हिमाचल प्रदेश सरकार ने किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना में अपने हितों को सुरक्षित करने के बाद अब भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े वित्तीय अधिकारों और शानन जलविद्युत परियोजना के मुद्दे पर भी आक्रामक रणनीति अपनाने के संकेत दिए हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश सरकार अब अपने वैधानिक अधिकारों को हर हाल में हासिल करेगी और वर्षों से लंबित मामलों को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाने के लिए कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े हालिया घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रदेश अपने हितों पर मजबूती से खड़ा रहे तो बड़े से बड़ा फैसला भी हिमाचल के पक्ष में कराया जा सकता है। इसी आत्मविश्वास के साथ अब सरकार BBMB में राज्य की हिस्सेदारी और शानन परियोजना के अधिकारों के लिए भी संघर्ष को आगे बढ़ाएगी।
केंद्र से उठाया BBMB के बकाया का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाले लंबित वित्तीय अधिकारों और बकाया भुगतान के मुद्दे पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से दूरभाष पर विस्तार से चर्चा की। बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से इस मामले में सक्रिय सहयोग की मांग करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश लंबे समय से अपने वैधानिक अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहा है और अब इस विषय को और अधिक लंबित नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य किसी से टकराव पैदा करना नहीं है, बल्कि संविधान और न्यायालय द्वारा मान्यता प्राप्त अधिकारों को प्राप्त करना है। यदि राज्य के हिस्से का लाभ वर्षों से लंबित है, तो उसे दिलाने की जिम्मेदारी सभी संबंधित पक्षों की बनती है।
किशाऊ परियोजना पर हिमाचल की स्पष्ट शर्त
मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री को यह भी स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश किशाऊ बांध परियोजना में आगे तभी बढ़ेगा, जब हरियाणा सरकार BBMB से जुड़े बकाया भुगतान के मामले में अपना स्पष्ट रुख सामने रखेगी।
उन्होंने कहा कि हरियाणा को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शपथपत्र देकर यह बताना होगा कि वह हिमाचल प्रदेश के लंबित वित्तीय अधिकारों और बकाया भुगतान के विषय में सहमत है। प्रदेश सरकार का मानना है कि जब तक पुराने मामलों का समाधान नहीं होता, तब तक नई परियोजनाओं में सहयोग की अपेक्षा उचित नहीं होगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्षों से लगातार आग्रह किए जाने के बावजूद पंजाब और हरियाणा की ओर से हिमाचल को उसके वैधानिक अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल पाया है। इसलिए अब सरकार पहले लंबित दावों का समाधान चाहती है।
केंद्रीय मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन
मुख्यमंत्री के अनुरोध पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने आश्वासन दिया कि वह इस पूरे मामले पर पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के वैधानिक अधिकारों की रक्षा और लंबित विवादों के समाधान के लिए आवश्यक पहल की जाएगी।
प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता से लंबे समय से अटके इस मामले में सकारात्मक प्रगति हो सकती है और संबंधित राज्यों के बीच सहमति का रास्ता निकलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 15 वर्ष पहले सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में हिमाचल प्रदेश को BBMB की परियोजनाओं और उनसे मिलने वाले लाभ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार स्वीकार किया था। इसके बावजूद राज्य को अब तक उस हिस्सेदारी का पूरा लाभ नहीं मिल सका है।
उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णय के बावजूद हिमाचल प्रदेश अपने हिस्से की 13,066 मिलियन यूनिट बिजली और उससे जुड़े वित्तीय लाभ से वंचित रहा है। यह केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि प्रदेश के वैधानिक अधिकारों का भी प्रश्न है।
करीब 4,200 करोड़ रुपये के बकाया पर फोकस
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश सरकार अब BBMB से अपने हिस्से के लगभग 4,200 करोड़ रुपये के बकाया की वसूली के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है।
सरकार का मानना है कि यदि यह राशि हिमाचल को प्राप्त होती है तो उसका उपयोग राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, पेयजल और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं को मजबूत करने में किया जा सकता है। इसलिए इस विषय को सरकार ने अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है।
शानन परियोजना पर भी जारी रहेगी लड़ाई
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि BBMB के साथ-साथ शानन जलविद्युत परियोजना को लेकर भी हिमाचल प्रदेश अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश के लिए केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और राज्य के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
उन्होंने कहा कि सरकार कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से इस मामले को मजबूती से आगे बढ़ाएगी और हिमाचल के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
2023 में पुराने समझौते को किया था अस्वीकार
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े पुराने समझौते को राज्य सरकार ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि उस समय प्रस्तावित व्यवस्था हिमाचल प्रदेश के हितों के अनुरूप नहीं थी और सरकार ने प्रदेश के अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए उसे अस्वीकार कर दिया।
सरकार का दावा है कि उसी निर्णय के बाद नए सिरे से बातचीत का रास्ता खुला और हिमाचल अपने हितों को अधिक मजबूती से रखने में सफल रहा।
जल संसाधनों पर अधिकार सुनिश्चित करने की रणनीति
प्रदेश सरकार का कहना है कि हिमाचल की नदियां और जल संसाधन राज्य की सबसे बड़ी प्राकृतिक संपत्ति हैं। ऐसे में उनसे जुड़े प्रत्येक प्रोजेक्ट में हिमाचल के आर्थिक और कानूनी हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार अब ऐसी सभी परियोजनाओं की समीक्षा कर रही है, जिनमें प्रदेश के अधिकार, राजस्व या हिस्सेदारी से जुड़े मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। BBMB, किशाऊ और शानन परियोजना को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब पूरे मामले की नजर केंद्र सरकार की अगली पहल, पंजाब और हरियाणा के रुख तथा न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगी। यदि संबंधित पक्षों के बीच सहमति बनती है और लंबित दावों का समाधान निकलता है, तो हिमाचल प्रदेश को हजारों करोड़ रुपये के वित्तीय लाभ के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ा फायदा मिल सकता है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दोहराया कि उनकी सरकार प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के हिस्से का जो भी अधिकार कानून और न्यायालय ने सुनिश्चित किया है, उसे प्राप्त करने के लिए सरकार हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी और किसी भी प्रकार के दबाव में अपने हितों से समझौता नहीं करेगी।



