चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों को लेकर तरुण चुग का पलटवार, कहा- आयोग के स्पष्टीकरण से स्थिति साफ

चुनाव आयोग पर कांग्रेस के आरोपों को लेकर तरुण चुग का पलटवार, कहा- आयोग के स्पष्टीकरण से स्थिति साफ

भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी एवं सांसद तरुण चुग ने चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से लगाए जा रहे आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की पूर्ण बैठक के बाद जारी प्रेस नोट से विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर आयोग ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर से जुड़े प्रमुख निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे।

तरुण चुग ने कहा कि कांग्रेस ने एक रिपोर्ट के आधार पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में एसआईआर से जुड़े निर्णयों की प्रक्रिया और पूर्ण आयोग की भूमिका को स्पष्ट किया है। उनके मुताबिक, आयोग के स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों पर फिर से चर्चा जरूरी हो गई है।

पूर्ण आयोग की बैठक के बाद जारी हुआ बयान

चुनाव आयोग की 26 सितंबर को नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में पूर्ण बैठक हुई। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल हुए। आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि बैठक में लिए गए निर्णयों को पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त थी।

आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित फैसलों को लेकर कहा कि 24 जून 2025 को जारी मूल आदेश और इसके विभिन्न चरणों की समय-सारणी पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से मंजूर की गई थी। आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर से संबंधित प्रक्रिया के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के 27 मई 2026 के आदेश का संज्ञान लिया गया है।

तरुण चुग ने इसी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस की ओर से आयोग के भीतर मतभेदों को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उनके संदर्भ में आयोग ने अपनी स्थिति सार्वजनिक कर दी है।

कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर भी उठाए सवाल

तरुण चुग ने कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस पत्र को एसआईआर और चुनाव आयोग की नीतिगत कार्यप्रणाली से जोड़कर राजनीतिक मुद्दा बनाया।

चुनाव आयोग के मुताबिक, यह पत्र आयोग की किसी नीतिगत विषयवस्तु या सूचना प्रौद्योगिकी विभाग से संबंधित नहीं था। आयोग ने इसे प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा प्रशासनिक मामला बताया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-वितरण आदेश दो चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग पर उप चुनाव आयुक्त की निगरानी समाप्त नहीं हुई थी।

चुग ने कहा कि कांग्रेस ने जिस मामले को एसआईआर और चुनाव आयोग की नीतियों से जोड़कर पेश किया, आयोग के स्पष्टीकरण के अनुसार वह प्रशासनिक प्रकृति का विषय था। उन्होंने कांग्रेस से इस पूरे मामले पर अपने आरोपों के आधार के बारे में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।

एसआईआर को लेकर आयोग ने किए कई बदलाव

26 सितंबर की बैठक में चुनाव आयोग ने एसआईआर से जुड़े कई प्रक्रियात्मक फैसले भी लिए। आयोग ने कहा कि जिन मतदाताओं को उनके रिकॉर्ड के मिलान में समस्या या अन्य तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस जारी हुआ है, उनके घर पर बूथ लेवल अधिकारी जाकर दस्तावेज एकत्र कर सकेंगे। इसके बाद दस्तावेज ईसीआईनेट पर अपलोड किए जाएंगे और संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी मामले पर फैसला करेगा। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए कार्यालय बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी।

आयोग ने यह भी कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में सुनवाई की जरूरत होने पर इसे ऑनलाइन कराने को प्राथमिकता दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर मतदाता की ओर से परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी सुनवाई में शामिल हो सकेगा।

इसके अलावा रात में आश्रय लेने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीबों और बेघर लोगों सहित अन्य जरूरतमंद वर्गों के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को पर्याप्त संख्या में सहायता केंद्र और विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

फॉर्म-6 को लेकर भी आयोग की स्थिति

तरुण चुग ने फॉर्म-6 को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 के साथ लगाए जाने वाले घोषणा-पत्र को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

आयोग ने कहा है कि एसआईआर के दौरान फॉर्म-6 के साथ दिया जाने वाला घोषणा-पत्र सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचारित व्यवस्था से जुड़ा है। वहीं, एसआईआर की अवधि से अलग सामान्य परिस्थितियों में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रक्रिया लागू रहती है।

चुग ने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों को तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए, ताकि मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

ईसीआईनेट की स्वतंत्र समीक्षा का फैसला

चुनाव आयोग ने ईसीआईनेट प्रणाली को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आयोग ने कहा कि इस प्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाएगी। इसके लिए आईआईटी या आईआईआईटी से जुड़े एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल करते हुए समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है।

समिति ईसीआईनेट की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगी और यह देखा जाएगा कि प्रणाली संबंधित कानूनों और नियमों के अनुरूप काम कर रही है या नहीं।

तरुण चुग ने कहा कि आयोग ने तकनीकी व्यवस्था से जुड़े सवालों को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी स्वतंत्र समीक्षा का रास्ता चुना है। उनके अनुसार, इससे चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था की जांच एक स्वतंत्र विशेषज्ञ के माध्यम से किए जाने का रास्ता खुलेगा।

कांग्रेस के आरोपों पर चुग का राजनीतिक पलटवार

तरुण चुग ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर राजनीतिक हमला भी किया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को तथ्यों की जांच करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावी परिणामों को स्वीकार करना जरूरी है। उनके अनुसार, जब कांग्रेस या उसके सहयोगी दल चुनाव जीतते हैं तो चुनाव आयोग, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को स्वीकार किया जाता है, लेकिन जब परिणाम विपरीत आता है तो ईवीएम, मतदाता सूची या चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

चुग ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग राज्यों में चुनाव परिणामों के आधार पर चुनावी संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को अपने संगठन और जनाधार पर ध्यान देना चाहिए।

हालांकि, कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर को लेकर लगातार सवाल उठाए गए हैं। 27 सितंबर को कांग्रेस ने आयोग के नए उपायों को पर्याप्त नहीं बताते हुए एसआईआर को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। कांग्रेस का कहना है कि केवल चरणबद्ध प्रक्रियात्मक बदलावों से मतदाता सूची से जुड़े उसके उठाए सवालों का समाधान नहीं होता।

संस्थाओं पर बहस के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद

चुनाव आयोग के 26 सितंबर के बयान के बाद एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आयोग ने जहां अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है, वहीं विपक्षी दल एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाता सूची और आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल उठाते रहे हैं।

तरुण चुग ने कहा कि अब आयोग का आधिकारिक बयान सार्वजनिक है और उसके आधार पर कांग्रेस को अपने आरोपों की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के संबंध में गंभीर आरोप लगाते समय तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड को ध्यान में रखना जरूरी है।

उन्होंने कांग्रेस पर चुनावी हार की जिम्मेदारी संस्थाओं पर डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को जनता के फैसले को स्वीकार करना चाहिए। उनके मुताबिक, संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कटघरे में खड़ा करने के बजाय राजनीतिक दलों को जनता के बीच अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर समर्थन हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए।

फिलहाल एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। आयोग ने अपनी ओर से प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए हैं, ईसीआईनेट की स्वतंत्र समीक्षा का फैसला लिया है और प्रमुख एसआईआर निर्णयों को पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन कदमों के बावजूद अपनी आपत्तियां बरकरार रखी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में एसआईआर और मतदाता सूची का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में बने रहने की संभावना है।