मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में सर्दी, खांसी, जुकाम और नाक बहने जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। ऐसे समय में कई माता-पिता डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय घर में पहले से मौजूद सिरप या दवा बच्चे को दे देते हैं। लेकिन अब सरकार के एक नए फैसले के बाद इस तरह दवा देने को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने कुछ ऐसी कॉम्बिनेशन दवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड जैसे घटक शामिल होते हैं।
इन दवाओं का इस्तेमाल लंबे समय से सर्दी-जुकाम, नाक बहने और एलर्जी जैसे लक्षणों से राहत के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, छोटे बच्चों में इनका इस्तेमाल जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों की सलाह और संबंधित तकनीकी सिफारिशों के बाद सरकार ने इन दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण को लेकर सख्त कदम उठाया है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छोटे बच्चों में दवाओं का असर वयस्कों से अलग हो सकता है। कम उम्र में शरीर का वजन, दवा को पचाने की क्षमता और दवाओं के प्रति संवेदनशीलता अलग होती है। ऐसे में किसी दवा की मात्रा या उसका संयोजन गलत होने पर परेशानी बढ़ सकती है।
सरकार ने किन दवाओं को लेकर लिया बड़ा फैसला?
सरकार ने क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन यानी FDC उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगाने का फैसला किया है। FDC ऐसी दवाएं होती हैं जिनमें एक ही उत्पाद में दो या उससे अधिक सक्रिय औषधीय घटक मौजूद होते हैं।
क्लोरफेनिरामाइन मैलेट मुख्य रूप से एलर्जी और नाक बहने जैसे लक्षणों को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जबकि फिनाइलएफ्रिन नाक बंद होने की समस्या में राहत देने के लिए इस्तेमाल होने वाले घटकों में शामिल है। यही वजह है कि इन दोनों को मिलाकर बनाई गई दवाएं सर्दी-जुकाम से जुड़ी कई परेशानियों के लिए बाजार में उपलब्ध रही हैं।
लेकिन छोटे बच्चों के लिए इन दवाओं की सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। इसी आधार पर सरकार ने इन संयोजनों पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को ऐसी दवाएं न दी जाएं, जिनसे फायदे की तुलना में जोखिम अधिक हो सकता है।
फैसला अचानक नहीं लिया गया
सरकार का यह कदम किसी एक घटना के बाद अचानक लिया गया फैसला नहीं है। इसके पीछे विशेषज्ञों की राय और दवा नियमन से जुड़ी प्रक्रिया रही है। संबंधित एक्सपर्ट कमेटी की समीक्षा के बाद इस विषय को ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड यानी DTAB के सामने भी रखा गया।
विशेषज्ञों ने माना कि छोटे बच्चों में सर्दी-जुकाम के लक्षणों के लिए ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जिन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा सकता है। इसलिए ऐसे कॉम्बिनेशन को बाजार में उपलब्ध रखने की आवश्यकता पर सवाल उठे।
दवा से जुड़ी नीतियों में बच्चों की उम्र और उनकी सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी वजह से सरकार ने निर्माताओं के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संबंधित दवाओं की पैकेजिंग और लेबलिंग में आवश्यक चेतावनी का उल्लेख करना जरूरी होगा, ताकि दवा खरीदने वाले व्यक्ति को उसके इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों की जानकारी मिल सके।
माता-पिता के लिए क्यों जरूरी है सावधानी?
बच्चों को सर्दी या खांसी होने पर घर में रखी पुरानी दवा देना एक आम गलती हो सकती है। कई बार माता-पिता सोचते हैं कि पहले बच्चे को जिस सिरप से आराम मिला था, उसे दोबारा भी दिया जा सकता है। लेकिन हर बार लक्षणों का कारण एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।
इसके अलावा बच्चे की उम्र, वजन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार दवा की जरूरत बदल सकती है। किसी बड़े व्यक्ति के लिए सामान्य मानी जाने वाली दवा छोटे बच्चे के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
खास तौर पर छोटे बच्चों को कफ और कोल्ड की दवाएं अपने स्तर पर देने से बचना चाहिए। अगर बच्चा लगातार खांस रहा है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, तेज बुखार है, खाना-पीना कम कर रहा है या उसकी हालत सामान्य से अलग दिखाई दे रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
पहले भी बच्चों की कफ सिरप को लेकर हो चुकी है सख्ती
बच्चों को कफ सिरप देने को लेकर सरकार पहले भी चेतावनी जारी कर चुकी है। अक्टूबर 2025 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने पर रोक से संबंधित कदम उठाया था।
यह कार्रवाई मध्य प्रदेश और राजस्थान में कथित तौर पर कफ सिरप के सेवन के बाद बच्चों की मौत की घटनाओं के सामने आने के बाद हुई थी। इन घटनाओं ने बच्चों के लिए बिना चिकित्सकीय सलाह के कफ सिरप के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
उस दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से यह भी कहा गया था कि सामान्य तौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप देने से बचना चाहिए। हालांकि, किसी विशेष परिस्थिति में दवा की आवश्यकता है या नहीं, इसका निर्णय डॉक्टर बच्चे की स्थिति देखकर कर सकते हैं।
इस पृष्ठभूमि में अब कुछ खास FDC दवाओं को लेकर सरकार की नई पाबंदी बच्चों की दवा सुरक्षा को लेकर जारी व्यापक सतर्कता का हिस्सा मानी जा रही है।
हर सर्दी-जुकाम में दवा जरूरी नहीं
बच्चों में होने वाली हर सर्दी या जुकाम के लिए दवा देना जरूरी नहीं होता। सामान्य वायरल संक्रमण के कारण होने वाले कई मामलों में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे संक्रमण से मुकाबला करती है और बच्चा कुछ दिनों में बेहतर महसूस करने लगता है।
इसलिए केवल नाक बहने या हल्की खांसी देखकर तुरंत कफ सिरप खरीदना जरूरी नहीं है। कई मामलों में आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और बच्चे की सामान्य देखभाल ही पर्याप्त हो सकती है। हालांकि, बहुत छोटे बच्चों के मामले में लक्षणों को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।
अगर बच्चा बहुत सुस्त दिखाई दे, सांस लेने में परेशानी हो, लगातार उल्टी करे, पानी या दूध न पी पाए, तेज बुखार बना रहे या उसकी स्थिति तेजी से बिगड़ रही हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
मेडिकल स्टोर से दवा लेते समय भी रहें सतर्क
कई बार लोग मेडिकल स्टोर पर जाकर केवल बच्चे की उम्र बताकर खांसी या जुकाम की दवा मांग लेते हैं। ऐसा करने से बचना चाहिए। दवा खरीदने से पहले उसके लेबल पर मौजूद सक्रिय घटकों और उम्र से जुड़ी चेतावनियों को समझना जरूरी है।
सरकार की नई कार्रवाई के बाद माता-पिता को खास तौर पर यह देखना चाहिए कि बच्चों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा में कौन-कौन से घटक मौजूद हैं। किसी पुराने प्रिस्क्रिप्शन या परिवार के किसी दूसरे सदस्य की दवा को बच्चे के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है।
दवा का नाम एक जैसा दिखने के बावजूद अलग-अलग उत्पादों में घटकों की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए केवल ब्रांड नाम के आधार पर निर्णय लेने के बजाय चिकित्सक या योग्य फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।
लेबल पर चेतावनी का उद्देश्य क्या है?
दवा की पैकेजिंग पर चेतावनी लिखने का मुख्य उद्देश्य लोगों को जोखिम के बारे में पहले से जानकारी देना है। कई बार उपभोक्ता दवा की बोतल पर मौजूद चेतावनी को पढ़े बिना ही उसका इस्तेमाल शुरू कर देते हैं।
बच्चों से जुड़ी दवाओं में उम्र संबंधी निर्देश विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए पैकेट पर स्पष्ट जानकारी होने से माता-पिता और देखभाल करने वालों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि दवा किन उम्र के बच्चों के लिए उपयुक्त नहीं है।
सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कोशिश यही है कि ऐसी दवाओं का इस्तेमाल बिना उचित सलाह के न हो और बच्चों को अनावश्यक दवाओं के संपर्क से बचाया जा सके।
छोटे बच्चों के मामले में डॉक्टर की सलाह सबसे अहम
सर्दी, खांसी और नाक बंद होने जैसी समस्याएं देखने में मामूली लग सकती हैं, लेकिन छोटे बच्चों में इनका असर कभी-कभी गंभीर भी हो सकता है। इसलिए माता-पिता को खुद से दवा शुरू करने की बजाय बच्चे की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।
अगर लक्षण हल्के हैं और बच्चा सामान्य रूप से खाना-पीना और खेलना जारी रख रहा है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार सामान्य देखभाल की जा सकती है। वहीं, लक्षण बढ़ने पर देरी नहीं करनी चाहिए।
विशेष रूप से चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दवा का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। सरकार की नई पाबंदी का उद्देश्य भी यही है कि ऐसे बच्चों तक संभावित रूप से जोखिम वाली दवाओं की पहुंच कम हो।
क्या करें माता-पिता?
माता-पिता को बच्चे को कोई भी कफ या कोल्ड सिरप देने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। घर में बची हुई पुरानी दवा को बिना जांचे दोबारा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बच्चे की उम्र और वजन के आधार पर दवा की मात्रा तय होती है, इसलिए वयस्कों की दवा या किसी दूसरे बच्चे की दवा उसे नहीं देनी चाहिए।
सर्दी-जुकाम के दौरान बच्चे को पर्याप्त आराम देना, सामान्य रूप से तरल पदार्थ उपलब्ध कराना और उसकी हालत पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। अगर बच्चा असामान्य रूप से सुस्त हो, सांस लेने में दिक्कत हो या लक्षण लगातार बिगड़ रहे हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
सरकार की नई पाबंदी का संदेश साफ है कि बच्चों की दवा को लेकर लापरवाही नहीं की जा सकती। खासकर कम उम्र के बच्चों में बिना डॉक्टर की सलाह के कफ और सर्दी-जुकाम की दवाएं देना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए किसी भी सिरप को सिर्फ इसलिए न दें क्योंकि वह पहले घर में इस्तेमाल हो चुका है। बच्चे की उम्र, लक्षण और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।




