हरियाणा सरकार ने भूमि और संपत्ति से जुड़े कार्यों को अधिक पारदर्शी, तेज और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश में किसी भी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बाद मालिकाना हक दर्ज कराने के लिए अलग से इंतकाल (म्यूटेशन) की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। नई डिजिटल प्रणाली के तहत रजिस्ट्री पूरी होते ही संबंधित भूमि का इंतकाल स्वतः दर्ज हो जाएगा और राजस्व रिकॉर्ड में मालिकाना विवरण अपडेट होने की प्रक्रिया भी स्वत: शुरू हो जाएगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को प्रदेश में ऑटो म्यूटेशन सिस्टम और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 का शुभारंभ करते हुए इसे राजस्व प्रशासन में एक महत्वपूर्ण सुधार बताया। सरकार का दावा है कि इस पहल से नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी लंबी प्रक्रियाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।
संपत्ति खरीदने वालों के लिए बड़ी सुविधा
अब तक किसी भूमि या संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद मालिकाना हक को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए अलग से इंतकाल की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। कई मामलों में यह प्रक्रिया महीनों तक लंबित रहती थी, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रियाओं को एकीकृत कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि संपत्ति का पंजीकरण होते ही राजस्व विभाग की प्रणाली स्वतः संबंधित रिकॉर्ड को अपडेट करने की दिशा में कार्य करेगी।
सरकार का कहना है कि इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि भूमि संबंधी विवादों और रिकॉर्ड में देरी से होने वाली समस्याओं में भी कमी आएगी।
पेपरलेस व्यवस्था का दूसरा चरण शुरू
राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली की शुरुआत की थी। प्रारंभिक चरण में इस व्यवस्था को एक तहसील में परीक्षण के तौर पर लागू किया गया था, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में विस्तारित किया गया।
अब पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 के रूप में इसका दूसरा चरण लागू किया गया है। इस चरण में केवल रजिस्ट्री प्रक्रिया को ऑनलाइन और डिजिटल बनाने तक सीमित न रहकर इंतकाल प्रक्रिया को भी इसके साथ जोड़ दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव नागरिकों के अनुभव को अधिक सरल बनाने और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक तकनीक के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से किया गया है।
घर बैठे उपलब्ध होंगे दस्तावेज
नई प्रणाली का एक महत्वपूर्ण लाभ यह होगा कि नागरिकों को इंतकाल की प्रति प्राप्त करने के लिए कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध होंगे और लोग अपने घर से ही उन्हें डाउनलोड तथा प्रिंट कर सकेंगे।
इसके अलावा संपत्ति से जुड़े मामलों की स्थिति भी ऑनलाइन देखी जा सकेगी। इससे लोगों को यह जानकारी लेने के लिए बार-बार अधिकारियों के संपर्क में नहीं जाना पड़ेगा कि उनका मामला किस चरण में है।
आधार आधारित पहचान होगी अनिवार्य
नई व्यवस्था में पहचान सत्यापन को और अधिक मजबूत बनाया गया है। रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल दोनों पक्षों के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी अनिवार्य की गई है।
सरकार का मानना है कि इससे फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और विवादित लेन-देन की संभावनाओं को कम किया जा सकेगा। डिजिटल सत्यापन के माध्यम से संबंधित व्यक्तियों की पहचान की पुष्टि तुरंत हो जाएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित बनेगी।
प्रतिनिधि नियुक्त करने की सुविधा
कई बार संपत्ति के मालिक, खरीदार, एनआरआई अथवा किसी संस्था के प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाते। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए नई प्रणाली में प्रतिनिधि नियुक्त करने की सुविधा भी जोड़ी गई है।
अब व्यक्ति, कंपनी, संस्था या विदेश में रहने वाला भारतीय एक या एक से अधिक अधिकृत प्रतिनिधियों को नियुक्त कर सकेगा, जो उनकी ओर से प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
इससे विशेष रूप से एनआरआई निवेशकों और व्यवसायिक संस्थाओं को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
आवेदन प्रक्रिया को बनाया गया सरल
राजस्व विभाग ने रजिस्ट्री के लिए उपयोग किए जाने वाले आवेदन प्रपत्र को भी पहले की तुलना में अधिक सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया है।
नागरिक स्वयं आवेदन भर सकते हैं। इसके अलावा डीड राइटर, अधिवक्ता या हेल्पडेस्क की सहायता से भी दस्तावेज तैयार किए जा सकते हैं। सरकार का उद्देश्य प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ आम नागरिक के लिए सहज बनाए रखना है।
डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक प्रणाली लागू
नई व्यवस्था में डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को पूरी तरह लागू किया गया है। इससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता और सुरक्षा बढ़ेगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल प्रमाणीकरण से कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। साथ ही दस्तावेजों में छेड़छाड़ या जालसाजी की संभावनाएं भी कम होंगी।
भूमि संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी होगी स्वतः उपलब्ध
नई प्रणाली में भूमि से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां स्वतः प्रदर्शित होंगी। उदाहरण के लिए यदि भूमि का कोई हिस्सा प्राइम श्रेणी या नॉन-प्राइम श्रेणी में आता है तो उसकी जानकारी सिस्टम में दिखाई देगी।
इसी प्रकार यदि किसी भूमि पर विशेष कानूनी प्रावधान लागू हैं तो उसकी जानकारी भी रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान सामने आ जाएगी। इससे नागरिकों को संपत्ति खरीदते समय अधिक पारदर्शी और स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
दस्तावेज सत्यापन के लिए क्यूआर कोड तकनीक
राजस्व विभाग ने दस्तावेजों के सत्यापन के लिए क्यूआर कोड आधारित प्रणाली भी लागू की है। इसके माध्यम से दस्तावेजों की प्रामाणिकता को डिजिटल रूप से जांचा जा सकेगा।
यह कदम फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने और रिकॉर्ड सत्यापन को तेज बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारी किसी भी दस्तावेज की जानकारी को डिजिटल माध्यम से तुरंत सत्यापित कर सकेंगे।
ऑनलाइन अपलोड होंगे सभी दस्तावेज
नई प्रणाली में नागरिकों को अतिरिक्त दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने की सुविधा भी दी गई है। यदि किसी आवेदन में अतिरिक्त प्रमाण पत्र या अन्य रिकॉर्ड की आवश्यकता होगी तो उन्हें डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
यह सुविधा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान भी उपलब्ध रहेगी, जिससे दस्तावेजों की कमी के कारण फाइलों के लंबित रहने की संभावना कम होगी।
लंबित इंतकाल मामलों के निपटारे पर जोर
हरियाणा में लंबे समय से बड़ी संख्या में इंतकाल मामले लंबित रहे हैं। सरकार के अनुसार प्रदेश में छह लाख से अधिक ऐसे मामले लंबित थे, जिनमें से बड़ी संख्या का निपटारा पहले ही किया जा चुका है।
नई ऑटो म्यूटेशन प्रणाली लागू होने के बाद हजारों मामलों में इंतकाल स्वतः दर्ज हो चुका है। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद लंबित मामलों की संख्या तेजी से घटेगी और भविष्य में ऐसे मामलों के जमा होने की संभावना भी कम होगी।
24 घंटे में हो सकेगा इंतकाल स्वीकृत
नई प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसकी समयबद्ध कार्यप्रणाली है। जिन मामलों में भूमि के स्वामित्व विभाजन या अन्य जटिल प्रक्रियाओं की आवश्यकता नहीं होगी, उनमें 24 घंटे के भीतर इंतकाल स्वीकृत किया जा सकेगा।
वहीं जिन मामलों में तकनीकी या राजस्व संबंधी अतिरिक्त प्रक्रिया आवश्यक होगी, वहां भी निर्धारित समयसीमा के भीतर निपटारा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का दावा है कि अधिकांश मामलों का समाधान पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से हो सकेगा।
तत्काल अपॉइंटमेंट जैसी सुविधा भी मिलेगी
भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए नागरिकों को अपॉइंटमेंट प्रणाली में भी अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। अब जरूरत पड़ने पर लोग तत्काल श्रेणी में समय लेकर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
इस व्यवस्था की तुलना पासपोर्ट सेवाओं में उपलब्ध तत्काल सुविधा से की जा रही है। इससे उन लोगों को लाभ मिलेगा जिन्हें किसी कारणवश संपत्ति का पंजीकरण जल्दी करवाना हो।
डिजिटल प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो म्यूटेशन और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि राजस्व प्रशासन में व्यापक सुधार का हिस्सा है।
इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी, नागरिकों का समय बचेगा और भूमि रिकॉर्ड अधिक अद्यतन रहेंगे।
राज्य सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन को आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में इसके माध्यम से लाखों नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है और भूमि संबंधी कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।



