हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वंदे मातरम् के गायन को लेकर उठे विवाद के बीच भाजपा विधायक दल ने रविवार को शिमला के रिज मैदान पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ जवाबी धरना दिया। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में भाजपा विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने हुए धरने के दौरान भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया।
कार्यक्रम के दौरान माहौल पूरी तरह राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत नजर आया। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने देशभक्ति से जुड़े गीतों के जरिए कार्यकर्ताओं में जोश भरा। उन्होंने ‘रंग दे बसंती चोला’ सहित कई देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिनमें भाजपा विधायक और कार्यकर्ता भी उत्साह के साथ शामिल हुए। कुछ ही देर में रिज मैदान देशभक्ति के गीतों और नारों से गूंज उठा।
धरने को संबोधित करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि वंदे मातरम् के सम्मान का मुद्दा किसी राजनीतिक दल के हित से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय भावना से संबंधित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर भाजपा किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगी। उनके अनुसार, भाजपा विधायक दल की विधानसभा में केवल यही मांग थी कि सदन में वंदे मातरम् का पूरे सम्मान और गरिमा के साथ गायन किया जाए।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले तैयार किए गए कार्यक्रम में वंदे मातरम् के गायन का उल्लेख किया गया था, लेकिन बाद में इसे कार्यक्रम से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों ने इस मुद्दे को सदन के भीतर उठाया और सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की, लेकिन सरकार की ओर से ऐसा रुख नहीं अपनाया गया जिससे विवाद समाप्त हो सके। इसके परिणामस्वरूप विधानसभा में गतिरोध की स्थिति बनी।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर भाजपा का रुख स्पष्ट है। उनका कहना था कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और उनसे जुड़ी भावनाओं को राजनीतिक विवादों से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान व्यक्त करना किसी राजनीतिक दल के निर्देश पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
जयराम ठाकुर ने कांग्रेस के पुराने रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1937 में कांग्रेस की ओर से वंदे मातरम् के कुछ अंशों को अपनाने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने वर्ष 1938 में जवाहरलाल नेहरू की ओर से मोहम्मद अली जिन्ना को लिखे गए पत्र का भी संदर्भ दिया और कहा कि उस समय भी वंदे मातरम् को लेकर आपत्तियों और चर्चा का उल्लेख मिलता है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में इस मुद्दे को आज के संवैधानिक और लोकतांत्रिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, किसी राजनीतिक दल की आंतरिक संस्था का फैसला देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी के किसी निर्णय को लेकर कहा कि देश संविधान और संसद की स्थापित व्यवस्थाओं के आधार पर चलता है, किसी राजनीतिक संगठन के निर्देश से नहीं।
भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी का स्पष्ट मत है कि वंदे मातरम् के प्रति पूर्ण श्रद्धा और सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस सरकार पर इस विषय को अनावश्यक रूप से विवादित बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि सदन में राष्ट्रगीत के सम्मान के साथ गायन की मांग की गई थी तो इसे स्वीकार करने में सरकार को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए थी।
धरने के दौरान जयराम ठाकुर ने भाजपा विधायकों पर राष्ट्रगान के अपमान के लगाए जा रहे आरोपों पर भी कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि विधानसभा में राष्ट्रगान के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के सदस्य सम्मानपूर्वक खड़े रहे और राष्ट्रगान में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान के बाद भाजपा विधायक दल ने वंदे मातरम् के गायन की मांग रखी थी। जयराम ठाकुर ने दावा किया कि भाजपा विधायक पिछले कई दिनों से विधानसभा की संबंधित कार्यवाही का वीडियो उपलब्ध करवाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि विपक्ष के विधायकों पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया जा रहा है तो विधानसभा की पूरी कार्यवाही का वीडियो सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार, इस मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात की जा चुकी है। विपक्ष के सभी विधायकों की ओर से विधानसभा सचिव को लिखित रूप में संबंधित वीडियो उपलब्ध करवाने का आग्रह भी किया गया है। हालांकि, उनके मुताबिक अब तक वीडियो उपलब्ध नहीं कराया गया है।
जयराम ठाकुर ने कांग्रेस नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि भाजपा विधायकों पर लगाए गए आरोप सही हैं तो विधानसभा की कार्यवाही का पूरा वीडियो जनता के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीडियो सामने आने के बाद स्थिति खुद स्पष्ट हो जाएगी और आरोपों की वास्तविकता भी सामने आ सकती है।
वंदे मातरम् के मुद्दे के साथ-साथ जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर विधानसभा में जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों से बचने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन में प्रदेश के लोगों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा करना चाहता है और सरकार से उसके चुनावी वादों पर जवाब मांगना उसका लोकतांत्रिक अधिकार है।
उन्होंने कांग्रेस के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए रोजगार संबंधी वादे का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने पांच वर्षों में पांच लाख रोजगार देने और हर साल एक लाख नौकरियां उपलब्ध कराने की गारंटी दी थी। भाजपा अब सरकार से इस गारंटी की वास्तविक स्थिति जानना चाहती है। विपक्ष यह जानना चाहता है कि अब तक कितने युवाओं को रोजगार मिला और सरकार अपने वादे को पूरा करने की दिशा में कहां तक पहुंची है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा विधायक दल ने प्रश्नकाल चलाने और विधानसभा की कार्यवाही में पूरा सहयोग देने की बात कही है। उनके अनुसार विपक्ष चाहता है कि सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा हो, सवाल पूछे जाएं और सरकार जनता के सामने अपनी उपलब्धियों तथा योजनाओं की जानकारी रखे।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल विधानसभा में पहली बार ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है, जब विपक्ष सदन की कार्यवाही चलाने के लिए तैयार है, जबकि सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री स्वयं नारे लगाते हुए सदन से बाहर आ रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए असामान्य स्थिति बताते हुए सरकार पर सदन की कार्यवाही से बचने का आरोप लगाया।
भाजपा नेता ने कहा कि विधानसभा जनता की समस्याओं और प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का सर्वोच्च मंच है। ऐसे में राजनीतिक टकराव के कारण जनहित के विषय पीछे नहीं छूटने चाहिए। उनका कहना था कि बेरोजगारी, आर्थिक स्थिति, विकास कार्यों और सरकार की गारंटियों जैसे मुद्दों पर विपक्ष को सवाल पूछने और सरकार को जवाब देने का अवसर मिलना चाहिए।
रिज मैदान पर आयोजित धरने के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वंदे मातरम् के समर्थन में अपना रुख जाहिर किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषयों पर पार्टी अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी। वहीं, देशभक्ति गीतों के जरिए कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन को राजनीतिक विरोध के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति के कार्यक्रम का रूप भी दिया।
इस पूरे विवाद ने हिमाचल की राजनीति में विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह माहौल गर्म कर दिया है। एक तरफ भाजपा वंदे मातरम् के सम्मान और विधानसभा की कार्यवाही का वीडियो सार्वजनिक करने की मांग पर अड़ी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से भाजपा विधायकों के आचरण पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण विधानसभा की कार्यवाही भी राजनीतिक टकराव के केंद्र में आ गई है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा का उद्देश्य सदन में व्यवधान पैदा करना नहीं, बल्कि प्रदेश के लोगों से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाना है। उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्ष की आवाज सुननी चाहिए और जनता से किए गए वादों का हिसाब देना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् के सम्मान और जनहित के मुद्दों को लेकर भाजपा अपने रुख पर कायम रहेगी।
फिलहाल वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद राजनीतिक संघर्ष का बड़ा मुद्दा बन गया है। शिमला के रिज मैदान पर भाजपा के जवाबी धरने और सामूहिक गायन ने इस विवाद को विधानसभा से बाहर भी प्रमुख राजनीतिक बहस में बदल दिया है। आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही, वीडियो उपलब्ध कराने की मांग और रोजगार की गारंटी जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।




