चंडीगढ़। पंजाब में मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए चलाया गया स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान अब पूरा हो गया है। चुनाव आयोग की निगरानी में चले इस विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन किया। इस प्रक्रिया में मृतक मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों और स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर जा चुके मतदाताओं की पहचान की गई। अब इस पूरी कवायद के बाद राज्य की मतदाता सूची में व्यापक स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकता है।
SIR के दौरान पंजाब में कुल 2 करोड़ 14 लाख 61 हजार 43 मतदाताओं की मैपिंग पूरी की गई है। चुनाव कार्यालय के मुताबिक सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण भी पूरा कर लिया गया है। इस प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन और उन मतदाताओं को नोटिस जारी करना है, जिनकी प्रविष्टियों को सत्यापन की आवश्यकता है।
चुनाव कार्यालय के अनुसार SIR के दौरान करीब 12.95 लाख मतदाता ऐसे पाए गए हैं, जिनकी प्रविष्टियों को लेकर आगे सत्यापन की जरूरत है। प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के बाद इन लोगों को नोटिस भेजे जाएंगे। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर मिलेगा। इसका मतलब यह है कि इन सभी नामों को तत्काल मतदाता सूची से हटाया नहीं जाएगा, बल्कि संबंधित व्यक्ति को अपना रिकॉर्ड सही साबित करने का मौका दिया जाएगा।
मुख्य चुनाव अधिकारी अनिंदिता मित्रा ने स्पष्ट किया है कि SIR का उद्देश्य किसी भी पात्र नागरिक को उसके मतदान के अधिकार से वंचित करना नहीं है। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का मूल मकसद मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और विश्वसनीय बनाना है। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सत्यापन के दौरान किसी कारण से संदिग्ध श्रेणी में आता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।
पंजाब में SIR को लेकर शुरुआत से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी चर्चा रही है। पश्चिम बंगाल में SIR के बाद बड़ी संख्या में नामों के प्रभावित होने की खबरों के बीच पंजाब में भी लोगों के बीच यह आशंका बनी हुई थी कि कहीं बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से बाहर न हो जाएं। हालांकि पंजाब के चुनाव कार्यालय का कहना है कि राज्य में प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की गई है और अन्य राज्यों की तुलना में मृतक, स्थानांतरित या दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं का अनुपात अपेक्षाकृत कम रहा है।
SIR के दौरान सामने आए आंकड़ों के आधार पर राज्य में मतदान केंद्रों की संख्या में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पहले पंजाब में 24,453 मतदान केंद्र थे। पुनरीक्षण और मतदाता मैपिंग के बाद इनकी संख्या बढ़कर 25,332 हो जाएगी। यानी राज्य में 879 नए मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। नए बूथ बनाने का उद्देश्य मतदाताओं की संख्या और भौगोलिक स्थिति के अनुरूप मतदान व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाना बताया जा रहा है।
इसके साथ ही राज्य के करीब 25 प्रतिशत मतदान केंद्रों का पुनर्गठन भी किया गया है। इसका आधार संबंधित इलाकों में मतदाताओं की संख्या, उनकी भौगोलिक स्थिति और मतदान केंद्रों तक पहुंच से जुड़ी आवश्यकताएं रही हैं। चुनाव कार्यालय के अनुसार कुछ स्थानों पर मतदाताओं की संख्या बढ़ने के कारण नए बूथ की जरूरत महसूस हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में आबादी या मतदाताओं की संख्या कम होने के कारण मतदान केंद्रों की व्यवस्था में बदलाव किया गया।
चुनाव अधिकारियों के मुताबिक कुछ संस्थानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। रेल कोच फैक्टरी, थर्मल प्लांट और एनएफएल जैसे संस्थानों में कर्मचारियों और उनके परिवारों के स्थानांतरण के कारण संबंधित क्षेत्रों की मतदाता संख्या प्रभावित हुई है। ऐसे मामलों में पुराने मतदान केंद्रों की आवश्यकता कम होने पर उन्हें बंद किया गया या उनकी सीमाओं का पुनर्गठन किया गया है।
SIR के दौरान मृतक मतदाताओं की पहचान भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। चुनाव आयोग ने घर-घर सत्यापन के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की कि मतदाता सूची में दर्ज प्रत्येक व्यक्ति वास्तव में संबंधित पते पर मौजूद है या नहीं। इसके अलावा ऐसे लोगों की भी पहचान की गई जो स्थायी रूप से किसी दूसरे शहर या राज्य में चले गए हैं, लेकिन उनका नाम अभी भी पुराने पते की मतदाता सूची में दर्ज है।
इसी तरह एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होने की संभावित घटनाओं को भी जांच के दायरे में लिया गया। दोहरी प्रविष्टियों का पता लगने के बाद रिकॉर्ड का सत्यापन किया गया, ताकि एक व्यक्ति का नाम एक से अधिक मतदाता सूची में दर्ज न रहे। चुनाव आयोग के अनुसार इस तरह की कवायद चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
कुछ बड़े शहरी विधानसभा क्षेत्रों में मृतक, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों से संबंधित मामलों का प्रतिशत अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। लुधियाना, मोहाली, जालंधर, अमृतसर और पटियाला के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मामलों की पहचान करीब 15 प्रतिशत तक हुई। चुनाव कार्यालय के अनुसार इसके पीछे इन शहरों में आबादी का लगातार स्थानांतरण, रोजगार और शिक्षा के कारण लोगों का आना-जाना तथा शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या की तेजी से बदलती स्थिति जैसे कारण हो सकते हैं।
इसके विपरीत राज्य के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे मतदाताओं का अनुपात करीब 9.65 प्रतिशत रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि मतदाता सूची में बदलाव का स्तर विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक और भौगोलिक स्वरूप के अनुसार अलग-अलग रहा है।
कुछ जिलों में मतदाता सूची से संबंधित डिलीशन का अनुपात सबसे कम दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मानसा में यह दर 3.70 प्रतिशत रही। मालेरकोटला में 5.77 प्रतिशत और संगरूर में 5.84 प्रतिशत मतदाता प्रविष्टियां इस श्रेणी में आईं। इन आंकड़ों में मृतक, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके तथा दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं को शामिल किया गया है।
चुनाव आयोग के अनुसार इन आंकड़ों को सीधे तौर पर मतदाताओं के अधिकार खत्म होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। SIR के दौरान किसी प्रविष्टि के संदिग्ध पाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम अंतिम रूप से मतदाता सूची से हटा दिया गया है। जिन लोगों को नोटिस जारी किया जाएगा, उन्हें अपनी पात्रता साबित करने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने का मौका मिलेगा। इसके बाद ही संबंधित मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
यही कारण है कि चुनाव कार्यालय ने मतदाताओं से अपील की है कि वे प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अपने नाम की स्थिति जरूर जांचें। जिन लोगों को नोटिस मिलता है, उन्हें निर्धारित समयसीमा में जवाब दाखिल करना होगा। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज और पहचान से जुड़े प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे, ताकि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर उसे ठीक किया जा सके।
SIR की पूरी प्रक्रिया के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया गया। पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों में गणना प्रपत्रों का पूर्ण डिजिटलीकरण पूरा होने के बाद मतदाता डेटा को व्यवस्थित तरीके से अपडेट करने का रास्ता साफ हुआ है। डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए चुनाव अधिकारियों के लिए मतदाता सूची में संशोधन, नाम जोड़ने, हटाने और स्थानांतरण से जुड़े मामलों को संभालना अपेक्षाकृत आसान होगा।
पंजाब में 879 नए मतदान केंद्रों का गठन भी आगामी चुनावी तैयारियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ने से कई क्षेत्रों में मतदाताओं को पहले की तुलना में कम दूरी तय करनी पड़ सकती है। साथ ही जिन बूथों पर मतदाताओं की संख्या अधिक थी, वहां भीड़ कम करने और मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
करीब एक चौथाई मतदान केंद्रों का पुनर्गठन किए जाने के कारण आने वाले समय में मतदाताओं को अपने नए मतदान केंद्र की जानकारी भी रखनी होगी। चुनाव कार्यालय की ओर से अंतिम सूची और बूथों की जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बाद मतदाताओं को यह देखना होगा कि उनका नाम किस मतदान केंद्र के अंतर्गत आता है।
SIR के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण आपत्तियों और दावों की प्रक्रिया का होगा। करीब 12.95 लाख प्रविष्टियों को नोटिस जारी होने के बाद चुनाव विभाग के सामने बड़ी संख्या में दस्तावेजों की जांच की जिम्मेदारी होगी। संबंधित मतदाताओं के जवाब और दस्तावेजों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में रखा जाना है, संशोधित किया जाना है या नियमों के अनुसार हटाया जाना है।
चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और पारदर्शिता का पालन किया जाएगा। पात्र नागरिकों को पर्याप्त अवसर दिए जाने पर जोर रहेगा। अधिकारियों के अनुसार मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि को दूर करना और योग्य मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस बीच राजनीतिक दल भी SIR की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव का सीधा असर भविष्य की चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। इसलिए राजनीतिक दलों के बूथ स्तर के कार्यकर्ता भी अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची की जांच कर सकते हैं और अपने समर्थकों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने तथा दावे-आपत्तियां दाखिल करने के बारे में जानकारी दे सकते हैं।
पंजाब में SIR के पूरा होने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया का फोकस प्रारूप मतदाता सूची और उसके बाद आने वाली आपत्तियों पर रहेगा। अंतिम सूची जारी होने के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने नाम हटाए गए, कितने नए नाम जोड़े गए और कितने रिकॉर्ड में संशोधन किया गया।
कुल मिलाकर SIR ने पंजाब की मतदाता सूची को नए सिरे से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। 2.14 करोड़ से अधिक मतदाताओं की मैपिंग, 12.95 लाख प्रविष्टियों की आगे जांच, 879 नए मतदान केंद्रों का प्रस्ताव और करीब 25 प्रतिशत बूथों का पुनर्गठन इस अभियान के प्रमुख परिणाम हैं। अब चुनाव विभाग के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की है कि अंतिम मतदाता सूची तैयार करते समय न तो कोई अपात्र नाम बना रहे और न ही कोई पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार से वंचित हो।
चुनाव अधिकारियों ने साफ किया है कि SIR को केवल नाम हटाने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका व्यापक उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और चुनावी प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाना है। आने वाले चरण में नोटिस, दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंजाब की संशोधित मतदाता सूची सामने आएगी, जिससे राज्य के चुनावी नक्शे और मतदान केंद्रों की नई तस्वीर भी स्पष्ट हो जाएगी।




