दिल्ली-एनसीआर के विस्तार के बीच हरियाणा में नए शहर की तैयारी, 9 हजार एकड़ जमीन के लिए सरकार ने मांगे प्रस्ताव

दिल्ली-एनसीआर के विस्तार के बीच हरियाणा में नए शहर की तैयारी, 9 हजार एकड़ जमीन के लिए सरकार ने मांगे प्रस्ताव

झज्जर-सोनीपत-रोहतक बेल्ट में विकसित होगा प्रस्तावित ‘नमो सिटी’ का आधार, 31 अक्टूबर तक ई-भूमि पोर्टल पर जमीन की पेशकश कर सकेंगे भू-मालिक

हरियाणा में बढ़ते शहरीकरण और दिल्ली-एनसीआर के लगातार विस्तार को देखते हुए राज्य सरकार ने नए शहरी केंद्र के विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ‘विकसित हरियाणा’ के विजन के तहत प्रस्तावित ‘नमो सिटी’ के लिए करीब 9 हजार एकड़ का लैंड बैंक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए झज्जर, सोनीपत और रोहतक जिलों की बेल्ट में जमीन की उपलब्धता का आकलन किया जा रहा है।

सरकार ने जमीन जुटाने की प्रक्रिया को लेकर सीधे भू-मालिकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। किसान और अन्य जमीन मालिक ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से अपनी जमीन का विवरण सरकार के सामने रख सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें जमीन की अपनी अपेक्षित कीमत भी बतानी होगी। जमीन की पेशकश के लिए 31 अक्टूबर तक का समय निर्धारित किया गया है।

इस प्रक्रिया की खास बात यह है कि शुरुआती स्तर पर जमीन की कीमत सरकार की ओर से तय नहीं की जा रही है। भू-मालिक स्वयं अपनी जमीन की अपेक्षित कीमत बताएगा। इसके बाद सरकार उपलब्ध प्रस्तावों का परीक्षण करेगी और आगे की प्रक्रिया जमीन, स्थान, कीमत तथा अन्य शर्तों के आधार पर तय की जाएगी।

पहले जमीन का आधार, फिर शहर की रूपरेखा

प्रस्तावित नमो सिटी के विकास में फिलहाल सरकार का पहला लक्ष्य पर्याप्त जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। करीब 9 हजार एकड़ का लैंड बैंक तैयार होने के बाद ही शहर की विस्तृत योजना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।

इसका अर्थ है कि अभी शहर का अंतिम स्वरूप तय नहीं किया गया है। जमीन की उपलब्धता और स्थान के आधार पर आगे आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक तथा सार्वजनिक सुविधाओं के लिए क्षेत्रों का निर्धारण किया जा सकता है।

मास्टर प्लान तैयार करते समय आवास के साथ रोजगार, कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, हरित क्षेत्र और मनोरंजन जैसी जरूरतों को ध्यान में रखने की योजना है। विशेषज्ञ एजेंसी की सहायता से भविष्य की आबादी और शहरी जरूरतों के अनुरूप नियोजन किए जाने की संभावना है।

ई-भूमि पोर्टल से जुटाई जाएगी जानकारी

सरकार ने जमीन मालिकों के लिए ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से प्रस्ताव देने की व्यवस्था की है। इसमें भू-मालिक अपनी जमीन से संबंधित आवश्यक जानकारी दर्ज कर सकेगा। इसके साथ जमीन के बदले अपेक्षित कीमत भी बतानी होगी।

इस प्रक्रिया से सरकार के पास एक साथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां पहुंचेंगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि प्रस्तावित क्षेत्र में कितनी जमीन उपलब्ध हो सकती है, जमीन किन स्थानों पर है और भू-मालिक उसके लिए कितनी कीमत की अपेक्षा कर रहे हैं।

सरकार प्रस्तावों की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। जहां जमीन और कीमत को लेकर सहमति बनने की संभावना होगी, वहां संबंधित भू-मालिकों के साथ आगे बातचीत की जा सकती है। यानी ई-भूमि पोर्टल पर प्रस्ताव देना जमीन का अंतिम हस्तांतरण नहीं होगा, बल्कि भूमि उपलब्धता और संभावित सौदे की प्रक्रिया का शुरुआती चरण होगा।

किसान खुद बताएगा अपनी जमीन का अपेक्षित मूल्य

इस परियोजना के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया में भू-मालिक को अपनी जमीन की कीमत बताने का अवसर दिया गया है। सरकार की ओर से शुरुआत में कोई एक तय दर घोषित नहीं की गई है।

भू-मालिक अपनी जमीन की स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपेक्षित कीमत दर्ज कर सकेगा। इसके बाद सरकार प्राप्त प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी। जमीन की लोकेशन, क्षेत्रफल और अन्य संबंधित पहलुओं को देखते हुए आगे की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

इस मॉडल से सरकार को परियोजना के लिए संभावित भूमि लागत का प्रारंभिक आकलन करने में भी मदद मिल सकती है। 31 अक्टूबर के बाद सामने आने वाले प्रस्तावों से यह तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कितने भू-मालिक परियोजना के लिए जमीन देने में रुचि रखते हैं।

तीन जिलों की बेल्ट पर फोकस

प्रस्तावित नमो सिटी के लिए झज्जर, सोनीपत और रोहतक की बेल्ट को केंद्र में रखा गया है। यह क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। दिल्ली के आसपास बढ़ती आबादी और आर्थिक गतिविधियों के साथ हरियाणा के इन क्षेत्रों में भी शहरी विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं।

सड़क और रेल संपर्क के साथ इस बेल्ट को भविष्य के क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की संभावना भी परियोजना की योजना का हिस्सा है। प्रस्तावित मॉडल में क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी आरआरटीएस को परिवहन की प्रमुख रीढ़ के रूप में इस्तेमाल करने की परिकल्पना की गई है।

यदि परियोजना इसी अवधारणा के अनुसार आगे बढ़ती है तो सार्वजनिक परिवहन और शहरी विकास को एक-दूसरे से जोड़कर विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इससे आवासीय क्षेत्रों और रोजगार केंद्रों के बीच दूरी कम करने के लिए परिवहन आधारित नियोजन को महत्व दिया जा सकता है।

सिर्फ रिहायशी कॉलोनी नहीं होगी

सरकार की प्रस्तावित सोच नमो सिटी को सामान्य आवासीय कॉलोनी के रूप में विकसित करने के बजाय एक एकीकृत शहरी केंद्र के तौर पर विकसित करने की है। इसमें अलग-अलग जरूरतों को एक ही शहरी ढांचे के भीतर जोड़ने पर जोर रहेगा।

इसके तहत आवासीय क्षेत्रों के साथ व्यापारिक गतिविधियों, रोजगार केंद्रों, संस्थानों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित किए जा सकते हैं। ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट और मिश्रित उपयोग वाली योजना को भी शहरी नियोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।

ऐसे मॉडल में सार्वजनिक परिवहन के आसपास आवास और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को विकसित करने का प्रयास किया जाता है। पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए सुविधाओं के साथ ई-वाहनों के उपयोग को ध्यान में रखते हुए परिवहन ढांचा तैयार करने पर भी जोर दिया जा सकता है।

बिजली-पानी और सीवर का भी पहले से नियोजन

नए शहर के विकास में केवल सड़क और इमारतों का निर्माण ही नहीं, बल्कि बुनियादी सेवाओं का नियोजन भी महत्वपूर्ण होगा। प्रस्तावित मॉडल में बिजली, पेयजल, सीवर, जल निकासी और अन्य आवश्यक सेवाओं के नेटवर्क को शहर की शुरुआत से ही नियोजित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

इसका उद्देश्य भविष्य में अनियोजित विस्तार से पैदा होने वाली समस्याओं को कम करना होगा। पर्याप्त हरित क्षेत्र और सार्वजनिक स्थानों के लिए भी भूमि का प्रावधान मास्टर प्लान में रखा जा सकता है।

पार्क से लेकर खेल और सांस्कृतिक सुविधाओं तक

नमो सिटी की प्रस्तावित अवधारणा में नागरिक सुविधाओं को भी प्रमुख स्थान देने की बात है। बड़े पार्क, हरित क्षेत्र, खेल परिसर और मनोरंजन स्थलों के लिए जगह रखने की योजना हो सकती है।

इसके अलावा लेक, पिकनिक स्पॉट और अन्य सार्वजनिक स्थलों को भी शहरी डिजाइन में शामिल किए जाने की संभावना है। शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए स्कूल, अस्पताल तथा अन्य संस्थानों की जरूरतों को भी भविष्य की आबादी के अनुसार योजना में शामिल किया जाएगा।

सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए संग्रहालय, आधुनिक पुस्तकालय, सभागार और अन्य सार्वजनिक संस्थानों की परिकल्पना भी की जा सकती है। इससे प्रस्तावित शहर को केवल रहने और काम करने की जगह के बजाय व्यापक नागरिक सुविधाओं वाला शहरी केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा जा सकता है।

‘विकसित हरियाणा’ के बड़े विजन से जुड़ी परियोजना

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को ‘विकसित भारत 2047’ के अनुरूप ‘विकसित हरियाणा’ के निर्माण का रोडमैप बता चुके हैं। राज्य सरकार के विकास दृष्टिकोण में बुनियादी ढांचे, परिवहन, उद्योग, निवेश और नए शहरी केंद्रों के विकास को महत्व दिया गया है।

इसी व्यापक सोच के तहत प्रदेश में 39 शहरों में ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने और केएमपी एक्सप्रेस-वे के आसपास आधुनिक ग्रीनफील्ड शहरी परियोजनाओं की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

नमो सिटी को इसी व्यापक शहरी विकास दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य भविष्य की आबादी के लिए पहले से नियोजित आवास और नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आर्थिक गतिविधियों के लिए भी आधार तैयार करना है।

रोजगार और निवेश से जोड़ने की तैयारी

नए शहरी केंद्र की योजना को रोजगार और निवेश से जोड़ने पर भी जोर दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री की निवेश संबंधी पहलों में औद्योगिक विकास और कारोबारी प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर दिया गया है।

यदि प्रस्तावित नमो सिटी का विकास एकीकृत मॉडल के अनुसार होता है तो भविष्य में यहां आवासीय क्षेत्रों के साथ कारोबारी, सेवा क्षेत्र और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी स्थान निर्धारित किया जा सकता है। इससे आसपास के जिलों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने की संभावना बन सकती है।

31 अक्टूबर के बाद सामने आएगी जमीन की तस्वीर

फिलहाल परियोजना का सबसे अहम चरण जमीन की उपलब्धता से जुड़ा है। 31 अक्टूबर तक ई-भूमि पोर्टल पर आने वाले प्रस्तावों से यह पता चलेगा कि प्रस्तावित 9 हजार एकड़ के लैंड बैंक के लिए कितनी जमीन उपलब्ध हो सकती है।

कितने भू-मालिक जमीन देने के इच्छुक हैं, उनकी जमीन किन स्थानों पर है और वे कितनी कीमत की मांग कर रहे हैं—इन सभी पहलुओं के आधार पर सरकार आगे की रणनीति तैयार करेगी।

इसके बाद भूमि संबंधी प्रक्रिया, क्षेत्र का चयन और प्रस्तावित शहर के मास्टर प्लान की दिशा में कदम बढ़ेंगे। यानी अभी नमो सिटी का सफर जमीन के प्रस्तावों से शुरू हुआ है। आने वाले चरणों में यही भूमि उपलब्धता तय करेगी कि नए शहरी केंद्र का विस्तार किस रूप में और किस दिशा में किया जाएगा।

करीब 9 हजार एकड़ का प्रस्तावित लैंड बैंक तैयार करने की पहल हरियाणा में भविष्य के शहरी विस्तार को पहले से नियोजित करने की कोशिश के तौर पर सामने आई है। अब 31 अक्टूबर तक आने वाले भूमि प्रस्ताव इस परियोजना की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।