त्योहारी सीजन नजदीक आते ही बाजारों में खरीदारी का माहौल बनने लगता है। हर साल इस दौरान बड़ी संख्या में लोग नया एयर कंडीशनर, फ्रिज, टीवी, वाशिंग मशीन, स्मार्टफोन, लैपटॉप या नई कार और बाइक खरीदने की योजना बनाते हैं। लेकिन इस बार त्योहारों से पहले ग्राहकों को महंगाई का एक और झटका लग सकता है। इसकी वजह रोजमर्रा की नहीं, बल्कि उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख धातुओं की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी है। तांबा, एल्युमीनियम, जिंक और निकल जैसी धातुओं के महंगे होने का असर अब सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में आई रुकावट, भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण इन धातुओं की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। ऐसे में कंपनियों के लिए उत्पादन लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं, जिससे त्योहारी सीजन के दौरान ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
सबसे अधिक चर्चा तांबे की कीमतों को लेकर हो रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में तांबे का तीन महीने का औसत भाव करीब 1.8 प्रतिशत बढ़कर 14,369.50 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। यह 29 जनवरी के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। वैश्विक बाजार में आई इस तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया है। देश में तांबे का भाव लगभग 2.56 प्रतिशत बढ़कर 1304.90 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया, जबकि करीब एक महीने पहले इसकी कीमत 1187.85 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इसी तरह एल्युमीनियम के दामों में भी लगभग पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कीमतों में इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे अहम अफ्रीकी देश कांगो का फैसला है। कांगो सरकार ने कॉपर और कोबाल्ट कंसंट्रेट के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार का उद्देश्य इन खनिजों का देश के भीतर ही अधिक प्रसंस्करण कराना और प्राकृतिक संसाधनों से ज्यादा आर्थिक लाभ हासिल करना है। हालांकि इस फैसले ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर दिया है, क्योंकि कांगो दुनिया के प्रमुख तांबा और कोबाल्ट उत्पादक देशों में शामिल है। वहां से निर्यात रुकने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सिर्फ कांगो का फैसला ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव भी धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के कई देशों तक औद्योगिक कच्चा माल पहुंचता है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। तांबा, एल्युमीनियम और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों की सप्लाई में देरी और अनिश्चितता ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। व्यापारियों और उद्योग जगत को आशंका है कि यदि यह स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
जिंक के बाजार में भी बड़ी हलचल देखने को मिली है। इस साल की शुरुआत से अब तक वैश्विक वेयरहाउस में जिंक का स्टॉक करीब 75 प्रतिशत तक घट गया है। स्टॉक कम होने से बाजार में उपलब्धता घटती है और मांग अधिक होने पर कीमतों में तेजी आ जाती है। यही वजह है कि जिंक सहित अन्य धातुओं की लागत भी लगातार बढ़ रही है।
एक और बड़ा कारण तकनीकी बदलाव और नई औद्योगिक मांग को माना जा रहा है। दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डेटा सेंटर तेजी से स्थापित किए जा रहे हैं। इन डाटा सेंटरों में भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है और इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाली वायरिंग तथा विद्युत उपकरणों में तांबे का व्यापक इस्तेमाल किया जाता है। दूसरी ओर इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता ने भी तांबे की मांग को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। इलेक्ट्रिक कारों और बैटरियों में बड़ी मात्रा में तांबे की जरूरत पड़ती है, जिसके कारण वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और चीन जैसे बड़े औद्योगिक देश भी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तांबे की बड़े पैमाने पर खरीदारी और भंडारण कर रहे हैं। इससे खुले बाजार में उपलब्धता और कम हो रही है। जब मांग लगातार बढ़े और आपूर्ति सीमित हो जाए, तो कीमतों का बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है। यही स्थिति फिलहाल वैश्विक धातु बाजार में देखने को मिल रही है।
इन परिस्थितियों का सीधा असर विनिर्माण उद्योग पर पड़ रहा है। घरेलू उपकरणों से लेकर ऑटोमोबाइल सेक्टर तक, लगभग हर उद्योग में तांबा, एल्युमीनियम और स्टील का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। एयर कंडीशनर के कंडेंसर और कंप्रेसर, वाशिंग मशीन की मोटर, रेफ्रिजरेटर की कूलिंग प्रणाली, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के सर्किट, सभी में तांबा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि कच्चे माल की कीमतें बढ़ती हैं तो कंपनियों के लिए उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है।
उद्योग से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि धातुओं की कीमतों में आई तेजी के कारण कई कंपनियों की इनपुट लागत लगभग 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। यदि यह दबाव जारी रहता है तो कंपनियां त्योहारी सीजन से पहले अपने उत्पादों की कीमतों में 5 से 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इसका मतलब है कि ग्राहकों को टीवी, फ्रिज, एसी, वाशिंग मशीन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद खरीदने के लिए पहले की तुलना में अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
सिर्फ घरेलू उपकरण ही नहीं, बल्कि ऑटोमोबाइल उद्योग भी इससे अछूता नहीं रहेगा। आधुनिक कारों और दोपहिया वाहनों में वायरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिकल पार्ट्स और मोटरों में बड़ी मात्रा में तांबे का इस्तेमाल होता है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी, चार्जिंग सिस्टम और वायरिंग हार्नेस के लिए तांबा बेहद जरूरी होता है। फिलहाल इसका कोई सस्ता और प्रभावी विकल्प उपलब्ध नहीं है। इसलिए तांबे की कीमत बढ़ने का सीधा असर इलेक्ट्रिक वाहनों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है।
मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और अन्य स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनाने वाली कंपनियों के लिए भी यह चुनौती बन सकती है। इन उत्पादों के सर्किट बोर्ड, कनेक्टर और कई आंतरिक हिस्सों में तांबे का उपयोग होता है। यदि कच्चा माल लगातार महंगा होता है तो इन गैजेट्स की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यही वजह है कि आने वाले महीनों में स्मार्टफोन और अन्य डिजिटल उपकरण खरीदना भी पहले की तुलना में महंगा पड़ सकता है।
धातुओं की कीमतों का असर सिर्फ बड़े उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगा। घरेलू उपयोग के कई सामान, विशेष रूप से धातु से बने बर्तन और अन्य उपभोक्ता वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। उत्पादन लागत बढ़ने पर निर्माता अक्सर कीमतों में संशोधन करते हैं ताकि बढ़े हुए खर्च की भरपाई की जा सके। ऐसे में महंगाई का प्रभाव कई श्रेणियों के उत्पादों पर दिखाई दे सकता है।
यदि वैश्विक आपूर्ति सामान्य होती है, पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और प्रमुख उत्पादक देशों से निर्यात फिर से सुचारु रूप से शुरू होता है, तो धातुओं की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन फिलहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और उद्योग जगत हालात पर लगातार नजर रखे हुए है।
त्योहारी सीजन भारतीय बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिक्री अवधि माना जाता है। कंपनियां इस दौरान ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई ऑफर और छूट भी देती हैं। हालांकि यदि कच्चे माल की लागत लगातार ऊंची बनी रहती है, तो छूट के बावजूद अंतिम कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में जो ग्राहक आने वाले महीनों में नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, घरेलू सामान या वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, उन्हें पहले की तुलना में अधिक बजट तैयार रखना पड़ सकता है।
वैश्विक धातु बाजार में आई तेजी अब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। तांबा, एल्युमीनियम, जिंक और अन्य औद्योगिक धातुओं की बढ़ती कीमतें उत्पादन लागत बढ़ा रही हैं और इसका असर जल्द ही बाजार में बिकने वाले कई उत्पादों की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। यदि मौजूदा हालात में सुधार नहीं हुआ, तो इस बार त्योहारी खरीदारी पहले के मुकाबले कहीं अधिक महंगी साबित हो सकती है।
(Photo: AI Generated)




