चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के प्रस्तावित मानसून सत्र को लेकर सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष से शिष्टाचार मुलाकात की। राजभवन की ओर से इस बैठक के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी या एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मुलाकात को विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच सत्र बुलाने, उसकी संभावित तारीख और विधानसभा की कार्यवाही से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
माना जा रहा है कि राज्य सरकार इसी सप्ताह विधानसभा का मानसून सत्र बुलाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव राज्यपाल को भेज सकती है। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद सरकार की ओर से सत्र की तारीखों और कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। ऐसे में अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। मुख्यमंत्री और राज्यपाल की मुलाकात के बाद सत्र को लेकर चल रही अटकलों को भी काफी हद तक दिशा मिल गई है।
दरअसल, 28 जुलाई को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 22 महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा के बाद उन्हें मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट बैठक में कई प्रशासनिक और नीतिगत फैसले लिए गए, लेकिन विधानसभा के मानसून सत्र की तारीख पर अंतिम मुहर नहीं लगाई गई थी। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने संकेत जरूर दिए थे कि विधानसभा सत्र की तारीख जल्द तय की जाएगी। इसके बाद मंत्रिमंडल ने सत्र आयोजित करने की तारीख और कार्यक्रम तय करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया था।
अब मुख्यमंत्री द्वारा राज्यपाल से मुलाकात किए जाने के बाद माना जा रहा है कि सत्र बुलाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सरकार की ओर से राज्यपाल को प्रस्ताव भेजे जाने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी और इसके पश्चात विधानसभा सचिवालय की ओर से सत्र की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
हालांकि, 10 अगस्त से पहले विधानसभा की बैठकें शुरू होने की संभावना कम बताई जा रही है। इसका एक प्रमुख कारण चंडीगढ़ स्थित विधानसभा परिसर में मौजूद कुछ व्यवस्थाओं का पंजाब विधानसभा के साथ साझा होना है। विधानसभा परिसर में प्रेस लाउंज, पार्किंग, प्रवेश व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का इस्तेमाल दोनों राज्यों की विधानसभा की कार्यवाही के दौरान किया जाता है। पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र 10 अगस्त तक प्रस्तावित है। ऐसे में उससे पहले हरियाणा विधानसभा का सत्र शुरू करना प्रशासनिक और व्यवस्थागत दृष्टि से मुश्किल माना जा रहा है।
इसके अलावा स्वतंत्रता दिवस समारोह भी सत्र की तारीख तय करने में महत्वपूर्ण कारक है। 15 अगस्त को होने वाले स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों को लेकर सरकार के मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। ऐसे में 10 अगस्त के तुरंत बाद विधानसभा सत्र शुरू करना भी सरकार के लिए सुविधाजनक नहीं माना जा रहा। यही वजह है कि अब 20 अगस्त के बाद विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने की संभावना अधिक जताई जा रही है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार 21 अगस्त, शुक्रवार से हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत किए जाने पर विचार चल रहा है। हालांकि अभी इसे अंतिम तारीख नहीं माना जा सकता। राज्यपाल की मंजूरी, सरकार की अधिसूचना और विधानसभा सचिवालय की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सत्र की तारीख पर अंतिम मुहर लगेगी। इसके बाद सदन की बैठकों की संख्या और कार्यवाही का पूरा कार्यक्रम भी स्पष्ट होगा।
मानसून सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकार की ओर से विभिन्न विभागों से ऐसे विधेयकों, प्रस्तावों और मुद्दों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्हें सदन में रखा जाना है। वित्तीय और प्रशासनिक मामलों के अलावा जनहित से जुड़े विषयों को भी कार्यवाही में शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को सदन के माध्यम से सामने रख सकती है, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने की रणनीति तैयार कर रहा है।
विधानसभा का मानसून सत्र हरियाणा की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की ओर से विकास योजनाओं, प्रशासनिक फैसलों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का उल्लेख सदन में किया जा सकता है। वहीं विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दे मौजूद हैं। विपक्ष कानून-व्यवस्था, किसानों से जुड़े विषयों, बेरोजगारी, विकास कार्यों, महंगाई और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सरकार से जवाब मांग सकता है।
किसानों से जुड़े मुद्दे मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल रह सकते हैं। प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को देखते हुए सिंचाई, फसल, मंडियों, खरीद व्यवस्था, किसानों की आय और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों को लेकर विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। इसके अलावा ग्रामीण सड़कों, बिजली, पानी और सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की कमी जैसे स्थानीय मुद्दे भी सदन में उठने की संभावना है।
बेरोजगारी भी ऐसा विषय है, जिस पर विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर सकता है। विभिन्न विभागों में भर्ती, खाली पद, भर्ती प्रक्रिया, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा जा सकता है। विपक्ष यह जानने की कोशिश कर सकता है कि सरकार ने रोजगार के क्षेत्र में अब तक क्या कदम उठाए हैं और आने वाले समय में कितने पदों पर भर्ती की योजना है।
कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी सदन में राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है। विपक्ष विभिन्न जिलों में अपराध की घटनाओं और पुलिस व्यवस्था से जुड़े मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठा सकता है। सरकार की ओर से अपराध नियंत्रण, पुलिस आधुनिकीकरण और कानून-व्यवस्था को लेकर उठाए गए कदमों का ब्यौरा सदन में दिया जा सकता है।
विकास कार्यों की रफ्तार को लेकर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस होने की संभावना है। सड़क निर्माण, शहरी विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य संस्थानों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कार्यों को लेकर विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं उठा सकते हैं। मानसून के दौरान बारिश से प्रभावित सड़कों, जलभराव, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन से संबंधित मुद्दे भी विधानसभा में चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
सरकार के लिए सत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि उसे अपने विभिन्न फैसलों और नीतियों को सदन में राजनीतिक समर्थन के साथ प्रस्तुत करना होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को सामने रखते हुए यह संदेश देने की कोशिश कर सकती है कि प्रदेश में विकास और प्रशासनिक सुधारों को गति दी जा रही है। वहीं विपक्ष सरकार के दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाकर सदन में बहस को धार देने की तैयारी में है।
मंत्रिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री को सत्र की तारीख और कार्यक्रम तय करने के लिए अधिकृत किए जाने के बाद अब राज्यपाल की मंजूरी की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। मुख्यमंत्री की सोमवार को राज्यपाल से मुलाकात को इसी संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद राजभवन की मंजूरी मिलते ही विधानसभा सचिवालय को आगे की तैयारियों के लिए औपचारिक दिशा मिल जाएगी।
विधानसभा सत्र से पहले सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने विधायकों के साथ बैठकें भी कर सकते हैं। सत्ता पक्ष जहां सदन में उठाए जाने वाले विधायी और प्रशासनिक विषयों पर रणनीति तैयार करेगा, वहीं विपक्ष अपने सवालों और मुद्दों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेगा। विपक्षी दलों के विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को भी सदन में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर सकते हैं।
राजनीतिक रूप से देखें तो मानसून सत्र सरकार के लिए अपनी नीतियों का बचाव करने और उपलब्धियों को गिनाने का मंच होगा, जबकि विपक्ष के लिए यह सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने रखने का अवसर होगा। इसलिए सत्र शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।
फिलहाल 21 अगस्त से सत्र शुरू होने की संभावना सबसे ज्यादा बताई जा रही है, लेकिन तारीख को अंतिम तभी माना जाएगा जब राज्यपाल की मंजूरी के बाद सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि मानसून सत्र कितने दिनों तक चलेगा और किस दिन कौन-कौन से विधायी तथा वित्तीय कार्य सदन में रखे जाएंगे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की राज्यपाल से मुलाकात के बाद अब सरकार के अगले कदम पर निगाहें टिक गई हैं। यदि इसी सप्ताह राज्यपाल को प्रस्ताव भेज दिया जाता है और मंजूरी मिल जाती है, तो मानसून सत्र की तस्वीर जल्द साफ हो सकती है। 10 अगस्त तक पंजाब विधानसभा की कार्यवाही और 15 अगस्त के कार्यक्रमों के कारण बनी व्यवस्थागत परिस्थितियों को देखते हुए अगस्त के तीसरे सप्ताह में हरियाणा विधानसभा की बैठकें शुरू होने की संभावना बढ़ गई है।
आगामी मानसून सत्र में जहां सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी और प्रशासनिक प्रस्ताव सदन के सामने रख सकती है, वहीं विपक्ष किसानों, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, विकास और जनसुविधाओं जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा। ऐसे में इस बार हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम रहने के आसार हैं। राज्यपाल की मंजूरी और आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद अब सत्र की तारीख और कार्यवाही का पूरा खाका सामने आने का इंतजार है।



