कैंसर के इलाज में आर्थिक बाधा नहीं बनेगी दीवार, पंजाब में 708 लंग कैंसर मरीजों को मिला कैशलेस उपचार

कैंसर के इलाज में आर्थिक बाधा नहीं बनेगी दीवार, पंजाब में 708 लंग कैंसर मरीजों को मिला कैशलेस उपचार

चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को आर्थिक राहत देने की दिशा में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत महत्वपूर्ण पहल का दावा किया है। विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस के मौके पर राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत अब तक पंजाब के 708 लंग कैंसर मरीजों को कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन मरीजों के इलाज से जुड़े कुल 3.43 करोड़ रुपये के दावे स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण किसी मरीज को जरूरी इलाज से वंचित न रहना पड़े।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैंसर सहित गंभीर बीमारियों के इलाज को आर्थिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि लंग कैंसर के उपचार के लिए बड़ी संख्या में मरीजों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है। सरकार का कहना है कि कैशलेस उपचार की व्यवस्था के कारण मरीजों और उनके परिवारों को इलाज के दौरान अस्पताल के भारी खर्च की चिंता से कुछ राहत मिलती है और उनका ध्यान उपचार तथा स्वास्थ्य लाभ पर केंद्रित रह सकता है।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस के अवसर पर कहा कि लंग कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली गंभीर बीमारियों में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में केवल उपचार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके जोखिम वाले कारणों को कम करना, लोगों को जागरूक करना और बीमारी की समय रहते पहचान करना भी उतना ही आवश्यक है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि मरीजों को इलाज के खर्च की चिंता के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी न करनी पड़े। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों को बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक करना और शुरुआती लक्षण सामने आने पर चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है।

डॉ. बलबीर सिंह ने नागरिकों से तंबाकू के सभी प्रकार के सेवन से दूरी बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि तंबाकू सेवन लंग कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है और इसे रोकने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर जागरूकता के साथ-साथ लगातार सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान भी जरूरी हैं। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और कैंसर के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न करने का आग्रह किया।

स्वास्थ्य मंत्री ने पंजाब में तंबाकू नियंत्रण को लेकर किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 के आंकड़ों में पंजाब को भारत में सबसे कम तंबाकू सेवन वाले राज्य के रूप में पहचान मिलना राज्य में चलाए गए जागरूकता अभियानों और तंबाकू नियंत्रण उपायों की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम इस बात को मजबूत करता है कि लंग कैंसर सहित तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से बचाव में रोकथाम की भूमिका बेहद अहम है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लंग कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में शामिल है। तंबाकू सेवन इसके प्रमुख जोखिम कारकों में से एक माना जाता है। इसके अलावा बीमारी की देर से पहचान भी उपचार को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ओर से लगातार यह सलाह दी जाती है कि जोखिम वाले लोगों को चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी, पंजाब से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लंग कैंसर का कैशलेस उपचार पाने वाले 708 मरीजों में 413 पुरुष और 295 महिलाएं शामिल हैं। पुरुष मरीजों के उपचार पर 1,89,68,865 रुपये की राशि खर्च हुई, जबकि महिला मरीजों के इलाज पर 1,53,19,215 रुपये की लागत दर्ज की गई। आंकड़ों से स्पष्ट है कि योजना का लाभ पुरुषों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिला मरीजों को भी मिला है।

उम्र के आधार पर आंकड़ों को देखें तो 61 से 75 वर्ष की आयु वाले मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। इस वर्ग में 286 मरीजों को योजना के तहत उपचार मिला और इनके इलाज पर 1,34,56,310 रुपये की राशि खर्च हुई। इसके बाद 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 247 मरीज शामिल रहे, जिनके उपचार की लागत 1,24,83,240 रुपये रही।

वहीं 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 100 मरीजों को भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा 19 से 30 वर्ष आयु वर्ग के नौ मरीजों तथा 13 से 18 वर्ष आयु वर्ग के दो किशोर मरीजों ने भी इस योजना के तहत सहायता प्राप्त की। आयु वर्ग से जुड़े ये आंकड़े बताते हैं कि फेफड़ा कैंसर को केवल बुजुर्गों से जुड़ी बीमारी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और अलग-अलग आयु समूहों में स्वास्थ्य जागरूकता आवश्यक है।

जिलेवार आंकड़ों में बठिंडा सबसे आगे रहा। यहां मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत 179 लंग कैंसर मरीजों को उपचार की सुविधा मिली। इनके इलाज पर 1,46,02,300 रुपये की राशि खर्च हुई। इसके बाद संगरूर का स्थान रहा, जहां 163 मरीजों को 56,62,600 रुपये की लागत वाला उपचार उपलब्ध कराया गया।

फरीदकोट में भी योजना के तहत बड़ी संख्या में मरीजों को लाभ मिला। यहां 149 मरीजों के उपचार पर 37,85,760 रुपये की राशि खर्च हुई। इसके अलावा अमृतसर के 55, जालंधर के 42, पटियाला के 20, एसएएस नगर के 19, लुधियाना के 11, फतेहगढ़ साहिब के एक और पठानकोट के एक मरीज ने भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत कैशलेस उपचार का लाभ उठाया।

इन जिलों के आंकड़ों के अनुसार कुल 640 मरीजों को 3,17,04,235 रुपये की लागत का उपचार उपलब्ध कराया गया। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि योजना का विस्तार होने के साथ अधिक से अधिक पात्र परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से लंग कैंसर के संभावित लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लगातार बनी रहने वाली खांसी, सीने में दर्द, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बीमारी की समय पर पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति में इन लक्षणों का कारण कैंसर ही हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन लंबे समय तक बने रहने वाले या असामान्य लक्षणों की जांच करवाना स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

सरकार का जोर अब कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के साथ-साथ उपचार तक पहुंच को आसान बनाने पर भी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च परिवार के लिए सबसे बड़ी बाधा न बने।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि योजना के तहत स्वीकृत होने वाला प्रत्येक उपचार दावा केवल एक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि उसके पीछे एक मरीज और उसका परिवार होता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता मिलने से परिवार पर उपचार का वित्तीय बोझ कम हो सकता है और मरीज को जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।

पंजाब सरकार कैंसर के खिलाफ लड़ाई में केवल अस्पताल-आधारित उपचार तक सीमित नहीं रहना चाहती। इसके लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने, तंबाकू सेवन कम करने, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने और बीमारी की समय पर पहचान पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए उपचार और रोकथाम दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करना जरूरी है।

इसी व्यापक स्वास्थ्य दृष्टिकोण के तहत सरकार योग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित कर रही है। पंजाब में ‘सीएम दी योगशाला’ पहल के माध्यम से लोगों को नियमित योग और ध्यान से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार के अनुसार नियमित योग और ध्यान को जीवनशैली का हिस्सा बनाने से लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

फेफड़ा कैंसर के मरीजों के संदर्भ में भी जीवनशैली और स्वास्थ्य लाभ से जुड़ी गतिविधियों पर ध्यान दिया जा रहा है। वर्ष 2023 में कैंसर नर्सिंग से संबंधित एक अध्ययन में योग के सांस संबंधी अभ्यासों को लंग कैंसर की सर्जरी के बाद मरीजों में कुछ लक्षणों को कम करने और रिकवरी प्रक्रिया में सहायता से जोड़ा गया था। हालांकि किसी भी योग या व्यायाम को चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता और मरीजों को अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

पंजाब सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने पर काम किया जा रहा है। कैंसर जैसी बीमारी में उपचार का खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। ऐसे में कैशलेस उपचार की व्यवस्था मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को यह संदेश भी दिया जा रहा है कि कैंसर की रोकथाम में समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। तंबाकू से दूरी, संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ जीवनशैली और संदिग्ध लक्षणों पर समय रहते डॉक्टर से संपर्क जैसे कदम बीमारी के जोखिम को कम करने और शुरुआती स्तर पर पहचान में मदद कर सकते हैं।

सरकार ने यह भी दोहराया है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार काम कर रहा है। योजना के तहत लंग कैंसर के 708 मरीजों को अब तक मिले उपचार के आंकड़े सरकार की ओर से स्वास्थ्य सुरक्षा के विस्तार के तौर पर पेश किए गए हैं।

विश्व फेफड़ा कैंसर दिवस के मौके पर सामने आए ये आंकड़े पंजाब में कैंसर के इलाज और रोकथाम को लेकर सरकार की रणनीति के दो प्रमुख पहलुओं को सामने रखते हैं। एक तरफ गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को कैशलेस उपचार के माध्यम से आर्थिक राहत देने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर तंबाकू नियंत्रण, जागरूकता, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली के जरिए बीमारी के जोखिम को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग का संदेश साफ है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई केवल अस्पतालों और डॉक्टरों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके लिए सरकार, स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों, परिवारों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। समय पर बीमारी की पहचान, उचित उपचार और रोकथाम के प्रयासों के जरिए लंग कैंसर के कारण होने वाले स्वास्थ्य और आर्थिक नुकसान को कम करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।