पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान होगा और आक्रामक, CM मान ने अफसरों से कहा- हर जिले में दिखे ठोस कार्रवाई का असर

पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान होगा और आक्रामक, CM मान ने अफसरों से कहा- हर जिले में दिखे ठोस कार्रवाई का असर

चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने राज्य को नशामुक्त बनाने की दिशा में अपने अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक पंजाब पूरी तरह नशे की समस्या से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक अभियान लगातार तेज गति से जारी रहेगा।

विलेज डिफेंस कमेटियों के कार्यों की समीक्षा के लिए आयोजित वर्चुअल बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी डिप्टी कमिश्नरों (डीसी), पुलिस कमिश्नरों (सीपी) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों में नशा विरोधी अभियान को और अधिक मजबूत करें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक मशीनरी और पुलिस को समन्वय के साथ काम करते हुए जमीनी स्तर पर ऐसे परिणाम देने होंगे, जिससे नशा तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके और प्रभावित लोगों का पुनर्वास भी सुनिश्चित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की ‘युद्ध नशियां विरुद्ध’ मुहिम को लोगों का व्यापक समर्थन मिल रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत नशा तस्करों के नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की गई है, जिससे उनकी सप्लाई चेन को गंभीर नुकसान पहुंचा है। बड़े तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा गया है, जिससे पूरे नेटवर्क पर प्रभाव पड़ा है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अब इस अभियान को केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए सामाजिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाए। गांवों और शहरों में लोगों का विश्वास जीतना, उन्हें अभियान से जोड़ना और नशे के खिलाफ जागरूक करना भी प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना इस चुनौती पर स्थायी जीत हासिल करना संभव नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर भी दिया स्पष्ट संदेश

बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी अभियान को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि बठिंडा के लेक व्यू गेस्ट हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभी डीसी और एसएसपी के साथ विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने लिखा कि सभी अधिकारियों को नशे के पूर्ण उन्मूलन के लिए जमीनी स्तर पर कार्रवाई और तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और इसमें किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

विलेज डिफेंस कमेटियों की भूमिका को बताया अहम

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान विलेज डिफेंस कमेटियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की और उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि इन कमेटियों के सदस्य पिछले तीन महीनों के दौरान नशा तस्करी से संबंधित 13 हजार से अधिक शिकायतें प्रशासन और पुलिस तक पहुंचा चुके हैं, जिससे कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी।

उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि आम लोग भी नशे के खिलाफ इस लड़ाई में सरकार के साथ खड़े हैं। जिन जिलों में विलेज डिफेंस कमेटियां अपेक्षाकृत कम सक्रिय हैं, वहां जिला प्रशासन को विशेष प्रयास कर लोगों को इस अभियान से जोड़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में हर महीने विलेज डिफेंस कमेटियों की नियमित बैठक आयोजित की जाए, ताकि उनकी गतिविधियों की समीक्षा हो सके और आवश्यक सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं राज्य स्तर पर इन बैठकों की मासिक समीक्षा करेंगे और अभियान की प्रगति पर लगातार नजर रखेंगे।

डेढ़ लाख सदस्यों का नेटवर्क बना सरकार की ताकत

मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब सरकार ने राज्यभर में लगभग 1.50 लाख सदस्यों वाला विलेज डिफेंस कमेटियों का व्यापक नेटवर्क तैयार किया है। उनका कहना था कि यह केवल सरकारी तंत्र नहीं बल्कि समाज की सामूहिक शक्ति है, जो नशे के खिलाफ लड़ाई को जन आंदोलन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि नशा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक समस्या भी है। इसलिए इसके समाधान के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग—युवाओं, महिलाओं, शिक्षकों, धार्मिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और पंचायतों—की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

हर जिले में दिखे ठोस कार्रवाई का परिणाम

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके जिले में कहीं भी नशे की बिक्री या तस्करी को पनपने का अवसर न मिले। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष अभियान चलाने चाहिए और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि केवल तस्करों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। नशे की गिरफ्त में आ चुके लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें। प्रशासन को स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर इस दिशा में भी प्रभावी कार्य करना होगा।

‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर कायम सरकार

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि राज्य सरकार नशा तस्करी के प्रति पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा और नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्रवाई के साथ-साथ लोगों का विश्वास जीतना भी जरूरी है। यदि जनता प्रशासन के साथ जुड़ेगी और समय पर सूचनाएं साझा करेगी तो नशे के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना आसान होगा।

समाज की भागीदारी से ही संभव होगी स्थायी सफलता

बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को नशामुक्त बनाना केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्रों में सामाजिक संगठनों, पंचायतों, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखें तथा नशा विरोधी अभियान को जन आंदोलन का रूप दें।

उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयासों से पंजाब को नशे की समस्या से मुक्त कर युवाओं के लिए सुरक्षित और बेहतर भविष्य तैयार किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस मिशन को तब तक जारी रखेगी, जब तक पंजाब पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो जाता।