पंजाब में नशा, गैंगस्टरवाद और बढ़ते कर्ज को लेकर भाजपा सांसद ने उठाए सवाल; कर्मचारियों के लंबित डीए-डीआर पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुघ ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर नशे के खिलाफ कार्रवाई, कानून-व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन को लेकर तीखा हमला बोला है। पंजाब सरकार की ओर से नशा तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को विशेष शक्तियां देने संबंधी अधिसूचना पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि जब सरकार को नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए इन शक्तियों की जरूरत थी, तो उसने अपने कार्यकाल के अंतिम महीनों तक इंतजार क्यों किया।
चुघ ने कहा कि पंजाब की जनता ने आम आदमी पार्टी को 60 महीने सरकार चलाने का जनादेश दिया था, लेकिन 56 महीने बीतने के बाद नशे की समस्या से निपटने के लिए विशेष शक्तियां देने की जरूरत महसूस होना सरकार की तैयारियों और अब तक की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार नशे की समस्या से निपटने में नाकाम रही है और अब तक के कामकाज का जवाब देने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी का सहारा ले रही है।
भाजपा सांसद ने मांग की कि राज्य सरकार नशे के खिलाफ कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, गैंगस्टरों और खनन माफिया के विरुद्ध अभियान, राज्य पर बढ़ते कर्ज तथा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत (डीए-डीआर) पर विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक करे। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से विधानसभा में इन मुद्दों पर जवाब देने और सरकार के पिछले चार वर्ष नौ महीने के कामकाज का हिसाब पेश करने को कहा।
नशे के खिलाफ विशेष शक्तियों पर उठाए सवाल
तरुण चुघ ने पंजाब सरकार की 21 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के निर्धारित उद्देश्यों के लिए पुलिस आयुक्तों और पुलिस रेंज के प्रभारी आईजी रैंक या उससे ऊपर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष शक्तियां प्रदान की गई हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने और नशे की आपूर्ति रोकने के लिए इन शक्तियों की आवश्यकता थी, तो सरकार ने इन्हें पहले क्यों नहीं लागू किया। चुघ के अनुसार, इतने लंबे समय बाद उठाया गया कदम सरकार की प्राथमिकताओं और नशे के खिलाफ उसकी रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि केवल अधिसूचना जारी कर देना नशे के खिलाफ सफलता का प्रमाण नहीं हो सकता। सरकार को यह बताना चाहिए कि पिछले 56 महीनों के दौरान नशा तस्करों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए कौन-से कदम उठाए गए और इन प्रयासों से जमीन पर क्या परिणाम सामने आए।
चुघ ने मांग की कि सरकार नशे की आपूर्ति रोकने, तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई करने और नशे से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या से प्रभावित परिवारों को ठोस कार्रवाई और परिणाम चाहिए, केवल घोषणाओं से उनकी चिंताएं दूर नहीं होंगी।
नशे से जुड़ी घटनाओं पर सरकार को घेरा
भाजपा सांसद ने कहा कि पंजाब में नशे की समस्या, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और गैंगस्टरों की गतिविधियां गंभीर चिंता का विषय हैं। पिछले एक महीने में नशे से जुड़ी मौतों और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों से संबंधित घटनाओं ने कई परिवारों की चिंता बढ़ाई है।
उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है कि वह विधानसभा में इन मुद्दों पर जवाब दें और अपनी सरकार के कामकाज का विवरण जनता के सामने रखें। चुघ ने आरोप लगाया कि गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय राजनीतिक भाषणों के माध्यम से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ कार्रवाई केवल पुलिस अधिकारियों को अधिकार देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तस्करी पर प्रभावी रोक लगे, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और नशे से प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।
चुघ ने कहा कि पंजाब के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए और उनसे कितनी सफलता मिली। उनके अनुसार, नशे के खिलाफ अभियान की वास्तविक स्थिति का आकलन घोषणाओं से नहीं, बल्कि उसके परिणामों से किया जाना चाहिए।
कानून-व्यवस्था और गैंगस्टरवाद पर रिपोर्ट कार्ड मांगा
तरुण चुघ ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी भगवंत मान सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सरकार को गैंगस्टरों के नेटवर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई और अपराधों पर नियंत्रण के लिए अपनाई गई रणनीति का पूरा विवरण देना चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि गैंगस्टरवाद पर अंकुश लगाने के लिए अब तक कौन-से कदम उठाए गए और उनसे क्या परिणाम निकले। भाजपा सांसद ने कहा कि प्रदेश में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को अपनी उपलब्धियों और कमियों का स्पष्ट ब्योरा देना चाहिए।
चुघ ने खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से पूछा कि अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए गए और इन कदमों से कितना असर पड़ा। उनके अनुसार, नशा तस्करी, गैंगस्टरवाद और अवैध खनन जैसे मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाबदेही तय करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता केवल दावों से संतुष्ट नहीं होगी। सरकार को अपने कामकाज के तथ्य और परिणाम सामने रखने होंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन समस्याओं से निपटने के लिए कितनी गंभीरता से काम किया गया है।
बढ़ते कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग
भाजपा सांसद ने पंजाब की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने राज्य पर बढ़ते कर्ज और वित्तीय प्रबंधन के संबंध में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। चुघ ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किन कार्यों पर किया गया और राज्य की वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के पास क्या योजना है।
उन्होंने कहा कि सरकार को कर्ज की स्थिति, वित्तीय फैसलों और भविष्य की रणनीति के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि सरकार संसाधनों का प्रबंधन किस तरह कर रही है।
चुघ के अनुसार, वित्तीय जवाबदेही केवल आंकड़े प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सरकार को यह भी स्पष्ट करना होगा कि बढ़ते कर्ज के बीच विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और कर्मचारियों-पेंशनभोगियों के वित्तीय लाभों के लिए संसाधन किस तरह उपलब्ध कराए जाएंगे।
एसआईआर पर बयान को लेकर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से विधानसभा में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चुघ ने कहा कि पंजाब के सामने नशा, अपराध, गैंगस्टरवाद और कर्मचारियों-पेंशनभोगियों के लंबित वित्तीय लाभ जैसे कई गंभीर मुद्दे हैं। ऐसे में इन समस्याओं पर जवाब देने के बजाय एसआईआर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करना ध्यान भटकाने का प्रयास प्रतीत होता है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना किसी का भी अधिकार है, लेकिन ऐसे आरोपों के साथ विशिष्ट मामलों और ठोस प्रमाणों को सामने रखना जरूरी है। यदि मुख्यमंत्री के पास मतदाता सूची में किसी अनियमितता के प्रमाण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
चुघ ने कहा कि मतदाता सूचियों की शुद्धता बनाए रखना और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करना आवश्यक है। इसलिए एसआईआर जैसे विषय पर बहस तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के जरिए।
भगवंत मान और प्रताप सिंह बाजवा से श्वेत पत्र की मांग
तरुण चुघ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा से मांग की कि वे सरकार के पिछले चार वर्ष नौ महीने के कामकाज पर विस्तृत श्वेत पत्र प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि इसमें नशे के खिलाफ कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, गैंगस्टरों और खनन माफिया के विरुद्ध उठाए गए कदम, राज्य के बढ़ते कर्ज तथा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित डीए-डीआर का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल अब तक किए गए कामों का ब्योरा ही नहीं देना चाहिए, बल्कि शेष कार्यकाल में इन समस्याओं के समाधान के लिए उठाए जाने वाले कदमों और उनकी समयसीमा की जानकारी भी सार्वजनिक करनी चाहिए।
चुघ के अनुसार, सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि प्रत्येक प्रमुख मुद्दे पर स्पष्ट लक्ष्य और समयसीमा तय हो। इससे जनता को पता चल सकेगा कि सरकार किन समस्याओं को प्राथमिकता दे रही है और उनके समाधान के लिए क्या योजना बनाई गई है।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाये का भुगतान करे सरकार
भाजपा सांसद ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के कर्मचारी और पेंशनभोगी लंबे समय से अपने बकाया वित्तीय लाभों के भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
चुघ ने सरकार से मांग की कि लंबित डीए-डीआर की कुल राशि, भुगतान की मौजूदा स्थिति और भुगतान पूरा करने की समयसीमा सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उनकी देय राशि मिलना उनका अधिकार है, सरकार की ओर से कोई एहसान नहीं।
उन्होंने कहा कि महंगाई के बीच बकाया राशि का समय पर भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। इसलिए सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए भुगतान की प्रक्रिया और समयसीमा के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
भाषण नहीं, ठोस परिणाम दिखाए सरकार
तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब को राजनीतिक भाषणों और घोषणाओं से आगे बढ़कर जवाबदेही की जरूरत है। नशे के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई, नागरिकों की सुरक्षा, गैंगस्टरवाद पर नियंत्रण, खनन माफिया के खिलाफ प्रभावी कदम, वित्तीय पारदर्शिता और कर्मचारियों-पेंशनभोगियों के बकाये का भुगतान ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सरकार को अपना रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को बताना होगा कि 56 महीनों में उनकी सरकार ने क्या हासिल किया और शेष कार्यकाल में इन समस्याओं से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। भाजपा सांसद ने कहा कि पंजाब की जनता को अब दावों के बजाय स्पष्ट जवाब, पारदर्शिता और जमीन पर दिखाई देने वाले परिणाम चाहिए।
चुघ के बयान के बाद नशे के खिलाफ कार्रवाई, कानून-व्यवस्था और राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। अब इन मुद्दों पर पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया और लंबित सवालों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे।




