हिमाचल प्रदेश में अनुबंध आधार पर सेवाएं दे रहे हजारों कर्मचारियों के लिए सरकार ने नियमितीकरण की प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और सुचारू बनाने की दिशा में कदम उठाया है। अब जिन अनुबंध कर्मचारियों ने निर्धारित शर्तों के अनुसार सरकारी सेवा में दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है, उन्हें नियमित होने के आदेश के लिए लंबे समय तक विभागीय कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर लगाने की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया में अनावश्यक विभागीय देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार के इस निर्णय से मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब दो वर्ष पहले सरकारी सेवा में नियुक्त हुए लगभग 1000 से 1500 अनुबंध कर्मचारियों को लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा निर्धारित नियम और पात्रता पूरी करने वाले दैनिक भोगी कर्मचारियों को भी चरणबद्ध तरीके से नियमितीकरण का लाभ दिया जाएगा। सरकार की ओर से विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र कर्मचारियों से संबंधित औपचारिकताएं समय रहते पूरी की जाएं, ताकि निर्धारित तिथि आने के बाद नियमितीकरण के आदेश जारी करने में किसी तरह की अड़चन न आए।
प्रदेश में अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए पहले से तय नीति लागू है। इसके तहत प्रत्येक वर्ष 31 मार्च और 30 सितंबर को उन कर्मचारियों को नियमित करने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिन्होंने अनुबंध सेवा में निर्धारित दो वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हों। हालांकि, कई बार विभागीय स्तर पर फाइलों की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताओं में समय लगने के कारण पात्र कर्मचारियों को नियमितीकरण के आदेश मिलने में देरी होती रही है।
इस बार सरकार इस प्रक्रिया में तेजी लाने पर विशेष जोर दे रही है। कोशिश की जा रही है कि 31 मार्च या 30 सितंबर की निर्धारित तिथि तक पात्र कर्मचारियों से संबंधित सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएं और इसके बाद बिना अनावश्यक इंतजार के नियमितीकरण के आदेश जारी कर दिए जाएं। इससे कर्मचारियों को अपनी सेवा की स्थिति स्पष्ट होने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
सरकार के स्तर पर यह भी स्पष्ट किया गया है कि नियमितीकरण केवल उन्हीं कर्मचारियों का होगा, जो संबंधित नीति और नियमों के तहत सभी निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं। विभागों को पात्रता की जांच के साथ-साथ आवश्यक दस्तावेज और सेवा रिकॉर्ड समय पर तैयार करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमितीकरण की तय तारीख आने तक फाइलें अधूरी न रहें और केवल प्रशासनिक कारणों से किसी पात्र कर्मचारी का मामला लंबित न हो।
इस संबंध में मुख्य सचिव केके पंत की ओर से सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों को नियमितीकरण से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और निर्धारित समयसीमा का पालन करने को कहा गया है। मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद विभिन्न विभागों में नियमितीकरण से संबंधित फाइल वर्क और दस्तावेजी प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, विभागों में ऐसे कर्मचारियों की सूची और सेवा रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं, जिन्होंने दो वर्ष की आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर ली है या निर्धारित नियमितीकरण तिथि तक इसे पूरा करने वाले हैं। संबंधित विभाग पात्र कर्मचारियों की सेवा अवधि, नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक शर्तों की जांच कर रहे हैं। इसके बाद पात्र कर्मचारियों के नियमितीकरण के आदेश जारी किए जाएंगे।
अनुबंध कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि नियमित सेवा मिलने से उनकी नौकरी की स्थिति अधिक स्थायी और सुरक्षित हो जाती है। लंबे समय से अनुबंध आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए दो वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद नियमितीकरण की प्रक्रिया उनके भविष्य से सीधे जुड़ी होती है। ऐसे में विभागीय स्तर पर होने वाली देरी कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बनती रही है।
अब सरकार की कोशिश है कि नियमितीकरण की पूरी प्रक्रिया को पहले से तैयार रखा जाए। इसके लिए विभागों को अंतिम समय में फाइलें तैयार करने के बजाय समय रहते आवश्यक कार्रवाई पूरी करने पर जोर दिया जा रहा है। यदि यह प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती है तो पात्र कर्मचारियों को नियमितीकरण के आदेश तय तारीख के तुरंत बाद मिलने की संभावना है।
सरकार के इस कदम का एक उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ाना भी है। नियमितीकरण से जुड़े मामलों में यदि किसी कर्मचारी ने सभी आवश्यक शर्तें पूरी कर ली हैं तो केवल फाइल के एक विभाग से दूसरे विभाग में जाने या औपचारिक मंजूरी में देरी के कारण उसका मामला लंबित नहीं रहना चाहिए। इसी सोच के तहत विभागों को स्पष्ट समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
दैनिक भोगियों के नियमितीकरण को लेकर भी सरकार चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाने की तैयारी में है। जिन दैनिक भोगी कर्मचारियों ने संबंधित नियमों के तहत आवश्यक सेवा अवधि और अन्य पात्रता शर्तें पूरी कर ली हैं, उन्हें भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नियमितीकरण का लाभ दिया जाएगा। हालांकि इनके मामलों में भी नियमों और पात्रता की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
प्रदेश सरकार के लिए अनुबंध और दैनिक भोगी कर्मचारियों का मुद्दा प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ कर्मचारी कल्याण से भी जुड़ा हुआ है। विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से अनुबंध आधार पर सेवाएं दे रहे कर्मचारी नियमितीकरण की प्रक्रिया को लेकर सरकार से समय पर कार्रवाई की उम्मीद रखते हैं। सरकार की ओर से अब यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पात्रता पूरी करने वाले कर्मचारियों के मामलों को अनावश्यक रूप से लटकाया नहीं जाएगा।
31 मार्च और 30 सितंबर की दोनों निर्धारित तिथियां नियमितीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हैं। इसके तहत विभागों को पहले से ही पात्र कर्मचारियों का रिकॉर्ड तैयार रखना होगा। इस व्यवस्था से यह संभावना बढ़ेगी कि नियमितीकरण के आदेश जारी करने के लिए अंतिम समय में अतिरिक्त प्रशासनिक दबाव पैदा न हो।
विभागीय स्तर पर फाइलों की जांच और जरूरी कागजी कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का ध्यान इस बात पर है कि पात्र कर्मचारियों से जुड़े दस्तावेज पूरे हों और किसी तरह की कमी होने पर उसे समय रहते दूर किया जा सके। इससे नियमितीकरण की प्रक्रिया में अंतिम चरण पर आने वाली तकनीकी या प्रशासनिक बाधाओं को कम किया जा सकेगा।
सरकार की इस पहल से उन कर्मचारियों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें दो वर्ष की सेवा पूरी करने के बावजूद नियमितीकरण के आदेशों के लिए इंतजार करना पड़ता था। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार कार्रवाई पूरी होती है तो भविष्य में कर्मचारियों को अपने नियमितीकरण की स्थिति जानने के लिए बार-बार संबंधित कार्यालयों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
कुल मिलाकर, हिमाचल सरकार ने अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को गति देने के लिए विभागीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मौजूदा सरकार के कार्यकाल के दौरान दो वर्ष की सेवा पूरी कर चुके करीब 1000 से 1500 अनुबंध कर्मचारियों के अलावा पात्र दैनिक भोगियों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है। अब विभागों की जिम्मेदारी है कि वे पात्रता जांच और कागजी प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करें, ताकि नियमितीकरण की तय तारीख के बाद कर्मचारियों को आदेश मिलने में किसी तरह की अनावश्यक देरी न हो।




