30 की उम्र के बाद लिवर को न करें नजरअंदाज, ये 7 आदतें रखेंगी जिंदगीभर स्वस्थ; फैटी लिवर से भी होगा बचाव

30 की उम्र के बाद लिवर को न करें नजरअंदाज, ये 7 आदतें रखेंगी जिंदगीभर स्वस्थ; फैटी लिवर से भी होगा बचाव

30 वर्ष की उम्र पार करने के बाद अधिकांश लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा सजग हो जाते हैं। नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच, ब्लड शुगर टेस्ट और दिल की सेहत पर ध्यान देना आम बात हो जाती है। लेकिन इसी दौरान शरीर का एक बेहद अहम अंग अक्सर हमारी प्राथमिकता से बाहर रह जाता है और वह है लिवर। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक लिवर में गंभीर समस्या सामने नहीं आती, तब तक ज्यादातर लोग उसकी सेहत को लेकर सतर्क नहीं होते। जबकि यह शरीर का ऐसा अंग है, जो सैकड़ों जरूरी जैविक प्रक्रियाओं को संभालता है और पूरे शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लिवर का काम सिर्फ भोजन को पचाने तक सीमित नहीं है। यह शरीर से हानिकारक और विषैले तत्वों को बाहर निकालने, ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, कई आवश्यक विटामिन और मिनरल्स को स्टोर करने तथा दवाओं के प्रभाव को नियंत्रित करने जैसे 500 से अधिक कार्य करता है। अच्छी बात यह है कि लिवर में खुद को दोबारा ठीक करने की अद्भुत क्षमता होती है, लेकिन यह तभी संभव है जब समय रहते उसकी देखभाल शुरू कर दी जाए। यदि लगातार गलत जीवनशैली अपनाई जाए तो यह क्षमता भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है।

विशेषज्ञों के अनुसार आज भारत में फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग हर तीन में से एक वयस्क फैटी लिवर से प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बढ़ती रहती है, इसलिए कई लोगों को इसकी जानकारी काफी देर से मिलती है।

लोगों के बीच एक आम गलतफहमी यह भी है कि लिवर की बीमारी केवल शराब पीने वालों को होती है। चिकित्सकों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पूरे दिन बैठकर काम करता है, नियमित व्यायाम नहीं करता, मोटापे से ग्रस्त है, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहा है या लगातार तनाव में रहता है, तो उसे भी फैटी लिवर होने का खतरा रहता है। असंतुलित भोजन और बढ़ता वजन भी इस बीमारी की बड़ी वजह बन रहे हैं।

यदि फैटी लिवर की समस्या को समय रहते नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह धीरे-धीरे लिवर में सूजन पैदा कर सकती है। आगे चलकर यह स्थिति फाइब्रोसिस, सिरोसिस और कुछ मामलों में लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी बदल सकती है। 30 की उम्र के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म पहले की तुलना में धीमा होने लगता है। इसके साथ ही नौकरी, परिवार और अन्य जिम्मेदारियों के कारण शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं, जिससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए इस उम्र के बाद स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी माना जाता है।

वजन को रखें नियंत्रित

स्वस्थ लिवर के लिए सबसे पहली जरूरत है शरीर का वजन संतुलित रखना। डॉक्टरों का कहना है कि बॉडी मास इंडेक्स (BMI) को 23 से नीचे रखने का प्रयास करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहले से फैटी लिवर है तो कुल वजन का सिर्फ 7 से 10 प्रतिशत कम करना भी लिवर की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है। वजन कम होने से लिवर में जमा अतिरिक्त फैट घटने लगता है और सूजन का खतरा भी कम हो जाता है।

नियमित एक्सरसाइज बनाएं दिनचर्या का हिस्सा

शारीरिक गतिविधियां लिवर की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करने की सलाह दी जाती है। यानी रोजाना लगभग 35 से 40 मिनट तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी करना या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसी गतिविधियां अपनाई जा सकती हैं। नियमित व्यायाम से न केवल वजन नियंत्रित रहता है बल्कि शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता भी बेहतर होती है, जिससे फैटी लिवर का जोखिम कम होता है।

खानपान में करें जरूरी बदलाव

विशेषज्ञ बताते हैं कि लिवर को स्वस्थ रखने में संतुलित भोजन की सबसे बड़ी भूमिका होती है। ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थ, प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और तली-भुनी चीजों का सेवन कम करना चाहिए। इसके स्थान पर ताजे फल, मौसमी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, ड्राई फ्रूट्स और लीन प्रोटीन को भोजन का हिस्सा बनाना बेहतर माना जाता है। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि बिना अतिरिक्त चीनी और क्रीम वाली ब्लैक कॉफी सीमित मात्रा में पीने से लिवर की कार्यक्षमता को लाभ मिल सकता है।

शराब से दूरी है सबसे बेहतर विकल्प

डॉक्टरों का कहना है कि शराब की कोई निश्चित सुरक्षित मात्रा तय नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को मोटापा, डायबिटीज, फैटी लिवर या वायरल हेपेटाइटिस जैसी समस्या पहले से है, तो शराब का सेवन उसके लिवर को तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने के लिए शराब से दूरी बनाना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

हेपेटाइटिस से बचाव भी जरूरी

हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी ऐसे संक्रमण हैं जो कई वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में मौजूद रह सकते हैं। इस दौरान वे धीरे-धीरे लिवर को स्थायी नुकसान पहुंचाते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण प्रभावी और सुरक्षित है। सभी वयस्कों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसका टीका लगवाने पर विचार करना चाहिए। जिन लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक है, उन्हें समय-समय पर जांच भी करानी चाहिए।

बिना सलाह दवाएं और हर्बल प्रोडक्ट न लें

आजकल इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लिवर डिटॉक्स या लिवर साफ करने के कई घरेलू और हर्बल उपाय बताए जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से अधिकांश दावों का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। कई तथाकथित हर्बल उत्पाद उल्टा लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा दर्द होने पर बार-बार अपनी मर्जी से पेनकिलर लेना भी लिवर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए किसी भी दवा या सप्लीमेंट का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना चाहिए।

समय पर जांच से मिलती है सुरक्षा

लिवर की बीमारियों का समय रहते पता लगाने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) कराना फायदेमंद हो सकता है। यदि व्यक्ति मोटापे, डायबिटीज, शराब सेवन, हाई कोलेस्ट्रॉल या पारिवारिक लिवर रोग के जोखिम में है तो अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन जैसी जांच भी करानी चाहिए। इससे बीमारी का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है और समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है।

लिवर रोग लंबे समय तक नहीं देते संकेत

विशेषज्ञों के मुताबिक लिवर की अधिकांश बीमारियां शुरुआती दौर में कोई खास लक्षण नहीं दिखातीं। यही कारण है कि मरीज अक्सर तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। पीलिया, शरीर में सूजन, पेट में पानी भरना या बार-बार खून बहने जैसी समस्याएं तब सामने आती हैं, जब लिवर को गंभीर नुकसान हो चुका होता है। इसलिए केवल लक्षणों का इंतजार करना समझदारी नहीं है।

अच्छी आदतें ही हैं सबसे बड़ी सुरक्षा

विशेषज्ञों का मानना है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद यदि व्यक्ति संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना ले, तो लिवर से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही समय पर उठाए गए छोटे-छोटे कदम भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

(Photo : AI Generated)