आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों के पास खाना बनाने और सही डाइट लेने का समय कम होता जा रहा है। काम के बीच भूख लगने पर या खाली समय में लोग अक्सर चिप्स, बिस्किट, नमकीन, इंस्टेंट फूड और दूसरी पैकेट वाली चीजों का सहारा लेते हैं। ऑफिस में काम करते हुए, टीवी देखते समय या सफर के दौरान अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स खाना एक आम आदत बन चुकी है।
लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस आदत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अध्ययन में दावा किया गया है कि ज्यादा मात्रा में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर लंबे समय तक इनका ज्यादा इस्तेमाल सोचने-समझने की क्षमता और ध्यान केंद्रित करने की ताकत पर असर डाल सकता है। रिसर्च में यह भी संकेत दिया गया है कि ऐसी आदतें आगे चलकर डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी के खतरे को बढ़ा सकती हैं।
पैकेट वाले खाने की बढ़ती आदत बनी चिंता का कारण
लोगों की बदलती लाइफस्टाइल ने रेडी-टू-ईट और पैकेट फूड्स की मांग को काफी बढ़ा दिया है। इन खाद्य पदार्थों को स्वादिष्ट बनाने और लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के रसायनों और एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि इन्हें अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की श्रेणी में रखा जाता है।
ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी की ओर से की गई रिसर्च में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स और दिमागी स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझने की कोशिश की गई। इस अध्ययन में साल 2016 से लेकर दिसंबर 2023 तक लोगों के खान-पान और स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
इस रिसर्च में 40 से 70 साल की उम्र के करीब 2100 लोगों को शामिल किया गया। वैज्ञानिकों ने यह देखने की कोशिश की कि रोजमर्रा की डाइट में पैकेट वाले खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ने से लोगों की याददाश्त, ध्यान और मानसिक क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है।
रोजाना चिप्स का एक पैकेट भी डाल सकता है असर
रिसर्च के निष्कर्षों में सामने आया कि अगर किसी व्यक्ति की डाइट में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की मात्रा 10 फीसदी तक बढ़ जाती है तो उसकी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी देखी जा सकती है। अध्ययन के मुताबिक, यह बदलाव छोटा लग सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसी आदत बनी रहने पर इसका प्रभाव ज्यादा दिखाई दे सकता है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि डाइट में हेल्दी चीजें शामिल होने के बावजूद अगर अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन ज्यादा है तो इसका नकारात्मक असर हो सकता है। यानी कोई व्यक्ति फल, सब्जियां या पौष्टिक खाना खा रहा है, लेकिन साथ ही रोजाना बड़ी मात्रा में पैकेट फूड भी ले रहा है तो जोखिम बना रह सकता है।
रिसर्च में 10 फीसदी बढ़ोतरी को लगभग रोजाना एक पैकेट चिप्स खाने की आदत के बराबर बताया गया है। यानी छोटी-सी दिखने वाली यह आदत भी लंबे समय में शरीर और दिमाग पर असर डाल सकती है।
क्या होते हैं अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स?
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स ऐसे खाद्य पदार्थ होते हैं जिन्हें तैयार करने के दौरान कई औद्योगिक प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। इनमें ऐसे कई पदार्थ मिलाए जाते हैं जो आमतौर पर घर की रसोई में इस्तेमाल नहीं किए जाते।
इनमें प्रिजर्वेटिव, आर्टिफिशियल फ्लेवर, रंग, स्वीटनर, इमल्सीफायर और अतिरिक्त फैट जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं। इन्हें बनाने के लिए मोल्डिंग और एक्सट्रूजन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है ताकि खाने का स्वाद, रंग और टेक्सचर बेहतर बनाया जा सके।
चिप्स, पैकेट स्नैक्स, कैंडी, कई तरह के इंस्टेंट फूड और मीठे पेय पदार्थ इसके उदाहरण हैं। ये चीजें स्वाद में अच्छी लगती हैं और आसानी से उपलब्ध होती हैं, इसलिए लोग इन्हें बार-बार खाने लगते हैं।
दिमाग की क्षमता पर कैसे पड़ सकता है प्रभाव?
वैज्ञानिकों का मानना है कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स में मौजूद ज्यादा मात्रा में शुगर, खराब फैट, नमक और कृत्रिम तत्व शरीर में सूजन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक ऐसी डाइट लेने से शरीर के मेटाबॉलिज्म और हृदय स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
दिमाग भी शरीर का ही हिस्सा है और खराब खान-पान का प्रभाव उस पर भी पड़ सकता है। जब शरीर में लगातार असंतुलित पोषण पहुंचता है तो मानसिक ऊर्जा, फोकस और याद रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि रिसर्च में यह साफ नहीं कहा गया है कि पैकेट फूड खाने से सीधे तौर पर डिमेंशिया हो जाएगा। अध्ययन में केवल दोनों के बीच एक संबंध देखा गया है। यानी ज्यादा अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाने वालों में मानसिक गिरावट का खतरा अधिक पाया गया, लेकिन इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
सिर्फ दिमाग नहीं, पूरे शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं ये फूड्स
अध्ययन में यह भी बताया गया कि ज्यादा मात्रा में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाने की आदत सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं है। इससे मोटापा, हृदय रोग और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
इन खाद्य पदार्थों में कैलोरी ज्यादा लेकिन पोषण कम हो सकता है। यही कारण है कि इन्हें बार-बार खाने से वजन बढ़ने की संभावना रहती है। इसके अलावा ज्यादा नमक और खराब फैट ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकते हैं।
खाने की आदत में छोटे बदलाव ला सकते हैं बड़ा फर्क
विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह से पैकेट फूड छोड़ना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन इसकी मात्रा कम की जा सकती है। रोजाना चिप्स, नमकीन या मीठे स्नैक्स की जगह फल, नट्स, घर का बना स्नैक या कम प्रोसेस्ड चीजों को शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
इसके अलावा नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन भी दिमागी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
रिसर्च का संदेश क्या है?
इस अध्ययन का मुख्य संदेश यही है कि खान-पान की छोटी-छोटी आदतें लंबे समय में स्वास्थ्य पर बड़ा असर डाल सकती हैं। अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स कभी-कभार खाना अलग बात है, लेकिन रोजाना इन्हें अपनी डाइट का हिस्सा बना लेना चिंता का कारण बन सकता है।
रिसर्च ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि स्वाद और सुविधा के लिए चुना गया खाना कहीं भविष्य में शरीर और दिमाग के लिए परेशानी तो नहीं बन रहा। बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि डाइट में प्राकृतिक और पोषक चीजों की मात्रा बढ़ाई जाए और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखा जाए।




