पंजाब में स्तन कैंसर से जूझ रही महिलाओं के लिए इलाज का खर्च बड़ी चुनौती न बने, इसके लिए मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) अहम भूमिका निभा रही है। योजना के तहत पात्र परिवारों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक परेशानी के कारण किसी मरीज का उपचार बीच में न रुके।
स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसर में शामिल है। बीमारी में स्तन की असामान्य कोशिकाएं तेजी से और अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं। इसका उपचार केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं रहता। बीमारी की अवस्था और मरीज की स्थिति के आधार पर सर्जरी के साथ कीमोथेरेपी, रेडिएशन, हार्मोनल थेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी या इम्यूनोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है। कई मरीजों को उपचार पूरा होने के बाद भी लंबे समय तक नियमित जांच और फॉलो-अप कराना पड़ता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च (ICMR-NCDIR) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में करीब 2,16,108 महिलाओं में स्तन कैंसर की पहचान हुई थी। वर्ष 2025 के लिए यह संख्या बढ़कर लगभग 2,32,832 होने का अनुमान लगाया गया था। कार्यक्रम के अनुमानों के मुताबिक 74 वर्ष की उम्र तक प्रत्येक 29 भारतीय महिलाओं में से एक को जीवनकाल में स्तन कैंसर होने की संभावना रहती है।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आर्थिक स्थिति किसी पात्र मरीज के इलाज में रुकावट न बने। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में उपचार कई चरणों में होता है और लंबे समय तक चलने वाले इलाज का खर्च परिवारों पर भारी पड़ सकता है। ऐसे में एमएमएसवाई के जरिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र मरीज को केवल पैसों की कमी के कारण बेहतर और आवश्यक कैंसर उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए। सरकार की कोशिश है कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में आर्थिक असमानता कम हो और जरूरतमंद परिवारों को समय पर उपचार मिल सके।
बठिंडा स्थित एडवांस्ड कैंसर इंस्टीट्यूट की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. करुणा सिंह के अनुसार, स्तन कैंसर का उपचार मरीज की बीमारी की अवस्था और उसके जैविक गुणों पर निर्भर करता है। कुछ मरीजों का शुरुआती उपचार कुछ महीनों में पूरा हो सकता है, जबकि अन्य मरीजों को लंबे समय तक दवाओं या अन्य थेरेपी की जरूरत पड़ सकती है।
उन्होंने बताया कि बीमारी के स्थानीय या आसपास के हिस्सों तक सीमित होने की स्थिति में उपचार के तहत कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार हार्मोन थेरेपी भी उपचार का हिस्सा बन सकती है। दूसरी ओर, यदि बीमारी शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल चुकी हो तो मरीज की व्यक्तिगत स्थिति को ध्यान में रखते हुए कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी उपचार पद्धतियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
डॉ. सिंह ने बताया कि इलाज पूरा होने के बाद भी मरीजों की चिकित्सकीय निगरानी जारी रहती है। नियमित फॉलो-अप के दौरान डॉक्टर मरीज की रिकवरी, उपचार से होने वाले संभावित दुष्प्रभावों और बीमारी के दोबारा लौटने के संकेतों पर नजर रखते हैं। आवश्यकता के अनुसार विभिन्न क्लीनिकल जांच और परीक्षण भी किए जाते हैं।
यानी स्तन कैंसर का इलाज केवल सर्जरी या कीमोथेरेपी तक सीमित नहीं है। मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार का पूरा क्रम कई महीनों तक चल सकता है और कुछ मामलों में वर्षों तक नियमित चिकित्सा निगरानी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में इलाज का खर्च वहन करने में सक्षम होना उपचार पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA), पंजाब के आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत स्तन कैंसर से जुड़े 15,494 उपचार किए जा चुके हैं। इन उपचारों पर कुल 26.59 करोड़ रुपये की लागत दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक योजना का लाभ अलग-अलग आयु वर्ग की महिलाओं को मिला है।
सबसे अधिक 4,515 उपचार 50 से 59 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं से जुड़े रहे। इसके बाद 40 से 49 वर्ष आयु वर्ग में 4,141 उपचार और 60 से 69 वर्ष आयु वर्ग में 3,557 उपचार दर्ज किए गए। 30 से 39 वर्ष की महिलाओं में 1,332 उपचार दर्ज हुए।
यदि 40 से 69 वर्ष के तीन आयु वर्गों को एक साथ देखा जाए तो इनमें कुल 12,213 उपचार दर्ज हुए हैं। इससे पता चलता है कि इस आयु अवधि में स्तन कैंसर के उपचार की जरूरत वाली महिलाओं की संख्या काफी अधिक है। हालांकि, बीमारी कम उम्र की महिलाओं में भी सामने आ सकती है और इसलिए किसी भी उम्र में संदिग्ध लक्षणों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, अमृतसर के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनराज सिंह कंग ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में स्तन कैंसर के उपचार के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के अलावा हार्मोनल थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी भी शामिल हैं।
रेडिएशन उपचार के क्षेत्र में VMAT, 3D, IMRT, IGRT और ब्रैकीथेरेपी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल मरीज की जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक किस मरीज के लिए कौन-सा उपचार उपयुक्त होगा, इसका निर्णय बीमारी की अवस्था, ट्यूमर की प्रकृति और अन्य चिकित्सकीय जांच के आधार पर किया जाता है।
डॉ. कंग ने बताया कि स्तन कैंसर के कुछ मामलों में आनुवंशिक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। अपेक्षाकृत कम उम्र में, विशेष रूप से मेनोपॉज से पहले बीमारी सामने आने पर कुछ मामलों में इसका व्यवहार अधिक आक्रामक हो सकता है। वहीं अधिक उम्र की महिलाओं में कई मामलों में हार्मोन रिसेप्टर पॉजिटिव बीमारी देखने को मिलती है, जो अक्सर कम आक्रामक होती है और शुरुआती चरणों में इसका पूर्वानुमान बेहतर हो सकता है।
उन्होंने बताया कि सर्जरी के भी अलग-अलग विकल्प होते हैं। कुछ मरीजों में ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी की जा सकती है, जिसमें कैंसर प्रभावित हिस्से को निकालते हुए स्तन को यथासंभव सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है। दूसरी स्थिति में मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी यानी MRM की जरूरत पड़ सकती है।
किस मरीज में कौन-सी सर्जरी की जाएगी, यह केवल बीमारी के नाम के आधार पर तय नहीं होता। इसके लिए बायोप्सी रिपोर्ट, ट्यूमर की संख्या और आकार, लिम्फ नोड्स की स्थिति और ट्यूमर की अन्य जैविक विशेषताओं सहित कई पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है।
इस तरह कैंसर के उपचार में मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार उपचार की पूरी योजना तैयार की जाती है। कई बार उपचार के अलग-अलग चरणों को एक-दूसरे के साथ जोड़कर चलाना पड़ता है। इसलिए उपचार की निरंतरता बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
पंजाब में एमएमएसवाई के तहत उपचार का लाभ लेने वाली महिलाओं के अनुभव भी सामने आए हैं। संगरूर की रहने वाली राजिंदर कौर का टाटा मेमोरियल अस्पताल में क्रायोप्लास्टी के साथ ब्रेस्ट-कंजर्विंग सर्जरी से उपचार किया गया। उनके पति परबू सिंह ने योजना को परिवार के लिए बड़ी मदद बताया।
उन्होंने कहा कि योजना के कारण उनकी पत्नी को उपचार के लिए बड़े आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ा। परिवार के मुताबिक उन्हें गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हुई और इलाज के खर्च को लेकर चिंता काफी कम हुई।
डॉ. करुणा सिंह ने भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एमएमएसवाई को उपयोगी बताया। उनके अनुसार योजना से मिलने वाली सहायता कई मरीजों को अपना उपचार पूरा करने में मदद कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का उद्देश्य डॉक्टरों के चिकित्सकीय निर्णयों को प्रभावित करना नहीं, बल्कि उपचार की राह में आर्थिक कठिनाइयों को बाधा बनने से रोकना है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में मरीज और उसके परिवार पर केवल अस्पताल का खर्च ही नहीं पड़ता। लंबे समय तक चलने वाली दवाएं, जांच, अस्पताल तक आने-जाने का खर्च और इलाज के दौरान काम से होने वाली आय का नुकसान भी परिवार के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का महत्व और बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्तन कैंसर का समय पर पता लगना उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बीमारी की अवस्था, ट्यूमर की प्रकृति और मरीज की समग्र स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उपचार की सफलता और विकल्पों का निर्धारण किया जाता है। इसलिए चिकित्सकीय सलाह, जांच और आवश्यक फॉलो-अप को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एमएमएसवाई के जरिए पंजाब सरकार का फोकस गंभीर बीमारियों के उपचार को पात्र परिवारों के लिए अधिक सुलभ बनाने पर है। स्तन कैंसर के हजारों उपचारों के आंकड़े बताते हैं कि इस तरह की स्वास्थ्य योजनाएं उन परिवारों के लिए आर्थिक सहारा बन सकती हैं, जिनके लिए लंबे समय तक चलने वाला कैंसर उपचार सामान्य परिस्थितियों में काफी महंगा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कैंसर उपचार को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। बीमारी की पहचान के बाद मरीज को उपचार की पूरी प्रक्रिया समझना, डॉक्टरों की सलाह के अनुसार इलाज जारी रखना और निर्धारित समय पर फॉलो-अप कराना आवश्यक है।
पंजाब में स्तन कैंसर के उपचार से जुड़े ये आंकड़े इस बात को रेखांकित करते हैं कि बीमारी से लड़ाई केवल अस्पताल तक सीमित नहीं है। इसके लिए समय पर पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सा, लंबे उपचार को जारी रखने की क्षमता और नियमित निगरानी—इन सभी की जरूरत होती है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से सरकार आर्थिक बाधा को कम करने का प्रयास कर रही है, ताकि पात्र मरीज इलाज अधूरा छोड़ने के बजाय आवश्यक चिकित्सा सेवाएं लगातार प्राप्त कर सकें।




