लुधियाना बनेगा स्वच्छता का मॉडल शहर, केंद्र की ‘प्रगति-50’ पहल में शामिल

लुधियाना बनेगा स्वच्छता का मॉडल शहर, केंद्र की ‘प्रगति-50’ पहल में शामिल

पंजाब के दो प्रमुख शहरों लुधियाना और अमृतसर को केंद्र सरकार की नई ‘प्रगति-50’ पहल के लिए चुना गया है। इस पहल के तहत दोनों शहरों में शहरी स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था को व्यापक स्तर पर मजबूत किया जाएगा। उद्देश्य केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की नियमित सफाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कचरे के संग्रह से लेकर उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण तक पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को ‘प्रगति-50’ पहल की शुरुआत की। इसे स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत लागू किया जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से 24 राज्यों के 50 शहरों को इस पहल में शामिल किया गया है। पंजाब से लुधियाना और अमृतसर को स्थान मिला है। दोनों शहरों की अलग-अलग शहरी पहचान और बढ़ती आबादी को देखते हुए यहां स्वच्छता व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाने पर जोर दिया जाएगा।

केवल सफाई नहीं, पूरी कचरा व्यवस्था में होगा सुधार

‘प्रगति-50’ के तहत शहरों में सफाई व्यवस्था को केवल रोजाना कचरा उठाने और सड़कों की सफाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा। योजना का मुख्य जोर पूरे ठोस कचरा प्रबंधन तंत्र को मजबूत करने पर है। इसमें घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कचरे का संग्रह, उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटना, निर्धारित स्थानों तक पहुंचाना, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निस्तारण जैसी पूरी प्रक्रिया शामिल होगी।

शहरों में पैदा होने वाले कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि कचरे के संग्रह और निस्तारण की व्यवस्था वैज्ञानिक तरीके से नहीं हो तो इसका असर सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए चयनित शहरों में मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ शहरों में स्वच्छता के अन्य पहलुओं को भी इस पहल से जोड़ा गया है। सार्वजनिक स्थानों की सफाई, कचरे के खुले में जमा होने की समस्या और अपशिष्ट के उचित निस्तारण जैसे मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाएगा।

लुधियाना के लिए महत्वपूर्ण पहल

लुधियाना पंजाब का प्रमुख औद्योगिक शहर है। यहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और रिहायशी क्षेत्रों के कारण रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है। शहर के तेजी से विस्तार के साथ ठोस कचरा प्रबंधन की जरूरत भी बढ़ी है।

‘प्रगति-50’ में शामिल किए जाने के बाद लुधियाना में कचरे के संग्रह और परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा सकता है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में उत्पन्न होने वाले कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार एकत्र करने और उसके प्रसंस्करण की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

औद्योगिक गतिविधियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के कारण शहर के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कचरे को स्रोत स्तर पर अलग करने, उसके पुनर्चक्रण योग्य हिस्से का उपयोग करने और बाकी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में व्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सकता है।

इसके अलावा शहर की सफाई व्यवस्था की नियमित निगरानी भी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि तय किए गए कार्य किस स्तर तक पूरे हुए और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

अमृतसर में पर्यटन के साथ स्वच्छता पर जोर

अमृतसर पंजाब का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है। श्री हरमंदिर साहिब सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के कारण यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे शहर में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था का सीधा संबंध शहर की समग्र छवि से भी है।

‘प्रगति-50’ के तहत अमृतसर में स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ कचरे के संग्रह, परिवहन और प्रसंस्करण की व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा। सार्वजनिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखने के लिए भी अधिक व्यवस्थित व्यवस्था विकसित करने पर जोर रहेगा।

शहर में आने वाले लोगों की संख्या को देखते हुए कचरे के उत्पादन में भी समय और स्थान के हिसाब से अंतर रहता है। ऐसे में नियमित सफाई व्यवस्था के साथ कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता है। पहल के तहत इसी तरह की चुनौतियों को ध्यान में रखकर शहर की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

प्रयुक्त जल के प्रबंधन पर भी ध्यान

इस पहल का दायरा केवल ठोस कचरे तक सीमित नहीं है। चयनित शहरों में प्रयुक्त जल, यानी इस्तेमाल हो चुके पानी, के बेहतर प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। शहरों में घरेलू और अन्य गतिविधियों से निकलने वाले पानी का उचित प्रबंधन शहरी स्वच्छता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसलिए शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को एक समग्र प्रणाली के रूप में विकसित करने की योजना है। इसमें ठोस कचरे के साथ-साथ प्रयुक्त जल के प्रबंधन, सार्वजनिक स्वच्छता और संबंधित शहरी सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय पर ध्यान दिया जाएगा।

इससे शहरों में स्वच्छता व्यवस्था को अलग-अलग विभागों की गतिविधियों के बजाय एक समेकित प्रणाली के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल निगरानी से होगी कार्यों की समीक्षा

‘प्रगति-50’ की एक प्रमुख विशेषता डिजिटल निगरानी व्यवस्था है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के अनुसार चयनित शहरों में स्वच्छता से जुड़े कार्यों की प्रगति पर नजर रखने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किया गया है।

इस प्रणाली के जरिए अलग-अलग शहरों में चल रहे कार्यों की नियमित निगरानी की जाएगी। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी केंद्रीय स्तर पर भी उपलब्ध रहेगी। निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले कितना काम हुआ और किन क्षेत्रों में काम की गति बढ़ाने की जरूरत है, इसकी समीक्षा डिजिटल माध्यम से की जा सकेगी।

डिजिटल निगरानी के कारण स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले कार्यों की रिपोर्टिंग और प्रगति का आकलन अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। शहरों के प्रदर्शन और उनकी जरूरतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करने में भी यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।

हर दो महीने में केंद्रीय स्तर पर समीक्षा

केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल स्वयं इस पहल की प्रगति की समीक्षा प्रत्येक दो महीने में करेंगे। इससे चयनित शहरों में चल रहे स्वच्छता सुधार कार्यों पर लगातार केंद्रीय स्तर की नजर बनी रहेगी।

नियमित समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के तहत तय किए गए लक्ष्यों को निर्धारित समय में पूरा किया जाए। यदि किसी शहर में किसी कार्य में देरी होती है या किसी व्यवस्था में अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ती है तो समीक्षा के दौरान उस पर चर्चा की जा सकेगी।

इस व्यवस्था के तहत लुधियाना और अमृतसर की प्रगति भी नियमित रूप से केंद्रीय स्तर पर देखी जाएगी। स्थानीय निकायों को अपने-अपने शहरों में योजनाबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ाना होगा।

24 राज्यों के 50 शहरों का चयन

‘प्रगति-50’ को देश के विभिन्न हिस्सों में शहरी स्वच्छता के स्तर को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया है। इसके तहत 24 राज्यों के कुल 50 शहरों का चयन किया गया है। प्रत्येक शहर की स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार स्वच्छता तथा कचरा प्रबंधन से संबंधित व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर रहेगा।

पंजाब के हिस्से में लुधियाना और अमृतसर आए हैं। दोनों शहरों का चयन उनके अलग-अलग शहरी स्वरूप को देखते हुए भी महत्वपूर्ण है। एक ओर लुधियाना औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है, वहीं अमृतसर धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के कारण अलग तरह की शहरी चुनौतियों वाला शहर है।

इस कारण दोनों शहरों में पहल के तहत किए जाने वाले कार्यों की प्राथमिकताएं स्थानीय जरूरतों के अनुसार अलग हो सकती हैं। हालांकि व्यापक लक्ष्य शहरों को बेहतर स्वच्छता व्यवस्था, प्रभावी कचरा प्रबंधन और वैज्ञानिक अपशिष्ट निस्तारण की दिशा में आगे बढ़ाना रहेगा।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 से जुड़ी पहल

‘प्रगति-50’ को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत शुरू किया गया है। मिशन के दूसरे चरण में शहरों को कचरा मुक्त बनाने, ठोस कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और शहरी स्वच्छता के स्तर को बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है।

नई पहल में चुने गए शहरों को मॉडल के तौर पर विकसित करने की कोशिश होगी। इसके तहत शहरों में पहले से मौजूद व्यवस्था की कमियों को पहचानकर उन्हें दूर किया जाएगा और जहां जरूरत होगी वहां तकनीक तथा आधुनिक प्रबंधन प्रणाली का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।

लुधियाना और अमृतसर के लिए अब अगला चरण स्थानीय स्तर पर कार्ययोजना तैयार करने और उसे लागू करने का होगा। कचरा संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण, निस्तारण, प्रयुक्त जल प्रबंधन और डिजिटल निगरानी जैसे क्षेत्रों में तय लक्ष्यों के आधार पर काम आगे बढ़ेगा।

यदि निर्धारित व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो दोनों शहरों में स्वच्छता सेवाओं की निगरानी अधिक व्यवस्थित हो सकती है। साथ ही कचरा प्रबंधन की पूरी श्रृंखला को एक-दूसरे से जोड़कर काम करने की व्यवस्था विकसित होगी। केंद्र की इस पहल के तहत अब लुधियाना और अमृतसर की प्रगति पर नियमित नजर रखी जाएगी और प्रत्येक दो महीने में इसकी समीक्षा की जाएगी।