हरियाणा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले सरकारी राशन की पात्रता को लेकर सरकार ने अब सख्ती शुरू कर दी है। लंबे समय से राशन डिपो से गेहूं और चावल का उठान नहीं करने वाले राशन कार्ड धारकों की पहचान की जा रही है। ऐसे परिवार जो लगातार कई महीनों से बायोमीट्रिक सत्यापन नहीं करा रहे हैं और सरकारी राशन भी नहीं ले रहे, उनके राशन कार्ड फिलहाल पोर्टल पर ब्लॉक किए जा रहे हैं।
यह प्रक्रिया नागरिक संसाधन सूचना विभाग (क्रीड) और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के स्तर पर की जा रही है। विभागीय स्तर पर राज्यभर में उन राशन कार्डों का डेटा खंगाला जा रहा है, जिनमें पिछले छह महीने से लेकर एक वर्ष तक राशन का कोई उठान दर्ज नहीं हुआ है। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ऐसे कार्ड अभी भी पात्र परिवारों के पास हैं या उनकी स्थिति में बदलाव हो चुका है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रदेश में करीब डेढ़ लाख से दो लाख राशन कार्ड इस जांच के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि, अंतिम संख्या जांच और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल ऐसे कार्डों को निष्क्रिय मानते हुए पोर्टल पर अस्थायी रूप से ब्लॉक किया जा रहा है।
सरकार की इस कवायद के पीछे मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पात्र लाभार्थियों को ही सरकारी राशन का लाभ सुनिश्चित करना है। लंबे समय तक राशन नहीं उठाने वाले कार्डों की समीक्षा से विभाग यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि कहीं ऐसे कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर तो सक्रिय नहीं हैं जो अब संबंधित पते पर रह ही नहीं रहे।
कई परिवार रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से दूसरे शहरों अथवा दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। ऐसे मामलों में उनके पुराने पते पर राशन कार्ड सक्रिय रहने की संभावना रहती है, जबकि वे नियमित रूप से सरकारी राशन नहीं लेते। विभाग अब ऐसे मामलों की भी पहचान करेगा और यह जांच करेगा कि लाभार्थी वास्तव में हरियाणा में रह रहा है या नहीं।
इसके अलावा कुछ ऐसे परिवार भी हो सकते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति में बदलाव आया हो और वे अब सरकारी राशन की पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करते हों। सरकार ऐसे मामलों की भी जांच करना चाहती है, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संसाधनों का लाभ केवल वास्तविक और पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा सके।
राशन कार्ड को पोर्टल पर ब्लॉक किए जाने का मतलब यह नहीं है कि हर ऐसे परिवार की पात्रता हमेशा के लिए समाप्त कर दी गई है। यदि कोई परिवार वास्तव में पात्र है और किसी जायज कारण से कुछ समय तक सरकारी राशन नहीं ले पाया है तो उसके लिए दोबारा सुविधा शुरू कराने का रास्ता खुला रखा गया है।
बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने, परिवार में किसी आपात स्थिति या किसी अन्य उचित कारण से राशन नहीं उठा पाने वाले लाभार्थी संबंधित प्रक्रिया पूरी करके अपना कार्ड दोबारा सक्रिय करा सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी पात्रता का पुनः सत्यापन कराना होगा।
पात्रता दोबारा साबित करने के लिए लाभार्थियों को अपनी आय, संपत्ति और अन्य जरूरी विवरणों का सत्यापन कराना होगा। यानी सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि राशन कार्ड दोबारा सक्रिय करने से पहले संबंधित परिवार अभी भी सरकारी खाद्यान्न योजना के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ऐसे लाभार्थियों के लिए सत्यापन की प्रक्रिया में तहसीलदार या नायब तहसीलदार से प्रमाणित शपथ पत्र की आवश्यकता हो सकती है। इस शपथ पत्र के माध्यम से लाभार्थी को अपनी स्थिति और राशन नहीं उठा पाने के कारण की जानकारी देनी होगी।
सरकार की इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू बायोमीट्रिक सत्यापन है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशन वितरण के दौरान लाभार्थियों की पहचान बायोमीट्रिक माध्यम से दर्ज की जाती है। लंबे समय से जिन कार्डों पर बायोमीट्रिक गतिविधि नहीं हुई है, उन्हें भी विभाग की जांच प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।
विभाग इस डेटा के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि किसी कार्ड पर लंबे समय से राशन क्यों नहीं लिया गया। यदि परिवार वास्तव में मौजूद है लेकिन किसी कारण से राशन नहीं ले रहा तो उसकी स्थिति अलग होगी। वहीं, यदि परिवार स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुका है या पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करता तो कार्ड को निष्क्रिय रखा जा सकता है।
इस प्रक्रिया से सरकारी राशन वितरण व्यवस्था में फर्जी या निष्क्रिय लाभार्थियों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि राशन की सुविधा का लाभ उन परिवारों तक पहुंचे जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है।
हालांकि, लंबे समय से राशन नहीं लेने वाले परिवारों में से सभी को अपात्र मानना उचित नहीं होगा। कई बार परिवार बीमारी, आर्थिक संकट, रोजगार के लिए पलायन, घरेलू परिस्थितियों या अन्य कारणों से डिपो तक नहीं पहुंच पाते। इसलिए सरकार ने पात्र परिवारों के लिए सत्यापन के बाद सुविधा बहाल करने का विकल्प रखा है।
लाभार्थियों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि यदि उनका राशन कार्ड ब्लॉक हो गया है तो वे अपनी स्थिति की जानकारी संबंधित विभाग या निर्धारित प्रशासनिक माध्यम से प्राप्त करें। पात्रता संबंधी दस्तावेज और जरूरी प्रमाण उपलब्ध कराकर वे दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
विभागीय स्तर पर की जा रही यह कार्रवाई डिजिटल रिकॉर्ड और सरकारी डेटाबेस के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। राशन उठान की अवधि, बायोमीट्रिक सत्यापन और लाभार्थी की अन्य जानकारी को मिलाकर निष्क्रिय कार्डों की पहचान की जा रही है।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य एक तरफ सरकारी अनाज की व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना है, वहीं दूसरी तरफ उन परिवारों की पहचान करना भी है जो लंबे समय से योजना का उपयोग नहीं कर रहे हैं। इससे भविष्य में राशन वितरण व्यवस्था के डेटा को अधिक सटीक बनाने में मदद मिल सकती है।
यदि किसी परिवार ने छह महीने या उससे अधिक समय से राशन नहीं लिया है तो उसे अपनी स्थिति को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। विशेष रूप से उन परिवारों को अपनी पात्रता और दस्तावेजों की स्थिति की जांच कर लेनी चाहिए, जो बीमारी या किसी अन्य कारण से लंबे समय तक राशन डिपो नहीं जा सके हैं।
सरकार की ओर से यह भी संकेत है कि सत्यापन प्रक्रिया का उद्देश्य केवल कार्डों को बंद करना नहीं, बल्कि पात्र और अपात्र लाभार्थियों के बीच अंतर स्पष्ट करना है। जिन लोगों की पात्रता बनी हुई है, उनके लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद राशन सुविधा बहाल की जा सकती है।
वहीं, यदि जांच में यह सामने आता है कि कोई परिवार अब योजना की शर्तों के अनुसार पात्र नहीं है या संबंधित पते पर निवास नहीं करता, तो ऐसे राशन कार्डों को निष्क्रिय रखने की कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।
हरियाणा में करीब डेढ़ से दो लाख राशन कार्डों के संभावित रूप से इस प्रक्रिया की जद में आने की बात सामने आने के बाद यह अभियान बड़े स्तर पर माना जा रहा है। हालांकि, वास्तविक संख्या जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। विभाग द्वारा डेटा सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने कार्ड वास्तव में निष्क्रिय हैं और कितने परिवार दोबारा पात्र पाए जाते हैं।
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार ने लंबे समय से सरकारी राशन नहीं लेने वाले परिवारों के राशन कार्डों की समीक्षा शुरू कर दी है। छह महीने से एक वर्ष तक राशन नहीं उठाने और बायोमीट्रिक सत्यापन नहीं कराने वाले कार्डों को फिलहाल ब्लॉक किया जा रहा है। ऐसे परिवारों को घबराने के बजाय अपनी पात्रता दोबारा प्रमाणित कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
जिन परिवारों के पास राशन लेने का वैध अधिकार है, उनके लिए सुविधा बहाल करने का रास्ता खुला है। इसके लिए आय, संपत्ति और अन्य पात्रता संबंधी जानकारी का सत्यापन जरूरी होगा, जबकि ग्रामीण लाभार्थियों को तहसीलदार या नायब तहसीलदार से सत्यापित शपथ पत्र भी देना पड़ सकता है। सरकार की इस कवायद का अंतिम उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना और सरकारी खाद्यान्न का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचाना है।




