हिमाचल प्रदेश को देश और दुनिया के पर्यटकों के लिए नए और आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रविवार को वाराणसी में आयोजित फैडरेशन ऑफ होटल एंड रैस्टोरैंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के 56वें वार्षिक अधिवेशन में हिस्सा लेते हुए देशभर से आए होटल व्यवसायियों, ट्रैवल एजेंटों, टूर ऑपरेटरों और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधियों से हिमाचल की पर्यटन संभावनाओं को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे देश के साथ-साथ विदेशों से आने वाले यात्रियों को हिमाचल की ओर आकर्षित करने के लिए विशेष प्रयास करें। उन्होंने कहा कि टूर पैकेज तैयार करते समय केवल लोकप्रिय और पारंपरिक पर्यटन स्थलों तक सीमित रहने के बजाय राज्य के उन क्षेत्रों को भी शामिल किया जाना चाहिए, जो अभी तक बड़े पैमाने पर पर्यटकों की नजर से दूर हैं। इससे पर्यटन का लाभ प्रदेश के नए इलाकों तक पहुंचेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल की सबसे बड़ी ताकत उसकी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण है। बर्फ से ढके पर्वत, हरे-भरे जंगल, स्वच्छ वातावरण, निर्मल जलस्रोत, खूबसूरत घाटियां और ग्रामीण क्षेत्रों की पारंपरिक जीवनशैली प्रदेश को दूसरे पर्यटन राज्यों से अलग पहचान देती है। इसके अलावा हिमाचल की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराएं, खान-पान और स्थानीय जीवनशैली भी पर्यटकों को अलग तरह का अनुभव प्रदान कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यटन की बदलती तस्वीर को समझना जरूरी है। आज का पर्यटक केवल किसी प्रसिद्ध स्थान पर जाकर तस्वीरें खींचने तक सीमित नहीं रहना चाहता। लोग अब ऐसे अनुभवों की तलाश कर रहे हैं, जहां उन्हें प्रकृति के करीब रहने, स्थानीय संस्कृति को समझने, गांवों की जीवनशैली देखने, स्थानीय लोगों से जुड़ने और मानसिक सुकून प्राप्त करने का अवसर मिले। हिमाचल इस तरह के अनुभव-आधारित पर्यटन के लिए बेहद अनुकूल है।
सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार इसी सोच के साथ अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत पर्यटकों को हिमाचल के अनछुए क्षेत्रों, स्थानीय परंपराओं, संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। सरकार का उद्देश्य यह है कि पर्यटन गतिविधियां कुछ चुनिंदा शहरों या प्रसिद्ध स्थलों तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों तक भी पहुंचें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के आधारभूत ढांचे में सुधार हुआ है। सड़क संपर्क, बिजली, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी बेहतर होने से प्रदेश के कई ऐसे क्षेत्रों तक पहुंच आसान हुई है, जो पहले पर्यटकों के लिए अपेक्षाकृत कठिन माने जाते थे। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब इन क्षेत्रों को नए पर्यटन गंतव्यों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पारंपरिक पर्यटन के साथ-साथ कारवां पर्यटन और वीकेंड पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है। बदलती जीवनशैली और पर्यटकों की नई पसंद को देखते हुए ये पर्यटन मॉडल हिमाचल के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। खासकर नजदीकी राज्यों और बड़े शहरों से आने वाले पर्यटकों के लिए छोटे अवकाश के दौरान हिमाचल के नए क्षेत्रों की यात्रा को आकर्षक बनाया जा सकता है।
महिला पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर भी राज्य सरकार नई पहल कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश को महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वागत योग्य पर्यटन गंतव्य बनाने के उद्देश्य से ‘शी ट्रैवल’ नीति तैयार की जा रही है। इस नीति के माध्यम से महिला यात्रियों के लिए पर्यटन अनुभव को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।
सुक्खू ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी सरकार का विशेष जोर है। महिलाओं को होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन आधारित स्टार्टअप के माध्यम से रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ हिमाचल की स्थानीय संस्कृति और उत्पादों को भी व्यापक बाजार मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इसके आसपास एयरोसिटी विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है। सरकार कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कांगड़ा के विकास को पर्यटन से जोड़ने की योजना के तहत क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, हवाई संपर्क में सुधार होने से न केवल घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि विदेशों से आने वाले यात्रियों के लिए भी हिमाचल तक पहुंच आसान होगी।
इसके अलावा राज्य सरकार ने प्रत्येक जिला मुख्यालय में या उसके आसपास हैलीपोर्ट विकसित करने का निर्णय लिया है। इससे हिमाचल के अलग-अलग हिस्सों के बीच हवाई संपर्क को मजबूती मिलेगी। हेलीकॉप्टर कनेक्टिविटी केवल पर्यटन के लिए ही उपयोगी नहीं होगी, बल्कि आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और दुर्गम क्षेत्रों तक तेजी से पहुंच बनाने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
हिमाचल में साहसिक पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश इस क्षेत्र में देश और दुनिया के प्रमुख गंतव्यों में शामिल होने की क्षमता रखता है। पहाड़ों और नदियों से घिरे राज्य में ट्रैकिंग, स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग, रिवर राफ्टिंग, पर्वतारोहण, कैंपिंग, माउंटेन साइक्लिंग और वाटर स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियों को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है।
उन्होंने बीड़-बिलिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि इस क्षेत्र ने हिमाचल को अंतरराष्ट्रीय साहसिक पर्यटन मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई है। पैराग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध बीड़-बिलिंग की सफलता से यह साबित होता है कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में साहसिक गतिविधियों को व्यवस्थित रूप से विकसित करके बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन की हिमाचल में मौजूद संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शक्तिपीठों, प्राचीन मंदिरों, बौद्ध मठों और गुरुद्वारों की समृद्ध परंपरा है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु और पर्यटक इन धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। धार्मिक पर्यटन को अन्य पर्यटन गतिविधियों के साथ जोड़कर पर्यटकों के ठहराव की अवधि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर के बीच हिमाचल प्रदेश में 3.11 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। इनमें लगभग 1.66 करोड़ धार्मिक पर्यटक शामिल थे। इससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन की व्यापक क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में भी हिमाचल में पर्यटन गतिविधियां जारी हैं। जुलाई 2026 तक 1.06 करोड़ पर्यटक प्रदेश का दौरा कर चुके हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हिमाचल देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है और आने वाले समय में नए क्षेत्रों को पर्यटन मानचित्र पर लाकर इस संख्या को और बढ़ाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने होटल एवं हॉस्पिटैलिटी उद्योग, ट्रैवल एजेंटों, टूर ऑपरेटरों और पर्यटन से जुड़े अन्य हितधारकों से राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले पर्यटन क्षेत्र को उस स्तर तक नहीं ले जा सकती, जिसकी प्रदेश में क्षमता है। इसके लिए निजी क्षेत्र, होटल उद्योग, यात्रा कंपनियों, स्थानीय कारोबारियों और सरकार के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
उन्होंने पर्यटन उद्योग से आग्रह किया कि हिमाचल के पर्यटन उत्पादों को नए तरीके से देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जाए। पर्यटकों को केवल शिमला, मनाली या दूसरे पारंपरिक गंतव्यों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ग्रामीण हिमाचल, स्थानीय संस्कृति, प्रकृति आधारित पर्यटन और साहसिक गतिविधियों से परिचित कराया जाए।
सुक्खू ने कहा कि पर्यटन का विस्तार होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। होटल, होमस्टे, परिवहन, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और छोटे कारोबार सीधे तौर पर पर्यटन से लाभ उठा सकते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था विकसित होने से लोगों को अपने गांव और क्षेत्र में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता ही प्रदेश की सबसे बड़ी पर्यटन पूंजी है। इसलिए नए पर्यटन स्थलों को विकसित करते समय प्रकृति, स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक जीवनशैली का संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
वाराणसी में देशभर के पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के सामने मुख्यमंत्री का संदेश इसी व्यापक रणनीति को दर्शाता है। हिमाचल अब केवल कुछ प्रसिद्ध हिल स्टेशनों तक सीमित पर्यटन मॉडल से आगे बढ़कर अनुभव, संस्कृति, साहसिक गतिविधियों, आध्यात्मिकता, वेलनेस और ग्रामीण जीवन पर आधारित पर्यटन को विस्तार देने की तैयारी में है।
सरकार की योजनाओं और निजी पर्यटन उद्योग के सहयोग से यदि प्रदेश के अनछुए स्थलों को व्यवस्थित ढंग से विकसित किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में हिमाचल के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, नए हवाई संपर्क, हैलीपोर्ट, महिला केंद्रित पर्यटन नीति, होमस्टे और साहसिक पर्यटन जैसी पहलों से राज्य को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने होटल उद्योग और पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों से इसी दिशा में साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया। उनका कहना है कि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय जीवनशैली को दुनिया के सामने नए अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इससे प्रदेश में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के साथ पर्यटन के आर्थिक लाभ को अधिक व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।




