हरियाणा में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क को मिलेगी नई रफ्तार, 2,534 करोड़ की 712 विकास योजनाओं को सरकार की हरी झंडी

हरियाणा में पेयजल और सीवरेज नेटवर्क को मिलेगी नई रफ्तार, 2,534 करोड़ की 712 विकास योजनाओं को सरकार की हरी झंडी

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य में पेयजल आपूर्ति, सीवरेज व्यवस्था और वर्षा जल निकासी प्रणाली को अधिक आधुनिक, प्रभावी और टिकाऊ बनाने की दिशा में बड़ा निवेश करने का फैसला लिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 2,534.39 करोड़ रुपये की लागत वाली 712 विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बुनियादी जल सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे लाखों लोगों को बेहतर पेयजल और स्वच्छता सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने बताया कि ये सभी प्रस्ताव हरियाणा जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (WSSB) की 59वीं बैठक में स्वीकृत किए गए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नई परियोजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि राज्य के प्रत्येक नागरिक तक सुरक्षित पेयजल और बेहतर सीवरेज व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

ग्रामीण क्षेत्रों पर सबसे अधिक फोकस

स्वीकृत 712 परियोजनाओं में से 603 योजनाएं ग्रामीण इलाकों से जुड़ी हैं। सरकार का मानना है कि गांवों में बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जलापूर्ति और सीवरेज ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण जल योजनाओं पर सबसे अधिक बजट आवंटित किया गया है।

इन परियोजनाओं के तहत नए ट्यूबवेल लगाए जाएंगे, नहर आधारित जलघरों का निर्माण और आधुनिकीकरण होगा, बूस्टिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी तथा जर्जर पाइपलाइन को बदलकर आधुनिक नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

शहरों में पेयजल व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों की जरूरतों को देखते हुए सरकार ने 603.32 करोड़ रुपये की लागत से 69 शहरी जलापूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

इन योजनाओं का लाभ मुख्य रूप से बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी और कुरुक्षेत्र जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहरों को मिलेगा। नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद इन क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति अधिक नियमित और सुचारु होने की उम्मीद है।

सरकार का उद्देश्य भविष्य की आबादी और औद्योगिक विकास को ध्यान में रखते हुए जलापूर्ति प्रणाली को पहले से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि आने वाले वर्षों में भी पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।

सीवरेज नेटवर्क का होगा विस्तार

केवल पेयजल ही नहीं, बल्कि सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने पर भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। 526.49 करोड़ रुपये की लागत से 18 नई शहरी सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

इन योजनाओं से बहादुरगढ़, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, जगाधरी और रोहतक जैसे शहरों में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार होगा। आधुनिक सीवरेज व्यवस्था से जलभराव, गंदे पानी की निकासी और स्वच्छता संबंधी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद है।

बरसाती पानी की निकासी पर भी विशेष ध्यान

मानसून के दौरान कई शहरों में जलभराव की समस्या को देखते हुए सरकार ने वर्षा जल निकासी परियोजनाओं को भी प्राथमिकता दी है। 19.11 करोड़ रुपये की लागत से ऐलनाबाद और बवानीखेड़ा के लिए दो नई ड्रेनेज परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।

इन योजनाओं के पूरा होने के बाद भारी बारिश के दौरान सड़कों और रिहायशी इलाकों में जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।

ग्रामीण जल योजनाओं में होगा बड़ा निवेश

ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने 1,108.28 करोड़ रुपये की लागत से 603 जलापूर्ति संवर्धन एवं सुधार योजनाओं को मंजूरी दी है।

इन परियोजनाओं के तहत—

  • नए नलकूप स्थापित किए जाएंगे।
  • नहर आधारित जलघर बनाए और अपग्रेड किए जाएंगे।
  • आधुनिक बूस्टिंग स्टेशन विकसित होंगे।
  • नई वितरण पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
  • पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को बदला जाएगा।
  • जलापूर्ति नेटवर्क का विस्तार उन गांवों तक किया जाएगा जहां अभी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था में भी व्यापक सुधार होगा।

महाग्राम परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

ग्रामीण सीवरेज और जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने महाग्राम परियोजनाओं पर भी विशेष निवेश किया है।

203.58 करोड़ रुपये की लागत से 13 महाग्राम सीवरेज परियोजनाओं तथा 71.58 करोड़ रुपये की लागत से तीन महाग्राम जलापूर्ति परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।

इन योजनाओं के दायरे में उजीना, बबैन, रामशरण माजरा, उमरी और टिकली समूह सहित कई गांव शामिल हैं। इसके अलावा ग्रामीण बस्तियों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए दो अतिरिक्त परियोजनाओं के लिए भी अलग से बजट मंजूर किया गया है।

मुख्यमंत्री ने दिए समयबद्ध कार्य पूरे करने के निर्देश

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वीकृत परियोजनाओं का निर्माण तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। इसके साथ ही विभागीय परिसरों में सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग को बढ़ावा देने और जल शुल्क संग्रह प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया है।

सरकार ने शहरी क्षेत्रों में जल कनेक्शनों का दायरा बढ़ाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। वर्तमान में जहां लगभग 90 प्रतिशत शहरी घरों तक जल कनेक्शन उपलब्ध हैं, वहीं 31 मार्च 2027 तक इसे बढ़ाकर 93 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जलापूर्ति, सीवरेज और ड्रेनेज परियोजनाओं को मंजूरी मिलना हरियाणा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इन योजनाओं के पूरा होने से शहरों और गांवों दोनों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी, सीवरेज नेटवर्क का विस्तार होगा, जलभराव की समस्याओं में कमी आएगी और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी बढ़ावा मिलेगा।

सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश में आधुनिक जल अवसंरचना विकसित करने के साथ-साथ नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और विश्वसनीय जल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस प्रगति सुनिश्चित की जाएगी।