हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कानून के सामने सभी समान हैं और किसी भी घटना को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय तथ्यों के आधार पर आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कहीं अनुचित व्यवहार हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जानी चाहिए। लेकिन यदि पुलिसकर्मियों पर हमला हुआ है, उन्हें चोटें आई हैं और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है, तो उन मामलों में भी उतनी ही गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए।
मीडिया से बातचीत के दौरान अनिल विज ने राहुल गांधी के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति को लेकर टिप्पणी की थी। विज ने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के किसी केंद्रीय मंत्री पर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को ऐसे बयान देने चाहिए जो तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित हों, न कि केवल राजनीतिक आरोपों पर।
विज ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का पालन सभी के लिए अनिवार्य है। यदि किसी छात्र के साथ बल प्रयोग हुआ है और वह अनुचित पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि पुलिसकर्मियों पर हिंसा की गई है या उन्हें निशाना बनाया गया है, तो ऐसे लोगों को भी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून एकतरफा नहीं चलता और न्याय भी तभी संभव है जब हर पक्ष की निष्पक्ष जांच हो।
उन्होंने दावा किया कि हालिया घटनाओं में करीब 120 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। विज ने कहा कि विपक्ष केवल छात्रों की बात कर रहा है, लेकिन ड्यूटी निभा रहे पुलिसकर्मियों की चोटों और उन पर हुए हमलों का भी संज्ञान लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी पुलिसकर्मी को गंभीर चोटें आई हैं तो यह भी उतना ही गंभीर मामला है और इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
अनिल विज ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों ने घटनास्थल पर मौजूद बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान की है, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड बताया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 2,800 संदिग्ध या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान की गई है। उनके अनुसार यह भी जांच का विषय है कि ये लोग वहां कैसे पहुंचे, किसने उन्हें बुलाया और उनका उद्देश्य क्या था। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने माहौल बिगाड़ने या हिंसा फैलाने की कोशिश की है तो उसकी भी पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी घटना की जांच केवल एक पक्ष के बयान के आधार पर नहीं हो सकती। जांच एजेंसियों को सभी पहलुओं की पड़ताल करनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। विज ने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि हिंसा की शुरुआत कैसे हुई, किन परिस्थितियों में बल प्रयोग करना पड़ा और किसने कानून व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास किया।
राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए जाने पर भी अनिल विज ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी नेता पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया जाता है तो उसके समर्थन में ठोस सबूत भी होने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि राहुल गांधी किस आधार पर यह कह रहे हैं कि गृह मंत्री ने कोई निर्देश दिए थे। विज ने कहा कि लोकतंत्र में किसी पर भी बिना प्रमाण के आरोप लगाना जिम्मेदार राजनीति नहीं माना जा सकता।
उन्होंने पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी संवेदनशील स्थिति में मौके पर मौजूद ड्यूटी मजिस्ट्रेट परिस्थितियों का आकलन करता है और उसी के अनुसार प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर छोटी-बड़ी कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री से अनुमति लेने की बात करना व्यावहारिक नहीं है। कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्थानीय प्रशासन और अधिकृत अधिकारी तय प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेते हैं।
विज ने कहा कि यदि कहीं स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है या हिंसा का खतरा बढ़ता है, तो प्रशासन को तत्काल निर्णय लेने पड़ते हैं। ऐसे मामलों को राजनीतिक बयानबाजी का विषय बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस दौरान लिए गए निर्णय परिस्थितियों के अनुसार होते हैं।
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए अनिल विज ने कहा कि उन्हें ऐसे बयान देने से बचना चाहिए जो केवल राजनीतिक विवाद को बढ़ाने का काम करें। उन्होंने कहा कि विपक्ष का दायित्व सरकार से सवाल पूछना है, लेकिन यह भी जरूरी है कि सवाल तथ्यों और जिम्मेदारी के साथ उठाए जाएं। बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
इस दौरान विज ने राहुल गांधी पर व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि जिन सरकारी आवासों और संस्थानों से कभी उनके परिवार का लंबा राजनीतिक जुड़ाव रहा, आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां भी बदलती रहती हैं।
हरियाणा के मंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करती। चाहे पीड़ित छात्र हों, आम नागरिक हों या पुलिसकर्मी—यदि किसी के साथ अन्याय हुआ है तो उसे न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि सरकार निष्पक्ष जांच और कानून के शासन में विश्वास रखती है तथा किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुई बहस अब राजनीतिक रंग ले चुकी है। एक ओर विपक्ष सरकार पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष कानून-व्यवस्था और पुलिस पर हुए हमलों का मुद्दा सामने रख रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल अनिल विज के बयान ने इस पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकार का रुख कानून के समान अनुपालन का है और किसी भी पक्ष को केवल राजनीतिक आधार पर राहत नहीं दी जाएगी। अब सबकी नजर जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगे आने वाली आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।




