हिमाचल प्रदेश सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme – NSAP) के तहत केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली पेंशन सहायता राशि में वृद्धि की मांग की है। सरकार का कहना है कि वर्तमान केंद्रीय सहायता पिछले कई वर्षों से अपरिवर्तित है, जबकि इस दौरान महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की लागत और दैनिक जीवन-यापन का खर्च लगातार बढ़ा है। ऐसे में मौजूदा सहायता राशि आज की आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गई है।
राज्य सरकार का मानना है कि यदि केंद्र अपनी वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाता है, तो वरिष्ठ नागरिकों को अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और राज्यों पर पड़ रहा अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी कम होगा। सरकार ने यह भी सुझाव दिया है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत दी जाने वाली सहायता राशि की समय-समय पर समीक्षा और संशोधन होना चाहिए, ताकि लाभार्थियों को वास्तविक जरूरतों के अनुसार सहायता मिलती रहे।
क्या है राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP)?
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम केंद्र सरकार की एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को न्यूनतम वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। इस योजना के अंतर्गत वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और दिव्यांगजन सहायता जैसी कई योजनाएं संचालित की जाती हैं।
वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले पात्र वरिष्ठ नागरिकों को केंद्र सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसके साथ ही राज्य सरकारें भी अपने-अपने संसाधनों से अतिरिक्त राशि जोड़कर लाभार्थियों को अधिक पेंशन उपलब्ध कराती हैं।
हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि यह योजना बुजुर्गों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है, इसलिए इसकी सहायता राशि को समय के अनुसार बढ़ाया जाना आवश्यक है।
वर्षों से नहीं बढ़ी केंद्र सरकार की सहायता
राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन की राशि पिछले डेढ़ दशक से लगभग अपरिवर्तित बनी हुई है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार—
60 से 79 वर्ष आयु वर्ग के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को केंद्र सरकार की ओर से 200 रुपये प्रति माह दिए जाते हैं।
80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 500 रुपये प्रति माह की केंद्रीय सहायता मिलती है।
इनमें से 60 से 79 वर्ष आयु वर्ग के लिए 200 रुपये प्रतिमाह की राशि वर्ष 2007 से लागू है, जबकि 80 वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए 500 रुपये प्रतिमाह की सहायता वर्ष 2011 से प्रभावी है।
राज्य सरकार का कहना है कि इतने लंबे समय तक राशि में कोई संशोधन नहीं होने के कारण उसका वास्तविक आर्थिक मूल्य काफी कम हो चुका है। वर्तमान समय में यह राशि बुजुर्गों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
महंगाई ने बढ़ाया जीवन-यापन का खर्च
पिछले कई वर्षों में महंगाई के कारण आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। खाद्य सामग्री, दवाइयों, अस्पतालों में इलाज, बिजली, परिवहन तथा अन्य घरेलू खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ चुके हैं।
विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी खर्च अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ नियमित दवाइयों, चिकित्सा जांच, डॉक्टर से परामर्श और उपचार की आवश्यकता भी बढ़ जाती है।
राज्य सरकार का तर्क है कि जब जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ रही है, तब सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता राशि का भी समय-समय पर पुनरीक्षण होना चाहिए। अन्यथा पेंशन का वास्तविक लाभ धीरे-धीरे कम होता जाएगा।
हिमाचल सरकार अपने संसाधनों से दे रही अधिक सहायता
केंद्र सरकार की सीमित सहायता के बावजूद हिमाचल प्रदेश सरकार अपने बजट से अतिरिक्त राशि जोड़कर पात्र वरिष्ठ नागरिकों को अपेक्षाकृत अधिक पेंशन उपलब्ध करा रही है।
वर्तमान में राज्य सरकार पात्र लाभार्थियों को उनकी पात्रता और श्रेणी के अनुसार 1100 रुपये से लेकर 1700 रुपये प्रति माह तक सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान कर रही है।
राज्य सरकार का कहना है कि यह अतिरिक्त राशि पूरी तरह राज्य के वित्तीय संसाधनों से दी जाती है। यदि केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी बढ़ा देती है, तो सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा भविष्य में सहायता राशि बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
लगभग 1.16 लाख वरिष्ठ नागरिकों को मिल रहा लाभ
हिमाचल प्रदेश में लगभग 1.16 लाख आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिक राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत पंजीकृत हैं। ये सभी पात्र लाभार्थी केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त व्यवस्था के तहत वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि यह संख्या समय के साथ बढ़ भी सकती है, क्योंकि हर वर्ष नए पात्र लाभार्थी योजना से जुड़ते हैं। इसलिए भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वित्तीय सहायता की समीक्षा करना जरूरी है।
त्रैमासिक आधार पर होता है भुगतान
हिमाचल प्रदेश सरकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान हर तीन महीने में एक बार करती है। यानी लाभार्थियों को तीन माह की पेंशन एक साथ उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित रहती है और लाभार्थियों को समय पर राशि उपलब्ध कराने में सुविधा होती है। बैंक खातों के माध्यम से भुगतान होने से पारदर्शिता भी बनी रहती है और प्रशासनिक प्रक्रिया आसान होती है।
राज्यों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
हिमाचल प्रदेश सरकार ने केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया है कि केंद्रीय सहायता राशि लंबे समय से स्थिर रहने के कारण राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ रहा है।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा लगातार विस्तारित हो रहा है। वरिष्ठ नागरिकों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में राज्य सरकारों को अपने बजट से अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है।
सरकार का मानना है कि यदि केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती है, तो राज्यों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने में सहायता मिलेगी और वित्तीय संतुलन बनाए रखना आसान होगा।
महंगाई के अनुरूप संशोधन की आवश्यकता
राज्य सरकार ने अपने प्रस्ताव में सुझाव दिया है कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सहायता राशि को महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समय-समय पर संशोधित किया जाना चाहिए।
वर्तमान में राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत मिलने वाली केंद्रीय राशि किसी महंगाई सूचकांक (Inflation Index) से जुड़ी नहीं है। इसका अर्थ यह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद सहायता राशि स्वतः नहीं बढ़ती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पेंशन राशि को समय-समय पर संशोधित नहीं किया गया, तो उसकी वास्तविक क्रय शक्ति लगातार कम होती जाएगी। इससे योजना का उद्देश्य भी प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
सामाजिक सुरक्षा और सार्वजनिक नीति से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्धावस्था में अधिकांश लोगों की नियमित आय समाप्त हो जाती है या काफी सीमित रह जाती है। ऐसे में सरकारी पेंशन उनके लिए आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण स्रोत होती है।
यह राशि कई बुजुर्गों के लिए निम्नलिखित आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होती है—
नियमित दवाइयों की खरीद
स्वास्थ्य जांच और उपचार
भोजन और दैनिक आवश्यक वस्तुएं
बिजली, पानी और अन्य घरेलू खर्च
आपातकालीन चिकित्सा आवश्यकताएं
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सहायता राशि समय के अनुसार नहीं बढ़ेगी, तो उसकी उपयोगिता धीरे-धीरे कम होती जाएगी।
वर्तमान व्यवस्था कैसे काम करती है?
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्र सरकार अपनी निर्धारित सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में जमा नहीं करती। इसके बजाय यह राशि संबंधित राज्य सरकार को जारी की जाती है।
इसके बाद राज्य सरकार अपनी ओर से निर्धारित अतिरिक्त राशि जोड़ती है और पूरी पेंशन लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित करती है।
यानी अंतिम पेंशन राशि में केंद्र और राज्य दोनों का योगदान शामिल होता है। विभिन्न राज्यों में राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली अतिरिक्त राशि अलग-अलग हो सकती है।
क्या केंद्र सरकार करेगी राशि में संशोधन?
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने औपचारिक रूप से केंद्रीय सहायता राशि बढ़ाने का अनुरोध किया है और उम्मीद जताई है कि इस पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।
यदि भविष्य में केंद्र सरकार राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लेती है, तो इसका लाभ केवल हिमाचल प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर के लाखों पात्र वरिष्ठ नागरिकों को मिल सकता है।
हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की नीति, वित्तीय उपलब्धता और बजटीय प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि वरिष्ठ नागरिक समाज का महत्वपूर्ण वर्ग हैं और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार लगातार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने के प्रयास कर रही है।
केंद्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य यह है कि वर्षों से स्थिर पड़ी केंद्रीय सहायता राशि की समीक्षा की जाए और वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप उसमें उचित संशोधन किया जाए। सरकार का मानना है कि इससे वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर आर्थिक सहारा मिलेगा और राज्यों पर बढ़ रहे वित्तीय दबाव में भी कमी आएगी।
फिलहाल इस प्रस्ताव पर सभी की नजर केंद्र सरकार के निर्णय पर टिकी हुई है। यदि केंद्रीय सहायता राशि में वृद्धि को मंजूरी मिलती है, तो यह सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है तथा देशभर के लाखों आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।




