पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल पर पंजाब को बदनाम करने तथा भगवंत मान सरकार के नशा विरोधी अभियान को कमजोर करने के लिए मिलकर साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल कुछ ऐसे लोगों को सरकार के खिलाफ चेहरा बनाकर पेश कर रहे हैं, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सोमवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह ने कहा कि पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान को रोकने के लिए विपक्ष राजनीतिक तौर पर एकजुट हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाने से पहले विपक्षी दलों को उन लोगों की पृष्ठभूमि की भी जांच करनी चाहिए, जिन्हें वह नशे के खिलाफ संघर्ष करने वाले योद्धा के रूप में पेश कर रहे हैं।
संजय सिंह ने अपने आरोपों के समर्थन में तीन नामों का उल्लेख किया। इनमें जग्गा सिंह, मोहनजीत सिंह और गुलजार सिंह शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि इन तीनों मामलों को अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखने के बजाय भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल राजनीतिक अभियान के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
जग्गा सिंह को लेकर उठाए सवाल
संजय सिंह ने कहा कि जग्गा सिंह को भाजपा की ओर से अपना ‘भाई’ बताया गया और उन्हें नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया। उनके मुताबिक जग्गा सिंह के खिलाफ कुल नौ मामले दर्ज हैं। इनमें एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामले भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि इन नौ मामलों में से चार में जग्गा सिंह को दोषी ठहराया जा चुका है और उसके खिलाफ दुष्कर्म, अपहरण तथा नशा तस्करी से जुड़े मामले भी दर्ज हैं।
उन्होंने कहा कि दो ग्राम पंचायतों की ओर से नशे के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए गए थे और उनका दावा है कि इन प्रस्तावों के कारण जग्गा सिंह का कथित नशे का कारोबार प्रभावित हुआ था। संजय सिंह ने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को विपक्ष किस आधार पर नशे के खिलाफ लड़ने वाला क्रांतिकारी बता रहा है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को किसी भी व्यक्ति के बयान को आधार बनाने से पहले उसके पुराने रिकॉर्ड और मामलों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उनके मुताबिक विपक्ष ने जग्गा सिंह की पूरी पृष्ठभूमि की जांच किए बिना उसे सरकार के खिलाफ राजनीतिक मुद्दा बना दिया।
मोहनजीत सिंह मामले में भी विपक्ष पर निशाना
संजय सिंह ने दूसरा मामला मोहनजीत सिंह का उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के एक कार्यक्रम के दौरान मोहनजीत सिंह ने काला झंडा दिखाया था। इसके बाद विपक्षी दलों की ओर से यह आरोप लगाया गया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति को केवल विरोध करने के कारण प्रताड़ित किया गया।
संजय सिंह ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोहनजीत सिंह के खिलाफ आठ एफआईआर दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों को नजरअंदाज करके उन्हें नशे के खिलाफ लड़ने वाले व्यक्ति के तौर पर पेश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन राजनीतिक दलों को किसी मामले को अपनी राजनीतिक मुहिम का हिस्सा बनाने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए।
गुलजार सिंह के वीडियो को लेकर बड़ा दावा
संजय सिंह ने गुलजार सिंह के मामले को भी विपक्ष की राजनीतिक रणनीति से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि गुलजार सिंह ने पहले जो वीडियो रिकॉर्ड किया था, उसमें न तो वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम लिया गया था और न ही आम आदमी पार्टी का।
संजय सिंह के अनुसार बाद में सामने आए एक अन्य वीडियो में हरपाल सिंह चीमा का नाम लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने गुलजार सिंह पर दबाव बनाकर वीडियो तैयार करवाए और उसे अपने राजनीतिक अभियान के लिए इस्तेमाल किया।
उन्होंने कहा कि गुलजार सिंह की मौत से जुड़ा मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष को इस घटना का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि पहले वीडियो और बाद के वीडियो में अंतर इस पूरे मामले पर सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि गुलजार सिंह की मौत के मामले में विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस प्रकरण को लेकर पुलिस स्तर पर मामला दर्ज होने और जांच की बात सामने आई है। ऐसे में संजय सिंह ने विपक्ष के आरोपों के जवाब में अपना पक्ष रखते हुए राजनीतिक दबाव की बात कही।
‘पंजाब को बदनाम करने की कोशिश’
संजय सिंह ने भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल पर हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब में नशे की समस्या वास्तविक है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इस मुद्दे के समाधान के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से समस्या खत्म नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और इस अभियान को कमजोर करने की कोशिश नहीं होने दी जाएगी। उनके मुताबिक विपक्षी दल सरकार की नीतियों और कार्रवाई पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन इसके लिए तथ्यों और जांच का सहारा लिया जाना चाहिए।
संजय सिंह ने कहा कि वह पंजाब में अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार के दौर को भी जानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय नशे का कारोबार बड़े पैमाने पर फैला और राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी सामने आते रहे। उन्होंने कांग्रेस को भी इस पूरे दौर के लिए जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि पंजाब ने वह समय देखा है जब स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले युवा भी नशे की चपेट में आए। उनके मुताबिक नशे की समस्या किसी एक सरकार या एक राजनीतिक दल की बनाई हुई नहीं है, लेकिन अब जब उनकी पार्टी की सरकार इसके खिलाफ कार्रवाई कर रही है तो विपक्ष उस कार्रवाई पर ही सवाल उठा रहा है।
गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह का मामला उठाया
प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह ने पंजाब के बाहर नशे से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर बरामद हुई बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों का जिक्र करते हुए भाजपा पर सवाल उठाए।
उन्होंने दावा किया कि करीब 20 हजार करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स की बरामदगी के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में आरोपियों की जमानत का विरोध किया था और कथित तौर पर ड्रग्स के पैसे के आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल की आशंका जताई थी।
हालांकि, इस मामले में उपलब्ध सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में मुंद्रा बंदरगाह से जुड़े एक मामले में करीब 2,988 किलोग्राम मादक पदार्थ की बरामदगी का उल्लेख है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 21 हजार करोड़ रुपये बताई गई थी।
संजय सिंह ने इसी मामले को आधार बनाते हुए भाजपा से सवाल किया कि जब देश के अन्य हिस्सों में इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स पकड़ी जाती है तो उस पर राजनीतिक जवाबदेही की बात क्यों नहीं की जाती।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि नशे के मुद्दे पर पंजाब को निशाना बनाने से पहले उसे देश के अन्य राज्यों में सामने आए बड़े ड्रग मामलों पर भी जवाब देना चाहिए।
‘नशे के मुद्दे पर राजनीति नहीं, ठोस कार्रवाई जरूरी’
संजय सिंह ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या को लेकर सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर काम करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह सरकार की कार्रवाई की आलोचना जरूर करे, लेकिन किसी भी व्यक्ति के आरोप या वीडियो को बिना जांच के अंतिम सत्य के रूप में पेश न करे।
उन्होंने कहा कि पंजाब की छवि खराब करने से न तो नशे की समस्या खत्म होगी और न ही युवाओं का भविष्य सुरक्षित होगा। उनके मुताबिक सरकार की जिम्मेदारी है कि नशे के नेटवर्क पर कार्रवाई करे, जबकि विपक्ष को भी इस अभियान में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
विपक्षी हमलों के बीच तेज हुई सियासी बहस
पंजाब में नशे का मुद्दा इस समय राजनीतिक बहस के केंद्र में है। भाजपा सहित विपक्षी दल भगवंत मान सरकार पर नशे के खिलाफ अभियान के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होने का आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी का कहना है कि पिछली सरकारों के दौरान मजबूत हुए नशे के नेटवर्क के खिलाफ अब कार्रवाई की जा रही है।
इसी राजनीतिक खींचतान के बीच संजय सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल को चुनौती देते हुए कहा कि अगर विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस तथ्य या सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों और सार्वजनिक मंच पर रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी नशे के खिलाफ अपनी मुहिम से पीछे नहीं हटेगी और पंजाब को नशे की समस्या से बाहर निकालने के लिए कार्रवाई जारी रखेगी। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह नशे के मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
संजय सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को राजनीतिक आरोपों तक सीमित करने के बजाय तस्करी के नेटवर्क, सप्लाई चेन और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब को बदनाम करने के बजाय सभी दलों को मिलकर नशे के खिलाफ माहौल तैयार करना चाहिए।




