गुरुग्राम। हरियाणा के तेजी से विकसित हो रहे गुरुग्राम शहर में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में ‘मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी’ की स्थापना से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए विधानसभा में संशोधन विधेयक लाने की मंजूरी दे दी गई है। विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट-2006 में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
प्रस्तावित विश्वविद्यालय की स्थापना गुरुग्राम स्थित शांति फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से की जाएगी। सरकार के स्तर पर प्रस्ताव की निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच और मूल्यांकन किया जा चुका है। अब विश्वविद्यालय को वैधानिक स्वरूप देने की दिशा में अगला कदम विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश करना होगा। विधानसभा से विधेयक पारित होने के बाद ही विश्वविद्यालय की औपचारिक स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित विश्वविद्यालय के लिए करीब 5.14 एकड़ भूमि उपलब्ध है। खास बात यह है कि विश्वविद्यालय परिसर के लिए केवल जमीन की व्यवस्था ही नहीं की गई है, बल्कि वहां पहले से ही एक लाख वर्गफुट से अधिक क्षेत्रफल में निर्मित भवन भी मौजूद है। इससे विश्वविद्यालय के लिए बुनियादी ढांचे का एक बड़ा हिस्सा पहले से तैयार माना जा रहा है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित परिसर में कुल निर्मित क्षेत्र 1.07 लाख वर्गफुट से अधिक है। इसमें लगभग 96,600 वर्गफुट क्षेत्र शैक्षणिक गतिविधियों के लिए निर्धारित है। इसके अलावा करीब 5,400 वर्गफुट क्षेत्र प्रशासनिक कार्यों के लिए उपलब्ध है, जबकि लगभग 5,000 वर्गफुट में अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था है।
इस तरह प्रस्तावित विश्वविद्यालय के लिए जमीन और भवन संबंधी आधारभूत ढांचा पहले से उपलब्ध होने के कारण स्थापना की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा हो सकती है। ट्रस्ट के पास विश्वविद्यालय के लिए प्रस्तावित जमीन 30 वर्ष की लीज पर होने की जानकारी दी गई है। जमीन के उपयोग और विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े प्रावधानों को निर्धारित नियमों के अनुरूप लागू किया जाएगा।
हरियाणा सरकार लंबे समय से राज्य में उच्च शिक्षा के विस्तार और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देती रही है। नए निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को भी इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित होते शहरी केंद्र में उच्च शिक्षा के नए संस्थान आने से विद्यार्थियों के सामने विकल्पों का विस्तार होगा।
गुरुग्राम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक प्रमुख आर्थिक और औद्योगिक केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में देश-विदेश की कंपनियां और कारोबारी संस्थान मौजूद हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए संस्थानों के विकास से स्थानीय युवाओं के साथ-साथ एनसीआर के अन्य हिस्सों से आने वाले विद्यार्थियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र के माध्यम से उच्च शिक्षा की संस्थागत क्षमता बढ़ने से विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों और पाठ्यक्रमों में अध्ययन के अधिक अवसर मिल सकते हैं। इसके साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और नए शैक्षणिक मॉडल विकसित होने की संभावना भी बढ़ेगी।
मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी की स्थापना का प्रस्ताव संबंधित निजी विश्वविद्यालय कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया से गुजरा है। सरकार के अनुसार, प्रस्ताव की जांच अकादमिक एवं वित्त समिति द्वारा की गई। इस प्रक्रिया में विश्वविद्यालय के लिए प्रस्तावित शैक्षणिक ढांचे, वित्तीय क्षमता, भूमि और अन्य आवश्यक संसाधनों से संबंधित पहलुओं का परीक्षण किया गया।
इसके अलावा हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के चेयरपर्सन की अध्यक्षता वाली समिति ने भी प्रस्ताव का परीक्षण किया। समिति की ओर से निर्धारित शर्तों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट जारी करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद शांति फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से निर्धारित शर्तों को पूरा करने की अनुपालन रिपोर्ट भी सरकार के समक्ष प्रस्तुत की गई।
सरकारी स्तर पर ट्रस्ट की ओर से दी गई अनुपालन रिपोर्ट का सत्यापन किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। अब प्रस्ताव को कानूनी रूप देने के लिए विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा।
हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट-2006 में संशोधन इसलिए आवश्यक है ताकि प्रस्तावित विश्वविद्यालय को राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के कानूनी ढांचे में शामिल किया जा सके। विधानसभा से संशोधन विधेयक पारित होने के बाद ही विश्वविद्यालय को वैधानिक रूप से स्थापित करने की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
सरकार ने इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों से भी जोड़कर देखा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। केंद्र की नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाना और अधिक युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ना राज्यों के सामने प्रमुख लक्ष्य है।
हरियाणा सरकार का मानना है कि नए विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना से इस दिशा में क्षमता बढ़ाई जा सकती है। निजी विश्वविद्यालयों के माध्यम से अतिरिक्त सीटें, नए पाठ्यक्रम और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध होने की संभावना रहती है। इससे उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों या दूर के शहरों का रुख करने की आवश्यकता भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
गुरुग्राम में प्रस्तावित विश्वविद्यालय की स्थापना को स्थानीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में आवासीय और औद्योगिक विकास तेजी से हुआ है। आबादी बढ़ने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सेवाओं की मांग भी बढ़ी है। ऐसे में उच्च शिक्षा के नए संस्थान की स्थापना को बढ़ती शैक्षणिक जरूरतों से जोड़कर देखा जा सकता है।
प्रस्तावित परिसर में पहले से मौजूद शैक्षणिक क्षेत्र विश्वविद्यालय के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा। लगभग 96,600 वर्गफुट का शैक्षणिक क्षेत्र उपलब्ध होने से कक्षाओं और अन्य अकादमिक गतिविधियों के संचालन के लिए आधार तैयार है। वहीं प्रशासनिक गतिविधियों के लिए अलग क्षेत्र और अन्य सुविधाओं के लिए उपलब्ध जगह संस्थान के संचालन में उपयोग की जा सकती है।
हालांकि विश्वविद्यालय की औपचारिक स्थापना के बाद उसे राज्य सरकार और संबंधित नियामक संस्थाओं द्वारा निर्धारित सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक मानकों का पालन करना होगा। विश्वविद्यालय को अपने पाठ्यक्रम, शिक्षकों की नियुक्ति, विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं और अन्य व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप विकसित करनी होंगी।
निजी विश्वविद्यालयों के विस्तार के साथ उनकी गुणवत्ता और जवाबदेही भी महत्वपूर्ण विषय रहती है। इसी कारण सरकार की ओर से प्रस्ताव की जांच के लिए अकादमिक और वित्तीय स्तर पर समितियों की प्रक्रिया अपनाई गई है। लेटर ऑफ इंटेंट से जुड़ी शर्तों की अनुपालना और उसके सत्यापन को भी इसी व्यवस्था का हिस्सा माना जा रहा है।
मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी के लिए उपलब्ध जमीन 30 वर्ष की लीज पर होने के कारण भूमि से जुड़ी शर्तें भी विश्वविद्यालय की स्थापना प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेंगी। विश्वविद्यालय को भूमि के उपयोग और लीज की शर्तों से संबंधित सभी आवश्यक नियमों का पालन करना होगा।
सरकार का दावा है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से राज्य में उच्च शिक्षा के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा। नए विश्वविद्यालयों के आने से शिक्षण, अनुसंधान, कौशल विकास और रोजगार उन्मुख पाठ्यक्रमों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। खासतौर पर गुरुग्राम जैसे कॉरपोरेट और तकनीकी गतिविधियों के केंद्र में उच्च शिक्षा संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग की संभावनाएं भी अधिक रहती हैं।
गुरुग्राम में स्थापित होने वाला नया विश्वविद्यालय भविष्य में विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के नए विकल्प उपलब्ध करा सकता है। इससे आसपास के जिलों और एनसीआर क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए भी एक अतिरिक्त संस्थागत विकल्प सामने आएगा।
सरकार की ओर से इस परियोजना को मंजूरी दिए जाने का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विश्वविद्यालय के लिए आधारभूत ढांचे का बड़ा हिस्सा पहले से तैयार बताया गया है। इससे पूरी तरह नए सिरे से जमीन विकसित करने और भवन निर्माण पर लगने वाले समय में कमी आ सकती है। हालांकि विश्वविद्यालय के पूर्ण संचालन के लिए आवश्यक अन्य सुविधाओं और शैक्षणिक मानकों को पूरा करना अभी भी महत्वपूर्ण रहेगा।
प्रस्तावित विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विधानसभा की भूमिका अब निर्णायक होगी। कैबिनेट से संशोधन विधेयक लाने की मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा के समक्ष रखा जाएगा। विधेयक पर चर्चा और पारित होने के बाद ही इसे कानून का रूप दिया जा सकेगा। इसके पश्चात विश्वविद्यालय को औपचारिक रूप से स्थापित करने से जुड़े अगले चरण पूरे किए जाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि हरियाणा सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश और संस्थागत भागीदारी को बढ़ावा देने की नीति पर आगे बढ़ रही है। राज्य में पहले से संचालित निजी विश्वविद्यालयों के साथ नए संस्थानों के आने से उच्च शिक्षा का नेटवर्क और व्यापक हो सकता है।
हालांकि किसी भी नए विश्वविद्यालय की सफलता केवल उसके भवन और बुनियादी ढांचे पर निर्भर नहीं करती। गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की उपलब्धता, आधुनिक पाठ्यक्रम, शोध गतिविधियां, विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी इन क्षेत्रों में किस तरह की व्यवस्था विकसित करती है।
सरकार की योजना उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात को बढ़ाने और विद्यार्थियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने की है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। गुरुग्राम में प्रस्तावित नया विश्वविद्यालय इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा बन सकता है।
फिलहाल कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगली बड़ी प्रक्रिया विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश करने की है। विधेयक पारित होने और संबंधित कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी को राज्य में औपचारिक रूप से स्थापित किया जा सकेगा।
कुल मिलाकर, गुरुग्राम में नए निजी विश्वविद्यालय की स्थापना से हरियाणा के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक और संस्थान जुड़ने की राह खुल गई है। करीब 5.14 एकड़ जमीन, एक लाख वर्गफुट से अधिक तैयार निर्मित क्षेत्र और निर्धारित समितियों की जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रस्ताव विधायी मंजूरी के चरण में पहुंच गया है। यदि विधानसभा से संशोधन विधेयक पारित होता है तो मास्टर्स यूनियन यूनिवर्सिटी की स्थापना की दिशा में अगला रास्ता साफ हो जाएगा और गुरुग्राम के युवाओं को उच्च शिक्षा का एक नया विकल्प मिल सकेगा।




