दिल्ली में 29 सितंबर को जुटेंगे पंजाब कांग्रेस के दिग्गज, चन्नी-वड़िंग-रंधावा-बाजवा की मौजूदगी पर निगाह

दिल्ली में 29 सितंबर को जुटेंगे पंजाब कांग्रेस के दिग्गज, चन्नी-वड़िंग-रंधावा-बाजवा की मौजूदगी पर निगाह

पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से चल रही संगठनात्मक खींचतान के बीच अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक और साझा मौजूदगी पर निगाहें टिक गई हैं। कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक 29 सितंबर को सुबह 10 बजे दिल्ली में प्रस्तावित है। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी एवं एआइसीसी महासचिव सचिन पायलट ने बैठक से संबंधित जानकारी साझा की है। बैठक में पंजाब से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के पहुंचने की संभावना है।

संभावित रूप से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा समेत कई नेता इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बैठक में पंजाब से किन-किन नेताओं की अंतिम रूप से मौजूदगी रहेगी और राज्य से जुड़े कौन से विषय एजेंडे में शामिल होंगे, इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

पंजाब कांग्रेस के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कई महीनों से प्रदेश संगठन में नेतृत्व और रणनीति को लेकर अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद सार्वजनिक चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे समय में पार्टी के प्रमुख नेताओं का केंद्रीय मंच पर एक साथ आना संगठन के भीतर चल रहे संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।

पायलट के आने के बाद बढ़ा नेताओं के बीच संवाद

पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी के तौर पर सचिन पायलट की नियुक्ति के बाद प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद का सिलसिला बढ़ा है। पायलट ने दिल्ली में पंजाब के अलग-अलग नेताओं से मुलाकातें की हैं। इनमें राजा वड़िंग, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा और भारत भूषण आशु समेत कई नेता शामिल रहे हैं।

पार्टी के भीतर इन मुलाकातों का एक उद्देश्य पंजाब संगठन की मौजूदा स्थिति, नेताओं के बीच मतभेद और आगामी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर फीडबैक लेना रहा है। पायलट ने पंजाब दौरे के दौरान भी पार्टी के अलग-अलग वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद किया था।

पायलट की नियुक्ति के बाद पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक स्तर पर आगे की रणनीति को लेकर चर्चाएं भी तेज हुई हैं। पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर गतिविधियां बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

15 सितंबर के प्रदर्शन में दिखी थी साझा तस्वीर

पंजाब कांग्रेस के भीतर अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेदों के बावजूद 15 सितंबर को चंडीगढ़ में आयोजित पार्टी के प्रदर्शन के दौरान कई वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए थे। इस कार्यक्रम में सचिन पायलट के साथ चरणजीत सिंह चन्नी, राजा वड़िंग, सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रताप सिंह बाजवा समेत पार्टी के कई नेता मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान पायलट ने चन्नी और वड़िंग को साथ खड़ा कर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की थी। उस समय पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की एक साथ मौजूदगी को संगठन के भीतर संवाद बढ़ाने के प्रयासों के संदर्भ में देखा गया था।

इसके बाद भी पायलट और पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच बैठकों का सिलसिला जारी रहा। प्रताप सिंह बाजवा ने भी हाल में पायलट से मुलाकात की थी। इस बैठक में पंजाब की राजनीतिक गतिविधियों और राहुल गांधी के संभावित पंजाब दौरे से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की जानकारी सामने आई थी।

चन्नी और वड़िंग के बीच मतभेद रहे हैं चर्चा में

पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ महीनों के दौरान प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग की भूमिका को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आती रही है। चरणजीत सिंह चन्नी के साथ जुड़े नेताओं की ओर से संगठन में बदलाव की मांग पहले भी उठती रही है।

जुलाई में पंजाब कांग्रेस से जुड़े संगठनात्मक घटनाक्रम के दौरान भी नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के रुख सामने आए थे। उस समय कांग्रेस नेतृत्व ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का फैसला किया था, जबकि चन्नी को चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी दी गई थी।

इसके बाद सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाए जाने से संगठन के भीतर संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ी। पायलट ने अलग-अलग खेमों से जुड़े नेताओं से मुलाकात कर उनकी राय जानी। इससे पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक विभिन्न पक्षों की जानकारी पहुंचने का रास्ता बना।

सीडब्ल्यूसी बैठक में किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

29 सितंबर की बैठक में पंजाब से जुड़े मुद्दों पर क्या चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, प्रदेश संगठन की मौजूदा स्थिति और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को देखते हुए पंजाब कांग्रेस के लिए संगठनात्मक विषय महत्वपूर्ण रह सकते हैं।

पार्टी के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का लंबा कार्यक्रम है। इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद बढ़ाना और प्रदेश स्तर पर नेताओं के बीच समन्वय कायम करना प्रमुख संगठनात्मक विषयों में शामिल हो सकते हैं।

इसके अलावा पंजाब में पार्टी की आगामी गतिविधियों, केंद्रीय नेताओं के संभावित दौरे और राज्य से जुड़े जनहित के मुद्दों को लेकर भी चर्चा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इनमें से किसी विषय को बैठक का आधिकारिक एजेंडा तब तक नहीं माना जा सकता जब तक कांग्रेस की ओर से इसकी पुष्टि न हो।

राहुल गांधी के संभावित दौरे पर भी नजर

पंजाब कांग्रेस की हालिया गतिविधियों में राहुल गांधी के संभावित पंजाब दौरे को लेकर भी चर्चा रही है। सचिन पायलट और प्रताप सिंह बाजवा के बीच हुई हालिया मुलाकात में भी इस विषय पर बातचीत होने की जानकारी सामने आई थी।

ऐसे में सीडब्ल्यूसी की बैठक पार्टी के आगामी कार्यक्रमों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि पंजाब के प्रमुख नेता बैठक में शामिल होते हैं तो प्रदेश संगठन से संबंधित मुद्दों पर केंद्रीय स्तर पर संवाद का अवसर मिलेगा।

हालांकि, राहुल गांधी के दौरे की तारीख, कार्यक्रम और स्वरूप को लेकर अंतिम जानकारी आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। इसी तरह सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद पंजाब संगठन को लेकर किसी नए निर्णय की संभावना को लेकर भी अभी केवल चर्चाएं हैं।

एक मंच पर मौजूदगी से क्या संदेश जाएगा

पंजाब कांग्रेस के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेदों के बीच वरिष्ठ नेताओं की साझा मौजूदगी को संगठनात्मक संवाद के लिहाज से देखा जा रहा है। हाल के दिनों में पार्टी के कार्यक्रमों और बैठकों में अलग-अलग खेमों के नेताओं की मौजूदगी बढ़ी है।

15 सितंबर के चंडीगढ़ प्रदर्शन में चन्नी, वड़िंग, रंधावा और बाजवा समेत वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी इसका एक उदाहरण रही। इसके बाद पायलट की ओर से विभिन्न नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें भी हुईं।

अब 29 सितंबर की दिल्ली बैठक में यदि पंजाब के ये नेता एक साथ मौजूद रहते हैं तो पार्टी के भीतर चल रहे संवाद को केंद्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, केवल एक मंच पर मौजूदगी को संगठनात्मक मतभेद समाप्त होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। पार्टी के भीतर आगे होने वाली बैठकों और लिए जाने वाले निर्णयों से ही स्थिति की दिशा स्पष्ट होगी।

चुनावी तैयारी से पहले संगठन पर फोकस

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए कांग्रेस के लिए आने वाला समय संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है। पार्टी को प्रदेश में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय कायम रखने के साथ चुनावी मुद्दों और कार्यक्रमों को जमीनी स्तर तक पहुंचाना होगा।

सचिन पायलट के सामने पंजाब प्रभारी के तौर पर प्रदेश के विभिन्न नेताओं के बीच संवाद बनाए रखने और केंद्रीय नेतृत्व तथा राज्य संगठन के बीच समन्वय की जिम्मेदारी भी रहेगी। पिछले दिनों हुई उनकी बैठकों से संकेत मिलता है कि वह अलग-अलग नेताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं।

अब दिल्ली में होने वाली सीडब्ल्यूसी बैठक इस संवाद को आगे बढ़ाने का एक और मंच बन सकती है। पंजाब से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की संभावित मौजूदगी के बीच पार्टी संगठन, आगामी कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों पर विचार-विमर्श हो सकता है।

फिलहाल बैठक से पहले सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि पंजाब से कौन-कौन से नेता दिल्ली पहुंचते हैं और बैठक के बाद पार्टी की ओर से प्रदेश संगठन को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी सामने आती है। कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ महीनों में नेतृत्व को लेकर सामने आए मतभेदों के बीच यह बैठक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच संवाद की अगली कड़ी के रूप में देखी जा रही है।