ममदोट में भजनलाल शर्मा का पंजाब सरकार पर हमला, बोले- नशे के खिलाफ अब सिर्फ वादे नहीं, ठोस कार्रवाई जरूरी

ममदोट में भजनलाल शर्मा का पंजाब सरकार पर हमला, बोले- नशे के खिलाफ अब सिर्फ वादे नहीं, ठोस कार्रवाई जरूरी

पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर राजनीतिक घमासान के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को फिरोजपुर जिले के ममदोट में आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। पंजाब भाजपा की ओर से निकाली जा रही ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए शर्मा ने आरोप लगाया कि पंजाब की जनता के साथ नशामुक्ति के नाम पर किया गया वादा पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले पंजाब को नशामुक्त करने का संकल्प लिया था, लेकिन अब तक ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।

ममदोट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या सिर्फ किसी एक परिवार या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव युवाओं, परिवारों और पूरे समाज पर पड़ रहा है। ऐसे में इस चुनौती से निपटने के लिए घोषणाओं और राजनीतिक दावों से आगे बढ़कर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।

भाजपा की यह यात्रा रविवार को गुरुहरसहाय, फिरोजपुर ग्रामीण और जीरा विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरी। कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता राणा गुरमीत सिंह सोढी, मनजीत सिंह राय, लखविंदर सिंह, सतिंदर सत्ती और सरबजीत सिंह बाठ समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

नशे के खिलाफ लड़ाई को युवाओं के भविष्य से जोड़ा

भजनलाल शर्मा ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन यह लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब देश का युवा स्वस्थ, सक्षम और नशे से दूर हो।

उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत युवाओं को नशे से दूर रखने के साथ-साथ उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। केंद्र की तीन वर्षीय ‘विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ योजना में नशे की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास से जुड़े कई कार्यबिंदु शामिल हैं।

शर्मा ने कहा कि पंजाब सहित पूरे देश में नशे के खिलाफ अभियान को जनभागीदारी से आगे बढ़ाना होगा। उनका कहना था कि केवल सरकारों के स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। परिवारों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और आम नागरिकों को भी इस लड़ाई का हिस्सा बनना पड़ेगा।

पंजाब सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप

राजस्थान के मुख्यमंत्री ने पंजाब सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से पहले नशे को खत्म करने को लेकर बड़े वादे किए गए थे। उनके मुताबिक, सरकार बनने के बाद नशामुक्ति को लेकर कई समयसीमाएं बताई गईं, लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है।

शर्मा ने कहा कि पंजाब जैसे राज्य में नशे की समस्या को नजरअंदाज करने का असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को नशे के खिलाफ कार्रवाई में अधिक प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई में केवल नशे का सेवन करने वालों तक कार्रवाई सीमित नहीं होनी चाहिए। नशे की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क, तस्करी और इसके पीछे काम करने वाले लोगों के खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। भाजपा की यात्रा के दौरान भी नशे की आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने और तस्करी पर रोक लगाने की बात उठाई गई।

पंजाब में डबल इंजन सरकार का आह्वान

भजनलाल शर्मा ने पंजाब में भाजपा की सरकार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि भाजपा नशामुक्त पंजाब के संकल्प को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि पंजाब को नशे की समस्या से बाहर निकालने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पंजाब की युवा शक्ति को सही दिशा में ले जाना केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। यदि युवाओं को शिक्षा, रोजगार, खेल और सकारात्मक अवसर मिलेंगे तो उन्हें नशे से दूर रखने में मदद मिलेगी।

शर्मा ने कहा कि नशामुक्ति का अभियान केवल चुनावी गतिविधि तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से नशे के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाने और युवाओं को इस बुराई से बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

राणा गुरमीत सोढी बोले- समस्या की जड़ पर करना होगा प्रहार

कार्यक्रम में भाजपा नेता राणा गुरमीत सिंह सोढी ने भी पंजाब में नशे की स्थिति को गंभीर बताते हुए पार्टी के अभियान को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नशे का असर समाज के अलग-अलग वर्गों पर पड़ रहा है और इससे निपटने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है।

सोढी ने कहा कि नशे की समस्या का समाधान केवल कार्रवाई या गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ नशे के आदी लोगों के उपचार, पुनर्वास और परिवारों को सहयोग देने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पंजाब को नशामुक्त बनाने के अभियान में अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया है। उनके अनुसार, समस्या की जड़ तक पहुंचना और नशे के पूरे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है।

सतिंदर सत्ती ने पंजाब की विरासत का किया जिक्र

भाजपा नेता सतिंदर सत्ती ने कहा कि पंजाब की पहचान उसके शौर्य, बलिदान और मेहनत की परंपरा से रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश ने भगत सिंह और बंदा सिंह बहादुर जैसे महान योद्धाओं को जन्म दिया, वहां की युवा पीढ़ी का नशे की चपेट में आना चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि पंजाब की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को नशे से बचाना जरूरी है। उनके अनुसार, वर्तमान समय में समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक युवाओं को नशे से दूर रखना है।

सत्ती ने कहा कि नशे के खिलाफ केवल राजनीतिक दलों को ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा। परिवारों को अपने बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना होगा और युवाओं को खेल, शिक्षा तथा रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने होंगे।

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लोगों की चेतना जगाने और समाज को एकजुट करने के लिए ऐसी यात्राएं उपयोगी हो सकती हैं। उनका कहना था कि अभियान को केवल राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है।

यात्रा के जरिए भाजपा का जनसंपर्क अभियान

पंजाब भाजपा की ‘नशामुक्त पंजाब यात्रा’ को पार्टी ने नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान के रूप में आगे बढ़ाया है। यह यात्रा राज्य के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजर रही है। इसके माध्यम से पार्टी नशे के मुद्दे को गांवों और स्थानीय स्तर तक ले जाने का प्रयास कर रही है।

यात्रा के दौरान भाजपा नेताओं की ओर से नशे के खिलाफ जागरूकता, युवाओं की भूमिका और नशा तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ सामाजिक भागीदारी भी जरूरी है।

नशा बना पंजाब की राजनीति का बड़ा मुद्दा

पंजाब में नशे का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है। भाजपा जहां मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार पर नशे की समस्या को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगा रही है, वहीं राज्य सरकार की ओर से नशे के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का दावा किया जाता रहा है। इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दल एक-दूसरे की सरकारों और नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।

ममदोट की सभा में भजनलाल शर्मा ने इसी राजनीतिक बहस को आगे बढ़ाते हुए नशे को पंजाब के भविष्य से जोड़कर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए परिणाम आधारित कार्रवाई जरूरी है।

उन्होंने कहा कि नशामुक्ति का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब नशे की मांग और आपूर्ति दोनों पर एक साथ काम किया जाए। इसके लिए कानून-व्यवस्था, उपचार, पुनर्वास, जागरूकता और युवाओं के लिए सकारात्मक अवसरों पर समान रूप से ध्यान देना होगा।

2029 के लक्ष्य को लेकर केंद्र की योजना का उल्लेख

भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने की केंद्र की योजना का उल्लेख किया। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, केंद्र की 2026-2029 की कार्ययोजना में रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के साथ बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाओं तथा राज्यों में चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

शर्मा ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास से पूरा नहीं होगा। इसके लिए देश के युवाओं का स्वस्थ और सशक्त होना भी जरूरी है। उन्होंने पंजाब को इस राष्ट्रीय अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए लोगों से नशे के खिलाफ सामूहिक संकल्प लेने की अपील की।

ममदोट में हुई सभा के साथ भाजपा ने नशे के मुद्दे पर अपना राजनीतिक अभियान और तेज करने का संकेत दिया। वहीं, इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। ऐसे में आने वाले समय में नशामुक्ति, युवाओं के रोजगार और नशे की आपूर्ति रोकने को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।