हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और आपसी राजनीतिक खींचतान के बीच पार्टी संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कोशिश तेज हो गई है। कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में आयोजित किए जा रहे ब्लॉक स्तरीय सम्मेलनों में पार्टी के कई प्रमुख नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने संगठन के भीतर नई राजनीतिक तस्वीर पेश की है। लंबे समय बाद ऐसा माहौल दिखाई दे रहा है, जिसमें अलग-अलग राजनीतिक धड़ों से जुड़े नेता अपने व्यक्तिगत समीकरणों से ऊपर उठकर संगठन के मंच पर दिखाई दे रहे हैं।
ब्लॉक सम्मेलनों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, चौधरी बीरेंद्र सिंह, कैप्टन अजय यादव, डा. अशोक तंवर, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और बृजेंद्र सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी को संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि इन नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रदेश कांग्रेस में अलग-अलग प्रभाव क्षेत्र रहे हैं, लेकिन संगठन के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी पार्टी को एक मंच पर लाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
विधानसभा चुनाव के बाद संगठन पर बढ़ा जोर
हरियाणा में वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया था, लेकिन बहुमत हासिल नहीं कर सकी। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर हार के कारणों पर मंथन हुआ। संगठनात्मक कमजोरी, नेताओं के बीच बेहतर तालमेल की कमी और गुटीय राजनीति जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। चुनाव के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि अलग-अलग खेमों में बंटे नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक साझा संगठनात्मक ढांचे में सक्रिय किया जाए।
इसी पृष्ठभूमि में पार्टी नेतृत्व ने केवल बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों पर निर्भर रहने की बजाय संगठन की निचली इकाइयों को मजबूत करने की दिशा में काम शुरू किया है। प्रदेश स्तर के नेताओं की बैठकों और बड़े आयोजनों के साथ-साथ ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।
कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त की रणनीति भी इसी दिशा में आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। उन्होंने संगठन के निचले स्तर तक पहुंच बनाने पर जोर दिया है, ताकि पार्टी की गतिविधियां केवल बड़े नेताओं और उनके प्रभाव वाले विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित न रहें।
नेताओं को साथ लाने की कोशिश
ब्लॉक सम्मेलनों की सबसे अहम विशेषता यह है कि इनमें पार्टी के अलग-अलग राजनीतिक समूहों से जुड़े नेताओं को शामिल किया जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं के अपने-अपने समर्थक और संगठनात्मक प्रभाव क्षेत्र रहे हैं। ऐसे में सभी प्रमुख नेताओं को एक ही संगठनात्मक प्रक्रिया से जोड़ना अपने आप में महत्वपूर्ण कदम है।
सम्मेलनों का कार्यक्रम तैयार करते समय विभिन्न नेताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का भी ध्यान रखा जा रहा है। कार्यक्रमों को इस तरह आगे बढ़ाने का प्रयास है कि स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच अनावश्यक टकराव की स्थिति न बने और संगठनात्मक गतिविधियां प्राथमिकता में रहें।
इस पूरी प्रक्रिया में कांग्रेस प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के बीच तालमेल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राव नरेंद्र सिंह के साथ मिलकर संजय दत्त जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं। जिला अध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों के साथ संवाद बढ़ाने का उद्देश्य संगठन की वास्तविक स्थिति को समझना और स्थानीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को गति देना है।
ब्लॉक से गांव और वार्ड तक संगठन विस्तार की तैयारी
कांग्रेस की मौजूदा रणनीति केवल ब्लॉक सम्मेलनों तक सीमित नहीं रहने वाली है। ब्लॉक स्तर पर संगठन को सक्रिय करने के बाद इसे मंडल, गांव और वार्ड स्तर तक ले जाने की योजना है। पार्टी की कोशिश है कि हर क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का ऐसा नेटवर्क तैयार हो, जो लगातार सक्रिय रहे और केवल चुनाव के दौरान ही मैदान में न उतरे।
गांवों और शहरी वार्डों में पांच से 11 सदस्यों वाली कमेटियां गठित करने की योजना इसी व्यापक संगठनात्मक विस्तार का हिस्सा है। इन समितियों के माध्यम से स्थानीय समस्याओं, कार्यकर्ताओं की गतिविधियों और जनता से जुड़े मुद्दों को पार्टी के उच्च स्तर तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पुराने कार्यकर्ता नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करना भी है। लंबे समय से चुनावी गतिविधियों और वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रमों पर अधिक निर्भर रहने वाले संगठन को बूथ और गांव स्तर पर नियमित रूप से सक्रिय रखने की जरूरत कांग्रेस के भीतर महसूस की जा रही है।
25 से 27 सितंबर तक अगला चरण
ब्लॉक स्तरीय सम्मेलनों का अगला चरण 25 से 27 सितंबर तक चलने वाला है। इसके बाद जिला स्तर पर अधिवेशन आयोजित किए जाने की तैयारी है। इस क्रम से स्पष्ट है कि पार्टी इन कार्यक्रमों को अलग-अलग आयोजनों के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इन्हें संगठन पुनर्गठन की एक लंबी प्रक्रिया से जोड़ रही है।
ब्लॉक से जिला और फिर मंडल, गांव तथा वार्ड स्तर तक संगठन को विस्तार देने की योजना के जरिए कांग्रेस अपने कार्यकर्ता ढांचे को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। यदि यह प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती है तो पार्टी के पास आने वाले समय में अधिक व्यवस्थित स्थानीय संगठन तैयार करने का आधार बन सकता है।
केवल मंच साझा करने से आगे बढ़ने की चुनौती
हालांकि वरिष्ठ नेताओं का एक मंच पर दिखाई देना कांग्रेस के लिए संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक चुनौती इससे आगे की है। शीर्ष नेताओं की मौजूदगी को स्थानीय स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय में बदलना पार्टी के लिए सबसे अहम काम होगा।
हरियाणा कांग्रेस में विभिन्न नेताओं के अपने-अपने राजनीतिक आधार और समर्थक समूह रहे हैं। ऐसे में यदि ब्लॉक सम्मेलनों में दिखाई दे रही एकजुटता जिला, मंडल, गांव और वार्ड स्तर तक पहुंचती है, तो संगठन को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच नियमित संवाद और संयुक्त कार्यक्रमों से आपसी दूरी कम करने का अवसर भी बनेगा।
दूसरी ओर, यदि वरिष्ठ नेताओं की साझा मौजूदगी केवल बड़े आयोजनों तक सीमित रहती है और स्थानीय स्तर पर पुराने राजनीतिक समीकरण कायम रहते हैं, तो संगठनात्मक विस्तार की प्रक्रिया अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाएगी।
कार्यकर्ताओं को केंद्र में लाने की कोशिश
कांग्रेस की मौजूदा कवायद में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पार्टी का फोकस केवल बड़े नेताओं की गतिविधियों के बजाय कार्यकर्ताओं की भागीदारी पर बढ़ाया जा रहा है। ब्लॉक सम्मेलनों के जरिए स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संगठन की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका देने का प्रयास किया जा रहा है।
पार्टी के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनावी राजनीति में मजबूत संगठन का आधार केवल बड़े चेहरों से नहीं, बल्कि बूथ, गांव और वार्ड स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं से तैयार होता है। स्थानीय कमेटियों के गठन की योजना इसी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
आगे की राह पर टिकी नजर
हरियाणा कांग्रेस के लिए ब्लॉक सम्मेलन फिलहाल संगठनात्मक गतिविधि से आगे बढ़कर एक व्यापक पुनर्संयोजन प्रक्रिया का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं। प्रभारी संजय दत्त की भूमिका, प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के साथ उनका समन्वय और वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी से पार्टी संगठन को एक साझा मंच देने की कोशिश हो रही है।
अब इस पूरी कवायद का अगला चरण जिला अधिवेशनों और उसके बाद मंडल, गांव तथा वार्ड स्तर की समितियों के गठन में दिखाई देगा। यही तय करेगा कि सम्मेलनों में बनी राजनीतिक और संगठनात्मक तस्वीर कितनी स्थायी बन पाती है।
कांग्रेस के सामने चुनौती स्पष्ट है—वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी को जमीनी संगठन में बदलना, अलग-अलग खेमों के कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल कायम करना और संगठन को लगातार सक्रिय रखना। यदि यह प्रक्रिया निरंतर चलती है तो पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव दिखाई दे सकता है। फिलहाल ब्लॉक सम्मेलनों ने इतना जरूर संकेत दिया है कि हरियाणा कांग्रेस में संगठन को लेकर गतिविधियां अब निचले स्तर तक पहुंचाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है।




