हिमाचल में जल्द होगा मंत्रिमंडल विस्तार, कुछ मंत्रियों के विभाग बदलने के संकेत: सुक्खू

हिमाचल में जल्द होगा मंत्रिमंडल विस्तार, कुछ मंत्रियों के विभाग बदलने के संकेत: सुक्खू

हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से चर्चा में चल रहे मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किए जाने के संकेत मुख्यमंत्री ने दिए हैं। सोमवार को सचिवालय में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई दो राय नहीं है और यह जल्द किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि विस्तार के साथ कुछ मंत्रियों को नए विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि मंत्रिमंडल में कितने नए चेहरों को शामिल किया जाएगा और किन मंत्रियों के विभागों में बदलाव होगा।

सुक्खू ने कहा कि सरकार के स्तर पर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने विभागों में संभावित फेरबदल को लेकर भी संकेत दिया। मुख्यमंत्री के बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब प्रदेश में सरकार के कामकाज और मंत्रियों के विभागों को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चा होती रही है।

किशाऊ समझौते पर प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप से सीएम का इनकार

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर भी अपनी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध समझौते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल के हितों को ध्यान में रखते हुए बातचीत की और समझौते में राज्य के हितों की रक्षा करने में सफलता हासिल की है।

सुक्खू ने कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए समझौते को स्वीकार नहीं किया था। उनका कहना है कि उनकी सरकार ने हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों और प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए इस विषय पर अपना रुख स्पष्ट रखा।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी एकजुट होकर यह निर्णय लिया था कि हिमाचल के हितों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार की ओर से बातचीत के दौरान प्रदेश के अधिकारों और आर्थिक हितों को प्रमुखता दी गई।

चार दौर की बैठकों के बाद समझौते को अंतिम रूप देने का दावा

किशाऊ परियोजना के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि समझौते से पहले सरकार और संबंधित पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। उन्होंने बताया कि समझौते से पहले चार बैठकें आयोजित की गई थीं। इनमें केंद्रीय जल संसाधन मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री भी शामिल हुए थे।

सुक्खू ने कहा कि बातचीत के दौरान हिमाचल प्रदेश ने अपनी मांगों और हितों को मजबूती से सामने रखा। उनके अनुसार, परियोजना से जुड़े समझौते में उत्तराखंड की ओर से रखी गई सभी शर्तों को स्वीकार नहीं किया गया और हिमाचल के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम सहमति बनाई गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले में जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने के बजाय बातचीत और विचार-विमर्श के माध्यम से आगे बढ़ने का रास्ता अपनाया। उनका कहना है कि राज्य के हितों से जुड़े इतने बड़े प्रोजेक्ट में सरकार का उद्देश्य केवल समझौता करना नहीं, बल्कि हिमाचल को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना था।

भाजपा और जयराम ठाकुर पर साधा निशाना

किशाऊ बांध समझौते को लेकर मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा नेताओं के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से इस परियोजना के संबंध में लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है।

सुक्खू ने कहा कि किशाऊ समझौते से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक रूप से देखने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि यदि जयराम ठाकुर वर्तमान समय में मुख्यमंत्री होते तो हिमाचल के हितों को नुकसान पहुंच सकता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के समय किए गए समझौते को उनकी सरकार ने स्वीकार नहीं किया और बाद में प्रदेश के हितों को ध्यान में रखकर नए सिरे से बातचीत की गई।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने इस परियोजना से जुड़े निर्णय में प्रदेश की संपदा और अधिकारों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने भाजपा नेताओं पर राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय समझौते के वास्तविक प्रावधानों पर चर्चा करने की बात कही।

पांच साल में परियोजना पूरी करने का दावा

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किशाऊ परियोजना को लेकर यह भी दावा किया कि इसे लगभग पांच वर्षों में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को इससे हर वर्ष करीब 1200 से 1500 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ होने की उम्मीद मुख्यमंत्री ने जताई।

उन्होंने कहा कि किशाऊ बांध केवल एक परियोजना नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश के लिए दीर्घकालिक आर्थिक लाभ की संभावनाएं जुड़ी हैं। सरकार का प्रयास है कि परियोजना का काम निर्धारित समयसीमा में पूरा हो और इससे राज्य को मिलने वाला आर्थिक लाभ जल्द से जल्द शुरू हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के हितों को सुरक्षित रखते हुए परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरकार का जोर इस बात पर है कि प्रदेश को अपने संसाधनों से अधिकतम लाभ मिले और बड़े जल संसाधन प्रोजेक्ट राज्य के आर्थिक हितों के अनुरूप विकसित किए जाएं।

मंत्रिमंडल विस्तार पर बढ़ी राजनीतिक हलचल

मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल विस्तार संबंधी बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस में भी राजनीतिक हलचल बढ़ने की संभावना है। हिमाचल सरकार के गठन के बाद से ही समय-समय पर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा होती रही है। अब मुख्यमंत्री की ओर से जल्द विस्तार किए जाने की पुष्टि किए जाने के बाद संभावित नए मंत्रियों के नामों को लेकर अटकलें तेज हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने केवल विस्तार की बात ही नहीं कही, बल्कि कुछ वर्तमान मंत्रियों के विभाग बदले जाने का भी संकेत दिया है। इससे सरकार के भीतर विभागीय जिम्मेदारियों में संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह नहीं बताया कि किन मंत्रियों के विभाग बदले जाएंगे या विस्तार की निश्चित तारीख क्या होगी। ऐसे में अंतिम निर्णय और आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।

सरकार ने अपने फैसलों को प्रदेश हित से जोड़ा

किशाऊ परियोजना के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने सरकार के निर्णयों को हिमाचल के हितों से जोड़ते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसी भी बड़े समझौते में राज्य के आर्थिक और प्राकृतिक हितों को प्राथमिकता दे रही है। उनका कहना है कि पिछली सरकार के समय हुए समझौते को स्वीकार करने के बजाय वर्तमान सरकार ने प्रदेश की स्थिति और हितों के अनुरूप नए सिरे से बातचीत की।

सुक्खू ने कहा कि सरकार के मंत्रिमंडल ने भी इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई और हिमाचल की संपदा को नुकसान से बचाने का निर्णय लिया। उन्होंने भाजपा की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहा कि परियोजना से जुड़े वास्तविक तथ्यों के आधार पर ही इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।

किशाऊ समझौते और मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री के सोमवार के बयान ने हिमाचल की राजनीति में दो महत्वपूर्ण विषयों को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर सरकार के मंत्रिमंडल में जल्द बदलाव और नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना बनी है, वहीं दूसरी ओर किशाऊ परियोजना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस जारी रहने के संकेत हैं।