पंजाब कांग्रेस ने चुनावी मोड किया ऑन, भूपेश बघेल की अहम बैठक आज; संगठन से लेकर रणनीति तक हर मुद्दे पर होगी चर्चा

पंजाब कांग्रेस ने चुनावी मोड किया ऑन, भूपेश बघेल की अहम बैठक आज; संगठन से लेकर रणनीति तक हर मुद्दे पर होगी चर्चा

पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों को तेज करते हुए कांग्रेस ने एक बार फिर संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी ला दी है। पिछले कुछ सप्ताह से प्रदेश नेतृत्व और संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर पार्टी के भीतर चली खींचतान के बाद अब कांग्रेस हाईकमान चुनावी तैयारियों को पटरी पर लाने की कोशिश में जुट गया है। इसी कड़ी में पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल ने मंगलवार शाम प्रदेश चुनाव समिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि यह बैठक केवल औपचारिक नहीं होगी, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति, संगठन की मजबूती, चुनावी अभियान और विभिन्न समितियों की कार्ययोजना तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

दिल्ली में शाम छह बजे प्रस्तावित इस बैठक पर राजनीतिक हलकों की खास नजर बनी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह हाल ही में पंजाब कांग्रेस के भीतर सामने आई गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर चला विवाद है। हालांकि कांग्रेस हाईकमान ने हस्तक्षेप कर फिलहाल विवाद को शांत कर दिया है, लेकिन यह बैठक इस बात का संकेत दे सकती है कि पार्टी अब चुनावी तैयारी को किस दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है।

दरअसल, कांग्रेस ने हाल ही में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विभिन्न समितियों का गठन किया था। इन समितियों में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति (कैंपेन कमेटी) का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया गया। इसी निर्णय के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया था।

चन्नी समर्थक नेताओं ने राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध किया था। उनका तर्क था कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में नेतृत्व परिवर्तन होना चाहिए। कुछ नेताओं ने यह मांग भी उठाई कि पार्टी आगामी चुनाव में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करे। इस मुद्दे पर बयानबाजी इतनी बढ़ गई थी कि चन्नी ने सार्वजनिक तौर पर चुनाव समिति की जिम्मेदारी निभाने को लेकर भी असहमति जताई थी।

पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ा दी थी। इसके बाद पंजाब मामलों के प्रभारी भूपेश बघेल लगातार पांच दिनों तक पंजाब में डटे रहे और उन्होंने विभिन्न नेताओं से अलग-अलग मुलाकात कर विवाद सुलझाने की कोशिश की। शुरुआती दौर में चन्नी खेमा बघेल से मिलने के लिए भी तैयार नहीं था। बाद में अपनी शर्तों पर बातचीत के लिए सहमति बनी और कई दौर की चर्चाओं के बाद स्थिति सामान्य होने लगी।

इसके बाद दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की मौजूदगी में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें हुईं। इन बैठकों में पंजाब कांग्रेस के भविष्य और चुनावी रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों के अनुसार हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश अध्यक्ष के पद पर किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ही पार्टी की कमान संभालते रहेंगे।

हाईकमान के इस स्पष्ट संदेश के बाद चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थकों ने भी सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले को स्वीकार करने की बात कही। दिल्ली में मौजूद चन्नी ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि पार्टी में सब कुछ ठीक है और सभी नेता मिलकर चुनाव की तैयारी करेंगे। इसके बाद माना गया कि फिलहाल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद थम गया है।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मंगलवार को होने वाली बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगी कि इसमें यह साफ हो जाएगा कि चन्नी खेमा पार्टी की नई रणनीति के साथ किस तरह आगे बढ़ता है। बैठक में चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की सक्रिय भागीदारी पर सभी की नजर रहेगी। यदि सभी नेता एकजुट होकर बैठक में शामिल होते हैं तो यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस ने अपने अंदरूनी मतभेद काफी हद तक सुलझा लिए हैं।

सूत्रों के अनुसार बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा। पार्टी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, जिला और ब्लॉक इकाइयों को सक्रिय करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और विभिन्न जनसंपर्क अभियानों की रूपरेखा पर चर्चा करेगी। इसके अलावा आगामी महीनों में प्रस्तावित रैलियों, जनसभाओं और संगठनात्मक कार्यक्रमों की भी समीक्षा की जाएगी।

बैठक में चुनाव प्रचार की रणनीति, सोशल मीडिया अभियान, जनसंपर्क कार्यक्रम, युवाओं और महिलाओं तक पहुंच बनाने की योजना तथा पार्टी के घोषणा पत्र से जुड़े सुझावों पर भी विचार किया जा सकता है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि चुनावी तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं ताकि विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले पार्टी पूरी तरह सक्रिय नजर आए।

पार्टी सूत्रों के अनुसार चुनाव प्रबंधन समिति, कोऑर्डिनेशन कमेटी और घोषणा पत्र समिति को भी अपनी-अपनी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। साथ ही सभी नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ नियमित बैठकें करने के लिए भी कहा जा सकता है।

बैठक में पंजाब कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे। इनमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी, इलेक्शन मैनेजमेंट एंड कोऑर्डिनेशन कमेटी की अध्यक्ष विजय इंदर सिंगला, कोर कमेटी के अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा, घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष डॉ. अमर सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष सुखविंदर सिंह डैनी, राज कुमार वेरका, संगत सिंह गिलजियां, अभियान समिति के सह-अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैहरा, राणा गुरजीत सिंह और डॉ. धर्मवीर गांधी शामिल होंगे।

इसके अलावा इलेक्शन मैनेजमेंट एंड कोऑर्डिनेशन कमेटी के सह-अध्यक्ष ओपी सोनी, रजिया सुल्ताना, कुलजीत सिंह नागरा, अंगद सिंह सैनी और भारत भूषण आशु भी बैठक में मौजूद रहेंगे। घोषणा पत्र समिति के सह-अध्यक्ष सांसद गुरजीत सिंह औजला, परगट सिंह, सुखबिंदर सिंह सुख सरकारिया और हरदयाल सिंह कंबोज भी बैठक में हिस्सा लेंगे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के लिए यह बैठक केवल चुनावी रणनीति तैयार करने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पार्टी की आंतरिक एकजुटता का भी अहम परीक्षण होगी। यदि सभी वरिष्ठ नेता साझा मंच पर एकजुट दिखाई देते हैं और चुनावी तैयारियों को लेकर एकमत नजर आते हैं, तो इससे कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश जाएगा। वहीं यदि मतभेद दोबारा सार्वजनिक होते हैं तो विपक्ष को कांग्रेस पर हमला करने का नया मौका मिल सकता है।

आने वाले विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में पार्टी हाईकमान किसी भी तरह की अंदरूनी खींचतान को पीछे छोड़कर संगठन को चुनावी मोड में लाना चाहता है। यही वजह है कि भूपेश बघेल की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक पंजाब कांग्रेस के लिए आगामी राजनीतिक दिशा तय करने वाली सबसे अहम बैठकों में से एक मानी जा रही है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि कांग्रेस चुनावी मैदान में पूरी एकजुटता के साथ उतरने में कितनी सफल होती है और पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे को किस तरह मजबूत कर आगे बढ़ती है।