भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज से पटरी पर, 25 रुपये में कर सकेंगे सफर; जींद-सोनीपत रूट पर शुरू होगी नियमित सेवा

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज से पटरी पर, 25 रुपये में कर सकेंगे सफर; जींद-सोनीपत रूट पर शुरू होगी नियमित सेवा

जींद: भारतीय रेलवे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन आधारित यात्री ट्रेन का नियमित संचालन शुरू करने जा रहा है। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा के जींद से इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। उद्घाटन के बाद यह ट्रेन नियमित यात्री सेवा के रूप में संचालित होगी और जींद तथा सोनीपत के बीच यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और किफायती रेल सुविधा उपलब्ध कराएगी।

भारतीय रेलवे पिछले कई वर्षों से अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण, ऊर्जा दक्ष रेलवे स्टेशन, सौर ऊर्जा परियोजनाएं और आधुनिक इंजनों के बाद अब हाइड्रोजन तकनीक को रेलवे परिचालन में शामिल करना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल नई तकनीक का प्रदर्शन करना नहीं बल्कि भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल परिवहन का मजबूत आधार तैयार करना भी है।

उद्घाटन के बाद आम यात्रियों के लिए भी उपलब्ध होगी सेवा

रेलवे अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन किए जाने के बाद वापसी यात्रा में सोनीपत से जींद आने वाली ट्रेन में सामान्य यात्री भी टिकट लेकर सफर कर सकेंगे। इस ट्रेन का संचालन सामान्य पैसेंजर सेवा की तरह किया जाएगा ताकि स्थानीय लोगों को भी इस नई तकनीक का सीधा लाभ मिल सके।

सबसे खास बात यह है कि पूरे 89 किलोमीटर लंबे सफर का अधिकतम किराया केवल 25 रुपये निर्धारित किया गया है। कम किराया होने के कारण यह सेवा दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, किसानों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती चरण में किराया सामान्य यात्रियों को ध्यान में रखकर तय किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इस नई सेवा का लाभ उठा सकें। भविष्य में यात्रियों की संख्या और परिचालन अनुभव के आधार पर आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे औपचारिक शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे जींद से इस ट्रेन को औपचारिक रूप से रवाना करेंगे। कार्यक्रम में रेलवे मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और आमंत्रित अतिथि भी मौजूद रहेंगे।

रेलवे प्रशासन के अनुसार उद्घाटन समारोह को विशेष रूप से तैयार किया गया है ताकि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना का व्यापक प्रदर्शन किया जा सके। इस दौरान रेलवे की हरित ऊर्जा नीति, भविष्य की योजनाओं और आधुनिक तकनीक पर भी जानकारी साझा किए जाने की संभावना है।

यह कार्यक्रम भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार हाइड्रोजन आधारित ट्रेन नियमित यात्री सेवा का हिस्सा बनने जा रही है।

उद्घाटन यात्रा में शामिल होंगे एक हजार विद्यार्थी

विशेष उद्घाटन यात्रा में ट्रेन की दो बोगियां रेलवे अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा विशिष्ट अतिथियों के लिए आरक्षित रखी गई हैं। बाकी डिब्बों में विभिन्न रेलवे स्टेशनों से चुने गए लगभग एक हजार विद्यार्थियों को यात्रा करने का अवसर दिया जाएगा।

रेलवे का उद्देश्य केवल नई ट्रेन का उद्घाटन करना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक परिवहन तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के बारे में जागरूक करना भी है। यात्रा के दौरान छात्रों को हाइड्रोजन ईंधन तकनीक, ऊर्जा संरक्षण और रेलवे के आधुनिकीकरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

रेलवे अधिकारियों का मानना है कि नई पीढ़ी को हरित तकनीकों से जोड़ना भविष्य की आवश्यकता है और इसी सोच के तहत विद्यार्थियों को उद्घाटन यात्रा का हिस्सा बनाया गया है।

इन स्टेशनों से चुने गए हैं छात्र

रेलवे के अनुसार उद्घाटन यात्रा के लिए विद्यार्थियों का चयन विभिन्न स्टेशनों से किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से पांडु पिंडारा, गोहाना, लाठ, मोहाना और सोनीपत स्टेशन शामिल हैं।

प्रत्येक चयनित स्टेशन से लगभग 200 विद्यार्थियों को यात्रा में शामिल किया जाएगा। इससे अलग-अलग क्षेत्रों के छात्र इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन सकेंगे और उन्हें आधुनिक रेलवे तकनीक को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।

नियमित समय-सारिणी क्या होगी

रेलवे ने इस नई सेवा की समय-सारिणी भी जारी कर दी है।

प्रतिदिन सुबह 7:40 बजे ट्रेन जींद जंक्शन से रवाना होगी और लगभग दो घंटे की यात्रा के बाद सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी।

वापसी में ट्रेन सुबह 10:30 बजे सोनीपत से चलेगी और दोपहर लगभग 1:00 बजे जींद पहुंचेगी।

फिलहाल रेलवे ने इस ट्रेन का संचालन सप्ताह में छह दिन करने का निर्णय लिया है। रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण के लिए सप्ताह में एक दिन सेवा बंद रखी जा सकती है।

रेलवे का कहना है कि शुरुआती चरण में परिचालन अनुभव, यात्रियों की संख्या और तकनीकी प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर भविष्य में समय-सारिणी और सेवाओं का विस्तार किया जा सकता है।

कुल 14 स्टेशनों को जोड़ेगी नई सेवा

यह हाइड्रोजन ट्रेन अपने पूरे मार्ग में कुल 14 रेलवे स्टेशनों को जोड़ेगी।

मार्ग इस प्रकार होगा—

  • जींद जंक्शन
  • जींद सिटी
  • पांडु पिंडारा
  • ललित खेड़ा
  • भंभेवा
  • ईशापुर खेड़ी
  • बुटाना
  • खंदराई
  • गोहाना
  • रभड़ा
  • लाठ
  • मोहाना
  • बड़वासनी
  • सोनीपत जंक्शन

वापसी यात्रा में भी यही सभी स्टेशन शामिल रहेंगे।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस सेवा से इन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों यात्रियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। विशेष रूप से नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी, छोटे व्यापारी और दैनिक यात्रा करने वाले नागरिक कम लागत में बेहतर रेल सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।

क्षेत्रीय कनेक्टिविटी होगी मजबूत

जींद और सोनीपत के बीच प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा, व्यवसाय और अन्य कार्यों के लिए यात्रा करते हैं। रेलवे का मानना है कि नई ट्रेन सेवा से क्षेत्रीय संपर्क पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगा।

बेहतर सार्वजनिक परिवहन मिलने से सड़क मार्ग पर निर्भरता भी कुछ हद तक कम हो सकती है। इससे यातायात का दबाव घटने और ईंधन की बचत होने की भी संभावना जताई जा रही है।

स्थानीय व्यापारियों का भी मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से बाजारों के बीच आवागमन आसान होगा और छोटे व्यवसायों को लाभ मिल सकता है।

अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा

रेलवे ने इस ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है।

हालांकि यह हाई-स्पीड ट्रेन नहीं होगी, लेकिन इसका उद्देश्य सुरक्षित, नियमित और पर्यावरण अनुकूल यात्री सेवा उपलब्ध कराना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में सुरक्षा और तकनीकी स्थिरता को प्राथमिकता दी गई है।

हाइड्रोजन तकनीक के सफल संचालन के बाद भविष्य में इसकी क्षमता और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जाएगा।

हाइड्रोजन ट्रेन कैसे करती है काम

हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन से अलग तकनीक पर आधारित होती है।

इसमें हाइड्रोजन गैस को विशेष फ्यूल सेल प्रणाली के माध्यम से बिजली में परिवर्तित किया जाता है। यही बिजली ट्रेन के मोटरों को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कार्बन उत्सर्जन लगभग नगण्य होता है।

फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस प्रक्रिया का मुख्य उप-उत्पाद पानी और जलवाष्प होता है, इसलिए इसे पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित माना जाता है।

यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन आधारित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

भारतीय रेलवे के हरित ऊर्जा मिशन का हिस्सा

भारतीय रेलवे ने आगामी वर्षों में अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

रेलवे पहले ही अधिकांश प्रमुख मार्गों का विद्युतीकरण कर चुका है। इसके अलावा रेलवे स्टेशनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र, ऊर्जा दक्ष प्रकाश व्यवस्था, जल संरक्षण प्रणाली और आधुनिक तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।

हाइड्रोजन ट्रेन को इसी हरित ऊर्जा अभियान का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। रेलवे का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के उपयोग से भविष्य में परिचालन लागत, प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जा सकती है।

हरियाणा को मिलेगा विशेष लाभ

देश की पहली नियमित हाइड्रोजन ट्रेन सेवा हरियाणा से शुरू होने के कारण इस परियोजना का राज्य के लिए भी विशेष महत्व माना जा रहा है।

जींद और सोनीपत के बीच रहने वाले हजारों यात्रियों को आधुनिक रेल सुविधा मिलने के साथ-साथ राज्य को स्वच्छ परिवहन तकनीक अपनाने वाले अग्रणी क्षेत्रों में भी शामिल किया जाएगा।

राज्य के औद्योगिक, शैक्षणिक और कृषि क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा भविष्य में पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

सुरक्षा के व्यापक इंतजाम

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।

सोनीपत पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में अस्थायी रूप से ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। कार्यक्रम स्थल, रेलवे स्टेशन, प्रमुख मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी), हरियाणा पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी। रेलवे स्टेशनों पर निगरानी कैमरे, कंट्रोल रूम, सुरक्षा जांच और विशेष गश्त की व्यवस्था भी की गई है।

यात्रियों के लिए रेलवे की सलाह

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे उद्घाटन समारोह के दौरान जारी सुरक्षा और यातायात संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

कार्यक्रम के कारण कुछ समय के लिए स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आवाजाही नियंत्रित की जा सकती है। यात्रियों को निर्धारित समय से पहले स्टेशन पहुंचने और सुरक्षा जांच में सहयोग करने की सलाह दी गई है।

रेलवे का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था यात्रियों की सुविधा और कार्यक्रम के सुचारु संचालन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

भविष्य में अन्य रेल मार्गों पर भी हो सकता है विस्तार

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जींद-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में देश के अन्य चयनित रेल मार्गों पर भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है।

हाइड्रोजन आधारित ट्रेनें उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही हैं जहां पूर्ण विद्युतीकरण अभी संभव नहीं है या जहां स्वच्छ ऊर्जा आधारित वैकल्पिक परिवहन विकसित करने की आवश्यकता है।

भारतीय रेलवे का मानना है कि आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और यात्री सुविधा को साथ लेकर आगे बढ़ना भविष्य की परिवहन नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। जींद से शुरू होने वाली यह सेवा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जो आने वाले समय में भारत के रेल नेटवर्क में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को नई पहचान देने की क्षमता रखती है।