गुरुग्राम में प्रदूषण नियंत्रण की तैयारी तेज, 404 किमी सड़क की होगी मैकेनिकल सफाई

गुरुग्राम में प्रदूषण नियंत्रण की तैयारी तेज, 404 किमी सड़क की होगी मैकेनिकल सफाई

सर्दियों के प्रदूषण से निपटने को नगर निगम का एक्शन प्लान तैयार, धूल से ट्रैफिक तक हर मोर्चे पर कसेगा शिकंजा

चंडीगढ़। सर्दियों में हवा की गुणवत्ता खराब होने की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। आगामी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) अवधि शुरू होने से पहले शहर में धूल नियंत्रण, सड़क सफाई, निर्माण एवं विध्वंस कचरे के प्रबंधन, वायु गुणवत्ता की निगरानी और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभागवार लक्ष्य तय किए गए हैं। निगम का फोकस उन गतिविधियों पर रहेगा, जिनसे सर्दियों के दौरान हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की संभावना रहती है।

मंगलवार को निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अब तक की तैयारियों और लंबित कार्यों की जानकारी दी। निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रेप लागू होने से पहले सभी जरूरी मशीनरी, संसाधन और व्यवस्थाएं पूरी तरह तैयार होनी चाहिए। साथ ही जिन कार्यों को लेकर लक्ष्य तय किए गए हैं, उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया।

सड़क की धूल पर रहेगा विशेष जोर

नगर निगम ने सड़क से उड़ने वाली धूल को वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल करते हुए मैकेनिकल स्वीपिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। सर्वे के बाद शहर के 404.61 किलोमीटर के सड़क नेटवर्क को मैकेनिकल स्वीपिंग के लिए उपयुक्त पाया गया है। निगम के पास फिलहाल सड़क सफाई के लिए 24 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध हैं।

इन मशीनों के जरिए प्रतिदिन 600 किलोमीटर से अधिक चार लेन सड़क की सफाई का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक मशीनों का संचालन मुख्य रूप से रात नौ बजे से सुबह सात बजे तक किया जाता है। रात के समय यातायात का दबाव अपेक्षाकृत कम रहने के कारण मशीनों से सफाई कराने में सुविधा होती है और दिन के दौरान वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित नहीं होती।

सर्दियों के दौरान सड़क की धूल हवा की गुणवत्ता को प्रभावित न करे, इसके लिए सफाई व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई जाएगी। विशेष रूप से अधिक यातायात वाले मार्गों और ऐसे हिस्सों पर ध्यान दिया जाएगा जहां सड़क किनारे मिट्टी या धूल जमा होने की संभावना ज्यादा रहती है।

आठ स्थानों पर होगी वायु गुणवत्ता की निगरानी

शहर में वायु प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी है। फिलहाल शहर में तीन एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन काम कर रहे हैं। निगम ने इनकी संख्या बढ़ाकर आठ करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

पांच नए मॉनिटरिंग स्टेशनों की जरूरत वाले स्थानों को चिह्नित कर लिया गया है। इन नए केंद्रों को दिसंबर 2026 तक स्थापित करने की समयसीमा तय की गई है। इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों में हवा की गुणवत्ता से संबंधित अधिक व्यापक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।

अधिकारियों का मानना है कि अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाला रियल टाइम डेटा प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति तैयार करने में मदद करेगा। किसी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर वहां की स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर तत्काल नियंत्रण उपाय किए जा सकेंगे। इसके अलावा प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और उनके प्रभाव का आकलन करने में भी निगरानी केंद्र उपयोगी होंगे।

निर्माण कचरे के निस्तारण पर भी निगरानी

शहर में निर्माण एवं विध्वंस यानी सीएंडडी कचरे के उचित निस्तारण को भी प्रदूषण नियंत्रण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। निर्माण स्थलों से निकलने वाला मलबा यदि खुले में पड़ा रहे या सड़क किनारे बिखरता रहे तो इससे धूल उड़ने की समस्या बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निगम ने सीएंडडी कचरे के संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण की व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।

शहर में सीएंडडी कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता 1500 टन प्रतिदिन है। निगम की ओर से 12 सेकेंडरी कलेक्शन पॉइंट्स को सीएंडडी वेस्ट पोर्टल पर लाइव किया जा चुका है। इन केंद्रों के माध्यम से निर्माण एवं विध्वंस कचरे की आवाजाही और निस्तारण की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।

इस वर्ष जनवरी से अगस्त के बीच 3.38 लाख टन से अधिक सीएंडडी कचरे का ऑफटेक किया जा चुका है। निगम अब इसकी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर वेब कैमरे लगाए जाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि कचरे के संग्रह और उठान की प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके।

2026 में 396 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य

प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों को सड़क ढांचे में सुधार से भी जोड़ा गया है। वर्ष 2026 के दौरान नगर निगम ने 396 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास का लक्ष्य निर्धारित किया है। निगम के अनुसार अब तक 179.04 किलोमीटर सड़क का पुनर्विकास पूरा किया जा चुका है।

सड़कों की स्थिति बेहतर होने से टूटे हुए हिस्सों, गड्ढों और कच्चे किनारों से उठने वाली धूल को कम करने में मदद मिल सकती है। सड़क निर्माण और पुनर्विकास के दौरान भी धूल नियंत्रण के उपायों पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि एक समस्या को नियंत्रित करते हुए दूसरी जगह प्रदूषण न बढ़े।

निगम ने अधिकारियों से शेष सड़क कार्यों को तय समय के भीतर पूरा करने और निर्माण गतिविधियों के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

31 जाम वाले स्थानों की पहचान

प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति में यातायात प्रबंधन को भी शामिल किया गया है। शहर में 31 ऐसे स्थानों की पहचान की गई है जहां नियमित रूप से यातायात का दबाव बढ़ता है और जाम की स्थिति बनती है। इनमें से चार स्थानों पर आवश्यक कार्य पूरा किया जा चुका है।

यातायात जाम के दौरान वाहन लंबे समय तक एक ही स्थान पर खड़े रहते हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ने के साथ वाहनों से निकलने वाले धुएं का प्रभाव भी बढ़ सकता है। ऐसे में ट्रैफिक कंजेशन कम करना प्रदूषण नियंत्रण की व्यापक रणनीति का हिस्सा बनाया गया है।

निगम ने शेष हॉटस्पॉट पर भी चरणबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ाने की योजना बनाई है। संबंधित विभागों को स्थानीय स्तर पर यातायात प्रवाह, सड़क की क्षमता और उपलब्ध स्थान के आधार पर समाधान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

आईटीएमएस और एएनपीआर कैमरों की भी समीक्षा

समीक्षा बैठक में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम यानी आईटीएमएस की प्रगति पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा एएनपीआर कैमरों की स्थिति और ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े अन्य उपायों की समीक्षा की गई।

आईटीएमएस और कैमरा आधारित निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यातायात के प्रवाह पर बेहतर नजर रखना और आवश्यकता के अनुसार व्यवस्था में बदलाव करना है। जाम वाले स्थानों की पहचान, वाहनों की आवाजाही की निगरानी और यातायात नियंत्रण के लिए तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यातायात प्रबंधन से जुड़े सभी तकनीकी उपकरणों की कार्यशीलता सुनिश्चित की जाए और जहां सुधार या अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है, वहां समय रहते कार्रवाई की जाए।

ग्रेप से पहले तैयारियां पूरी करने के निर्देश

बैठक में निगमायुक्त ने सभी विभागों को ग्रेप अवधि शुरू होने से पहले अपनी-अपनी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए। खास तौर पर उन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया जो प्रदूषण नियंत्रण के दौरान तत्काल इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

सड़क सफाई मशीनों की उपलब्धता, सीएंडडी कचरे का उठान, मॉनीटरिंग स्टेशनों की व्यवस्था, सड़क सुधार, यातायात प्रबंधन और तकनीकी निगरानी जैसे सभी कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखने को कहा गया।

निगम की योजना प्रदूषण नियंत्रण को किसी एक विभाग तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय के साथ लागू करने की है। सड़क की धूल, निर्माण कचरा और यातायात दबाव जैसे अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ काम करने से सर्दियों के दौरान वायु गुणवत्ता में गिरावट को नियंत्रित करने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।

अब आने वाले समय में निगम का फोकस तय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने और ग्रेप अवधि के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रखने पर रहेगा। 404.61 किलोमीटर सड़क नेटवर्क की यांत्रिक सफाई, आठ वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों का लक्ष्य, सीएंडडी कचरे की निगरानी, 396 किलोमीटर सड़क पुनर्विकास और 31 यातायात हॉटस्पाट पर कार्रवाई को इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।