देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। संसद के मानसून सत्र में प्रस्तुत सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग ठाकुर ने सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कानून केवल एक संशोधन नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए तैयार किया गया मजबूत कानूनी ढांचा है।
लोकसभा में विधेयक का समर्थन करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और संगठित नकल गिरोहों ने लाखों प्रतिभाशाली छात्रों के सपनों को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे मामलों से न केवल युवाओं का मनोबल टूटता है, बल्कि सरकारी भर्ती व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि नया संशोधन कानून इस पूरे नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए पहले से कहीं अधिक प्रभावी व्यवस्था प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी है। इसलिए संशोधन विधेयक में जांच प्रक्रिया को अधिक तेज, जवाबदेह और समयबद्ध बनाया गया है। इसके साथ ही अपराध की गंभीरता को देखते हुए सजा के प्रावधान भी पहले की तुलना में अधिक कठोर किए गए हैं।
अनुराग ठाकुर ने अपने संबोधन में विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय तक देश में परीक्षा प्रणाली में खामियां बनी रहीं, लेकिन उस समय इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रहीं, लेकिन इस दिशा में मजबूत कानूनी ढांचा तैयार नहीं किया गया। इसके विपरीत वर्तमान सरकार ने पहले 2024 में कानून बनाया और अब उसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संशोधन लेकर आई है।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए। उनके अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र किसी दल या विचारधारा के नहीं होते, बल्कि पूरे देश का भविष्य होते हैं। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों के हित में इस विधेयक का समर्थन करें और परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष बनाने में सहयोग दें।
सांसद ने कहा कि पेपर लीक केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह देश की प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के विश्वास पर सीधा हमला है। उन्होंने इसे राष्ट्र के भविष्य के खिलाफ अपराध बताते हुए कहा कि जिस प्रकार आतंकवाद और संगठित अपराध समाज को नुकसान पहुंचाते हैं, उसी तरह पेपर लीक का संगठित नेटवर्क भी प्रतिभा और ईमानदारी पर आधारित व्यवस्था को कमजोर करता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करता है और परीक्षा से ठीक पहले या परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक हो जाता है, तो सबसे अधिक नुकसान उस मेहनती और ईमानदार अभ्यर्थी का होता है। इससे योग्य उम्मीदवारों का विश्वास टूटता है और पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ जाती है। इसलिए इस तरह के अपराधों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
अनुराग ठाकुर ने कहा कि संशोधन विधेयक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल पेपर लीक करने वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि किसी एजेंसी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इससे परीक्षा संचालन करने वाले संस्थानों पर भी पारदर्शिता और जवाबदेही का दबाव बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार चाहती है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े हर स्तर पर जिम्मेदारी तय हो। प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसकी सुरक्षा, वितरण, परीक्षा संचालन और परिणाम घोषित करने तक हर चरण में जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी।
अपने संबोधन के दौरान अनुराग ठाकुर ने शिक्षा क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा किए गए विभिन्न सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक विस्तार हुआ है। देशभर में नए कॉलेज, विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), ट्रिपल आईटी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें प्रवेश और भर्ती की पूरी प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। यदि परीक्षा प्रणाली ही अविश्वसनीय हो जाएगी तो शिक्षा सुधारों का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। इसलिए सरकार समानांतर रूप से परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर भी काम कर रही है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उल्लेख करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस नीति का मूल उद्देश्य भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है। नई शिक्षा नीति छात्रों में नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देती है। लेकिन इन सभी प्रयासों की सफलता तभी संभव है जब प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर लोगों का भरोसा कायम रहे।
उन्होंने कहा कि सरकार की सोच केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी, बेहतर परीक्षा प्रबंधन और मजबूत कानूनी कार्रवाई के माध्यम से ऐसी प्रणाली तैयार की जा रही है, जिसमें परीक्षा माफिया के लिए काम करना बेहद कठिन हो जाए। उनका कहना था कि आने वाले समय में तकनीक आधारित निगरानी और संस्थागत सुधारों के जरिए परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।
इस बीच संसद में हिमाचल प्रदेश से सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े उद्यमियों के विकास का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से इस वर्ग के सूक्ष्म और लघु उद्यमों को प्रोत्साहन देने तथा सरकारी खरीद में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी।
सांसद के प्रश्न के उत्तर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति हब (एनएसएसएच) योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों में उद्यमिता को बढ़ावा देना और उन्हें स्वरोजगार तथा उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
राज्यमंत्री ने कहा कि सरकार की लोक खरीद नीति के तहत यह प्रावधान है कि सरकारी विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अपनी कुल वार्षिक खरीद का न्यूनतम चार प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों से करें। राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना का उद्देश्य इसी लक्ष्य को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहायता करना है।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत उद्यमियों को प्रशिक्षण, क्षमता विकास, तकनीकी परामर्श, बाजार से जुड़ाव, गुणवत्ता प्रमाणन, वित्तीय संस्थानों तक पहुंच और सरकारी निविदाओं में भागीदारी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग प्रदान किया जाता है। इससे सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलता है।
सरकार का मानना है कि आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से सामाजिक समानता को मजबूत किया जा सकता है। इसी सोच के तहत एससी और एसटी वर्ग के उद्यमियों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाने और नए उद्योग स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
संसद में हुई इन दोनों चर्चाओं से यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि केंद्र सरकार एक ओर शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन को मजबूत करने के लिए अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के उद्यमियों को भी सरकारी नीतियों के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) संशोधन विधेयक प्रभावी ढंग से लागू होता है तो इससे परीक्षा माफिया के नेटवर्क पर अंकुश लगाने, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और युवाओं का विश्वास बहाल करने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है। वहीं एससी-एसटी हब जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के उद्यमियों को भी आर्थिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर संसद में हुई यह चर्चा शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण—तीनों क्षेत्रों में सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है।


