तरनतारन जिले में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को और प्रभावी बनाने के लिए पंजाब सरकार ने प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ETO ने बुधवार को तरनतारन का दौरा कर ‘वॉर ऑन ड्रग्स’ अभियान की प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान जिला स्तर पर अधिकारियों और नशा विरोधी अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठक की गई, जिसमें नशे की रोकथाम, तस्करी पर शिकंजा कसने और युवाओं को नशे से दूर रखने के उपायों पर चर्चा हुई।
बैठक में तरनतारन के SSP सुरेंद्र लांबा, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (जनरल) डॉ. आदित्य शर्मा और एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (रूरल डेवलपमेंट) संजीव कुमार समेत सिविल और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा माझा जोन इंचार्ज दीक्षित धवन, जिला कोऑर्डिनेटर अमरिंदर सिंह एमी और नशा विरोधी मोर्चे की पूरी टीम ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
मंत्री हरभजन सिंह ETO ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसके साथ जागरूकता और पुनर्वास के प्रयासों को भी लगातार मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का लक्ष्य राज्य को नशे की समस्या से पूरी तरह मुक्त करना है और इसके लिए सरकार के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी भूमिका निभानी होगी।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ड्रग्स के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियान चला रही है। सरकार की ओर से नशा तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और बड़ी संख्या में तस्करों को जेल भेजा गया है। दूसरी ओर, नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना है। खास तौर पर युवाओं को यह समझाने की जरूरत है कि नशा न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और भविष्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उसके परिवार और पूरे समाज पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।
तस्करों पर कार्रवाई के साथ युवाओं का पुनर्वास भी जरूरी
हरभजन सिंह ETO ने कहा कि सरकार की रणनीति दो स्तरों पर काम कर रही है। एक तरफ नशे की सप्लाई चेन और तस्करी से जुड़े लोगों पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज और पुनर्वास के जरिए सामान्य जीवन की ओर लौटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल नशे का आदी मानकर उसे समाज से अलग कर देना समस्या का समाधान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि नशे की गिरफ्त में आए लोगों को उचित उपचार, परिवार का सहयोग और समाज में दोबारा सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।
मंत्री ने ड्रग डिटॉक्सिफिकेशन फ्रंट से जुड़े प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। पुलिस और सिविल प्रशासन के साथ नशा विरोधी टीमों को मिलकर जमीनी स्तर पर काम करना होगा।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नशे के खिलाफ चल रहे अभियानों की नियमित समीक्षा की जाए और जहां कहीं भी कमियां सामने आएं, उन्हें तत्काल दूर किया जाए। उनका जोर इस बात पर रहा कि अभियान केवल बैठकों और कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर गांवों और शहरों के स्तर पर दिखाई देना चाहिए।
‘नशे के खिलाफ जंग पूरे समाज की जिम्मेदारी’
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह सामाजिक स्तर पर लड़ी जाने वाली लड़ाई है, जिसमें माता-पिता, शिक्षक, धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाएं, युवा संगठन, पंचायतें और आम नागरिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर वर्ग नशे के खिलाफ एकजुट होकर काम करे तो पंजाब को ड्रग-फ्री बनाने का लक्ष्य हासिल करना संभव है। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए उन्हें खेल, शिक्षा, रोजगार और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत है।
मंत्री ने विशेष रूप से जागरूकता अभियानों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ संदेश केवल प्रशासनिक अधिकारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी है। स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और शहरी इलाकों में जागरूकता गतिविधियों को प्रभावी तरीके से चलाने की आवश्यकता है।
अधिकारियों ने साझा की अभियान की प्रगति
बैठक के दौरान SSP सुरेंद्र लांबा, ADC (G) डॉ. आदित्य शर्मा और अन्य अधिकारियों ने जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों और जागरूकता गतिविधियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने पुलिस की ओर से की जा रही कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में भी बताया।
बैठक में नशे की सप्लाई पर रोक लगाने, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, लोगों में जागरूकता बढ़ाने और नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों को उपचार एवं पुनर्वास से जोड़ने जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाकर काम किया जा रहा है। पुलिस के साथ-साथ स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और अन्य संबंधित विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
विधानसभा स्तर तक अभियान को मजबूत करने पर जोर
बैठक में जिले के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े नशा विरोधी अभियान के पदाधिकारी भी शामिल हुए। तरनतारन विधानसभा क्षेत्र से आलमबीर सिंह रंधावा, खेमकरण से जोगिंदर सिंह संधू, पट्टी से परमजीत सिंह चंबल और खडूर साहिब से जसकरन सिंह लाडी ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
इसके अलावा नशा विरोधी आंदोलन के वाइस जिला कोऑर्डिनेटर कुलदीप सिंह ढिल्लों और वाइस कोऑर्डिनेटर सरबजीत सिंह समेत अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में स्थानीय स्तर पर नशे के खिलाफ जागरूकता और अभियान को मजबूत करने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
मंत्री ने कहा कि नशा विरोधी मुहिम को गांव और वार्ड स्तर तक ले जाना जरूरी है। स्थानीय प्रतिनिधियों और अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रशासन के साथ मिलकर ऐसे क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए जहां युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विशेष जागरूकता गतिविधियों की आवश्यकता है।
वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विभागों की भागीदारी
समीक्षा बैठक में SDM तरनतारन डॉ. करनवीर सिंह, SP सुखनिंदर सिंह, SP डॉ. रिपुतमान सिंह, तहसीलदार अर्चना शर्मा और नायब तहसीलदार करनवीर सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा रणजीत सिंह धुंधा, मलकीत सिंह, गुरवंत सिंह रोरांवाली, सुखविंदर सिंह हुंदल, बलजिंदर सिंह चुसलेवार और सोनवीर सिंह समेत नशा विरोधी अभियान से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिले के अलग-अलग ब्लॉकों के कोऑर्डिनेटर और विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि नशे के खिलाफ कार्रवाई को लगातार जारी रखने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक माहौल तैयार किया जाए। प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे अभियानों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
हरभजन सिंह ETO ने कहा कि नशे की समस्या का स्थायी समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से संभव नहीं है। तस्करों पर कानून के तहत कार्रवाई जरूरी है, लेकिन साथ ही नशे की मांग को कम करना और युवाओं को इस बुराई से दूर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि पंजाब में नशे के खिलाफ ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जहां युवा नशे के बजाय शिक्षा, रोजगार, खेल और सकारात्मक गतिविधियों को अपना भविष्य बनाने का माध्यम समझें।
तरनतारन में हुई यह समीक्षा बैठक इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा रही, जिसमें पुलिस कार्रवाई, प्रशासनिक निगरानी, जनजागरूकता और पुनर्वास को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि ‘वॉर ऑन ड्रग्स’ अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच तालमेल और नियमित समीक्षा आगे भी जारी रहेगी।




