंत्री के सामने भौतिकी और राजनीतिक विज्ञान विषयों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि 30 जून से पहले सभी रिक्त पद भर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न के तहत अपग्रेड किया गया है, वहां शिक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि विद्यार्थियों को बेहतर अकादमिक माहौल के साथ आधुनिक शिक्षा प्रणाली का लाभ मिल सके। इसके लिए विज्ञान प्रयोगशालाओं, स्मार्ट क्लासरूम और तकनीकी सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
शिक्षा सुधारों पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को भविष्य की सबसे बड़ी निवेश योजना मानकर आगे बढ़ रही है। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के स्कूलों में भी शहरी स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि किसी भी छात्र को संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की छवि बदलने के लिए कई नई पहलें शुरू की जाएंगी और प्रदेश के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाएंगे।


