करीब एक महीने से अधिक समय तक देशभर में चर्चा का विषय बना जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया। शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आधिकारिक तौर पर धरना खत्म करने की घोषणा की, जिसके बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद हजारों छात्र और समर्थक धीरे-धीरे अपने-अपने घरों के लिए रवाना होने लगे। लंबे समय से लगे टेंट, मंच, बैनर, पोस्टर और लाउडस्पीकर हटाने का काम शुरू कर दिया गया। आंदोलन खत्म होने के बाद प्रशासन और स्थानीय निकायों ने पूरे इलाके को पहले की तरह व्यवस्थित करने के लिए सफाई अभियान भी चलाया। कई दिनों तक आंदोलन का केंद्र बने जंतर-मंतर का माहौल अब सामान्य होता दिखाई दे रहा है।
यह आंदोलन 20 जून को शुरू हुआ था। इसकी मुख्य वजह मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का बढ़ता असंतोष था। आंदोलन के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र दिल्ली पहुंचे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाते रहे। कई दिनों तक धरना स्थल पर भाषण, चर्चाएं, नारेबाजी और विभिन्न संगठनों की बैठकें होती रहीं, जिससे जंतर-मंतर लगातार सुर्खियों में बना रहा।
शनिवार को आंदोलन समाप्त करने का फैसला उस समय सामने आया जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP नेतृत्व ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में से एक पूरी हो चुकी है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने का आश्वासन दिया गया है। इन घटनाक्रमों के बाद संगठन ने प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय लिया और मंच से इसकी औपचारिक घोषणा की।
घोषणा होते ही धरना स्थल पर गतिविधियां बदल गईं। जहां पिछले कई सप्ताह से भाषणों और नारों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब टेंट उखाड़े जाने लगे। स्वयंसेवकों और आयोजकों ने मंच को हटाया, पोस्टर समेटे और ध्वनि व्यवस्था को भी बंद कर दिया। प्रदर्शनकारी एक-दूसरे से विदा लेकर अपने-अपने राज्यों के लिए रवाना होते नजर आए। कई छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन समाप्त जरूर हुआ है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग आगे भी जारी रहेगी।
धरना खत्म होने के बाद नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र में सफाई अभियान शुरू किया। छात्रों और स्वयंसेवकों ने भी सफाई अभियान में हिस्सा लिया। धरना स्थल पर जमा प्लास्टिक की बोतलें, बैनर, पोस्टर, कागज और अन्य कचरे को एकत्र कर हटाया गया। प्रशासन का कहना है कि जंतर-मंतर को जल्द से जल्द पूरी तरह सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास किया गया ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आंदोलन के दौरान सुरक्षा कारणों से राजधानी के कई हिस्सों में विशेष इंतजाम किए गए थे। संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। जगह-जगह बैरिकेड्स लगाए गए थे और यातायात पर भी प्रभाव पड़ा था। अब आंदोलन समाप्त होने के बाद अधिकांश बैरिकेड्स हटाकर सड़क किनारे कर दिए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस ने भी धीरे-धीरे यातायात व्यवस्था को सामान्य करना शुरू कर दिया है, जिससे लोगों को राहत मिली है।
दिल्ली पुलिस की मौजूदगी अभी भी जंतर-मंतर और उसके आसपास बनी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि एहतियात के तौर पर कुछ समय तक सुरक्षा बल तैनात रहेंगे ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। हालांकि माहौल पूरी तरह शांत है और कहीं से भी किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
प्रदर्शन के कारण पिछले दिनों केंद्रीय दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर भी असर पड़ा था। सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा सीमित कर दी गई थी। आंदोलन खत्म होने के बाद अब इन सेवाओं को फिर से बहाल कर दिया गया है। इससे स्थानीय लोगों, व्यापारियों और कार्यालयों में कामकाज दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो गया है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने भी आंदोलन समाप्त होने के बाद केंद्रीय दिल्ली के सभी 18 मेट्रो स्टेशनों को फिर से पूरी तरह खोल दिया है। आंदोलन के दौरान सुरक्षा कारणों से कई स्टेशनों पर प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध लगाए गए थे, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। अब मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं और यात्रियों को पहले जैसी सुविधा मिलने लगी है।
करीब 36 दिनों तक चले इस आंदोलन ने केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी। NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी थी। सोशल मीडिया पर आंदोलन से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और बयान लगातार वायरल होते रहे। कई शिक्षा विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी परीक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत पर अपने विचार रखे।
धरना स्थल पर हर दिन बड़ी संख्या में छात्र पहुंचते रहे। यहां विभिन्न राज्यों से आए युवाओं ने अपने अनुभव साझा किए और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग दोहराई। कई छात्र संगठनों ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया। इसके चलते जंतर-मंतर कई सप्ताह तक राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा।
प्रशासन के अनुसार आंदोलन के दौरान सुरक्षा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। भारी भीड़, लगातार कार्यक्रम और राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। कई मार्गों पर यातायात को डायवर्ट किया गया था ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। अब हालात सामान्य होने के साथ ही इन अस्थायी व्यवस्थाओं को भी धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।
व्यापारियों और स्थानीय निवासियों ने भी सामान्य स्थिति लौटने पर राहत जताई है। उनका कहना है कि पिछले कई दिनों से सुरक्षा प्रतिबंधों और ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव के कारण कारोबार प्रभावित हो रहा था। अब सड़कें खुलने, इंटरनेट सेवा बहाल होने और मेट्रो स्टेशनों के सामान्य संचालन से स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।
हालांकि आंदोलन समाप्त हो चुका है, लेकिन इससे जुड़े मुद्दे अभी भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग लगातार उठ रही है। कई छात्रों का कहना है कि वे सरकार की ओर से किए गए वादों के क्रियान्वयन पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर आगे भी अपनी आवाज उठाएंगे।
जंतर-मंतर अब फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौटता दिखाई दे रहा है। जहां कुछ दिन पहले तक हजारों लोगों की भीड़, मंच, पोस्टर और नारे गूंज रहे थे, वहीं अब सफाई के बाद सामान्य गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। राजधानी में यातायात, मेट्रो और अन्य सार्वजनिक सेवाएं भी पहले की तरह संचालित होने लगी हैं। हालांकि इस लंबे आंदोलन ने शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया और छात्रों की अपेक्षाओं को लेकर देशभर में एक व्यापक बहस जरूर छोड़ दी है, जिसके प्रभाव आने वाले समय में भी महसूस किए जा सकते हैं।




