हिमाचल प्रदेश सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य सुरक्षा योजना हिमकेयर को अब नए स्वरूप में लागू करने की तैयारी है। लंबे समय से योजना की कार्यप्रणाली, अस्पतालों की बिलिंग और क्लेम भुगतान को लेकर उठते रहे सवालों के बीच सरकार ने इसके स्वास्थ्य सुरक्षा कवच को दोगुना करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था में पात्र परिवारों को एक साल में अधिकतम 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवर मिलेगा।
नए मॉडल में पांच लाख रुपये का मूल स्वास्थ्य कवर होगा, जबकि इसके समाप्त होने के बाद पांच लाख रुपये का अतिरिक्त टॉप-अप कवर उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के करीब 10 लाख परिवारों को योजना के दायरे में लाना है। इस बदलाव के साथ सरकार ने योजना में फर्जी अस्पतालों, गलत बिलिंग और संदिग्ध दावों पर निगरानी मजबूत करने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है।
नई व्यवस्था में बीमा कंपनी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित डिजिटल निगरानी प्रणाली अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य उपचार और क्लेम से जुड़े असामान्य पैटर्न की पहचान कर समय रहते कार्रवाई करना है।
पांच लाख बेसिक और पांच लाख टॉप-अप कवर
नई हिमकेयर व्यवस्था में प्रत्येक पात्र परिवार को सालाना कुल 10 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच देने का प्रावधान रखा गया है। इसमें पांच लाख रुपये का बेसिक कवर और पांच लाख रुपये का टॉप-अप कवर शामिल होगा।
इसका मतलब यह होगा कि निर्धारित मूल कवर समाप्त होने के बाद पात्रता और योजना की शर्तों के अनुसार अतिरिक्त पांच लाख रुपये का टॉप-अप कवर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे गंभीर बीमारियों, महंगी सर्जरी या लंबे इलाज की स्थिति में परिवारों को अधिक वित्तीय सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने योजना के विस्तार के लिए करीब 10 लाख परिवारों को लक्षित किया है। इससे वर्तमान व्यवस्था की तुलना में योजना का संभावित दायरा काफी बढ़ जाएगा।
एआई से संदिग्ध क्लेम की निगरानी
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण बदलाव क्लेम की निगरानी से जुड़ा है। स्वास्थ्य बीमा योजना के संचालन के लिए चयनित होने वाली बीमा कंपनी के लिए एआई और मशीन लर्निंग आधारित डिजिटल प्लेटफार्म उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है।
यह प्रणाली अस्पतालों और उपचार से जुड़े आंकड़ों का डिजिटल विश्लेषण करेगी। इसका उद्देश्य ऐसे मामलों की पहचान करना है, जिनमें सामान्य प्रक्रिया से अलग कोई पैटर्न दिखाई दे।
प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था मरीज को आवश्यकता से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रखने, संदिग्ध या फर्जी क्लेम, एक ही लेनदेन की दोबारा एंट्री, अनावश्यक जांच और जरूरत से ज्यादा सर्जरी जैसे मामलों में वास्तविक समय पर अलर्ट जारी कर सकेगी।
इससे बीमा कंपनी और संबंधित एजेंसियों को संदिग्ध मामलों की जांच करने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से योजना के धन के दुरुपयोग की संभावना कम करना और वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाना है।
फर्जी अस्पताल और बिलिंग पर भी नजर
हिमकेयर योजना में फर्जी अस्पतालों और गलत बिलिंग से जुड़े मामलों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। नई व्यवस्था में इन्हीं जोखिमों को देखते हुए डिजिटल निगरानी को योजना की निविदा प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।
एआई और मशीन लर्निंग प्रणाली अस्पतालों से आने वाले क्लेम और उपचार संबंधी डेटा में असामान्य गतिविधियों की पहचान कर सकेगी। यदि किसी अस्पताल में एक जैसे उपचार, बिलिंग या मरीजों की भर्ती से जुड़े असामान्य पैटर्न दिखाई देते हैं तो सिस्टम संबंधित मामले को जांच के लिए चिन्हित कर सकेगा।
हालांकि, किसी क्लेम को केवल डिजिटल अलर्ट के आधार पर फर्जी घोषित करने के बजाय संबंधित प्रक्रिया के तहत उसकी जांच की जाएगी। डिजिटल प्रणाली का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध मामलों की पहचान और निगरानी को तेज करना होगा।
10 कंपनियों ने दिखाई रुचि
नई व्यवस्था के तहत योजना के संचालन के लिए हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी ने नया बीमा निविदा ढांचा जारी किया है। कंपनियां 12 अक्टूबर तक आवेदन कर सकती हैं।
निविदा प्रक्रिया से पहले हुई प्री-बिडिंग बैठक में स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र की 10 कंपनियों ने रुचि दिखाई है। निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाली कंपनियों में जो कंपनी सबसे कम प्रीमियम की बोली लगाएगी, उसे योजना के संचालन का ठेका दिया जाएगा।
नई व्यवस्था में बीमा कंपनी का अनुबंध तीन साल का होगा। इससे पहले योजना के लिए बीमा कंपनी का अनुबंध एक वर्ष की अवधि का होने की व्यवस्था थी। सरकार का मानना है कि तीन वर्ष की अवधि से योजना के संचालन में निरंतरता बनी रहेगी और बार-बार निविदा प्रक्रिया की आवश्यकता कम होगी।
सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार
नई हिमकेयर योजना के तहत सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में पात्र लाभार्थियों को कैशलेस उपचार की सुविधा जारी रहेगी। इसका अर्थ है कि पात्र मरीज को योजना के तहत कवर होने वाले उपचार के लिए अस्पताल में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीधे भुगतान करने की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रदेश के बाहर योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में भी भर्ती से पहले और भर्ती के बाद होने वाले निर्धारित खर्चों का लाभ जारी रखने का प्रावधान है। इससे उन मरीजों को राहत मिल सकती है जिन्हें ऐसे उपचार के लिए दूसरे राज्यों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जो प्रदेश में उपलब्ध नहीं हैं या जिनके लिए बाहर के विशेषज्ञ अस्पताल की जरूरत होती है।
10 लाख परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य
नई व्यवस्था में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। पुरानी व्यवस्था में करीब आठ लाख स्वास्थ्य कार्ड बनाए गए थे। इनमें से वर्तमान में लगभग 3.32 लाख कार्ड सक्रिय बताए जा रहे हैं।
सरकार अब योजना का दायरा बढ़ाकर करीब 10 लाख परिवारों तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए पात्र परिवारों को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया को निर्धारित समय पर आगे बढ़ाया जाएगा।
योजना में पंजीकरण की व्यवस्था भी पहले की तरह मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में जारी रहने का प्रावधान है। इससे पात्र लोगों को वर्ष में निर्धारित अवधि के दौरान योजना में शामिल होने या अपना पंजीकरण अपडेट कराने का अवसर मिलेगा।
प्रीमियम का नया ढांचा अभी तय होना बाकी
नई हिमकेयर व्यवस्था में लाभार्थियों से लिए जाने वाले प्रीमियम की अंतिम राशि अभी तय होनी है। पहले सामान्य श्रेणी के लोगों के लिए वार्षिक प्रीमियम 1000 रुपये निर्धारित था, जबकि अलग-अलग श्रेणियों के लिए निश्शुल्क या 365 रुपये जैसी अलग व्यवस्था थी।
नई निविदा प्रक्रिया के बाद प्रीमियम का ढांचा स्पष्ट होगा। बीमा कंपनी के चयन के साथ योजना की वित्तीय शर्तों को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
इसका सीधा असर इस बात पर पड़ेगा कि अलग-अलग श्रेणियों के पात्र परिवारों को योजना का लाभ लेने के लिए कितना प्रीमियम देना होगा। इसलिए नई योजना में 10 लाख रुपये के स्वास्थ्य सुरक्षा कवच के साथ प्रीमियम की अंतिम व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
पहले पांच लाख का था कवर
हिमकेयर की पुरानी व्यवस्था में प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य सुरक्षा कवच उपलब्ध था। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का फैसला किया है।
कवर की राशि में वृद्धि ऐसे समय की जा रही है जब गंभीर बीमारियों और जटिल उपचार की लागत लगातार बढ़ रही है। पांच लाख रुपये का मूल कवर और उसके बाद पांच लाख रुपये का टॉप-अप कवर परिवारों को महंगे उपचार के दौरान अतिरिक्त वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
हालांकि, वास्तविक लाभ उपचार की प्रकृति, योजना की शर्तों, अस्पताल की सूची और निर्धारित पैकेज के अनुसार मिलेगा।
तीन साल का अनुबंध, संचालन में निरंतरता की कोशिश
नई व्यवस्था में बीमा कंपनी का अनुबंध तीन वर्ष के लिए करने का प्रावधान भी महत्वपूर्ण बदलाव है। पुरानी व्यवस्था में कंपनी का अनुबंध एक वर्ष के लिए था।
तीन वर्ष का अनुबंध होने से बीमा कंपनी को लंबे समय तक योजना का संचालन करने का अवसर मिलेगा। सरकार को भी हर वर्ष नई कंपनी चुनने की प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही योजना के डिजिटल सिस्टम, अस्पताल नेटवर्क और क्लेम प्रबंधन को लंबे समय के लिए एकीकृत तरीके से संचालित करने की संभावना बढ़ेगी।
हालांकि, अनुबंध की शर्तों में बीमा कंपनी के प्रदर्शन, क्लेम निपटान, अस्पतालों के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे।
तकनीक आधारित निगरानी पर बढ़ा जोर
नई हिमकेयर व्यवस्था में सरकार ने स्पष्ट रूप से तकनीक को निगरानी का प्रमुख आधार बनाया है। एआई और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल केवल फर्जी क्लेम पकड़ने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अस्पतालों में मरीजों की भर्ती, उपचार, जांच और बिलिंग के पैटर्न की निगरानी में भी किया जाएगा।
रियल टाइम अलर्ट व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि संदिग्ध गतिविधि सामने आने के बाद लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। सिस्टम द्वारा चिन्हित मामलों को संबंधित स्तर पर जांच के लिए भेजा जा सकेगा।
इससे योजना के संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने और सरकारी धन की सुरक्षा करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही वास्तविक मरीजों को उपचार का लाभ समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर रहेगा।
नई हिमकेयर व्यवस्था में एक ओर परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा कवच को पांच लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है, वहीं दूसरी ओर योजना के संचालन और निगरानी को तकनीक आधारित बनाया जा रहा है। करीब 10 लाख परिवारों को जोड़ने, सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार जारी रखने तथा प्रदेश के बाहर सूचीबद्ध अस्पतालों में निर्धारित लाभ उपलब्ध कराने की व्यवस्था रखी गई है।
अब 12 अक्टूबर तक प्राप्त होने वाले आवेदनों और आगे की निविदा प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट होगा कि योजना के संचालन के लिए कौन सी कंपनी चुनी जाती है और लाभार्थियों के लिए प्रीमियम की नई दरें क्या होंगी। सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़े हुए स्वास्थ्य कवर के साथ योजना की वित्तीय स्थिरता और फर्जी दावों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने की होगी।




